डिजिटल कृषि मिशन की बढ़ी रफ्तार, 10.41 करोड़ Farmer ID बनीं; 5.9 लाख गांवों की मैपिंग पूरी

Published on 23 अग॰ 2026

23 अगस्त 2026, नई दिल्ली: डिजिटल कृषि मिशन की बढ़ी रफ्तार, 10.41 करोड़ Farmer ID बनीं; 5.9 लाख गांवों की मैपिंग पूरी – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में शुरू किए गए डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की प्रगति और आगे की रणनीति को लेकर पूसा में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योजनाओं का लाभ कागजों और रिपोर्टों तक सीमित न रहकर किसानों के खेत और उनकी जेब तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने राज्यों से मिशन के तहत तय लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और जमीन पर योजनाओं का प्रभाव सुनिश्चित करने की अपील की।

सम्मेलन में बताया गया कि एग्रीस्टैक डिजिटल कृषि मिशन के तहत अब तक 10.41 करोड़ फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं। इसमें 26 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं। फार्मर आईडी का कवरेज PM-KISAN के करीब 84.68 प्रतिशत और लगभग ऑपरेशनल होल्डिंग्स के 77 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसका उद्देश्य कृषि सेवाओं और योजनाओं की डिलीवरी को तेज और अधिक पारदर्शी बनाना है, ताकि सही किसान को सही समय पर लाभ मिल सके।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने Farmer ID के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इसके बनने के बाद भुगतान सीधे किसानों के खातों में पहुंच रहा है, जिससे भुगतान की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हुई है। उन्होंने महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए समय पर भुगतान से किसानों को मिले लाभ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि Farmer ID बनाने और इसके लिए शिविर आयोजित करने के लिए केंद्र की ओर से फंड भी उपलब्ध कराया गया है।

5.9 लाख गांवों की मैपिंग पूरी

डिजिटल कृषि मिशन के तहत गांवों के नक्शों की जियो-रेफरेंसिंग में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अब तक करीब 5.9 लाख गांवों को कवर किया जा चुका है, जो पहचाने गए गांवों का 93.05 प्रतिशत है। इससे सटीक क्रॉप सर्वे और लैंड पार्सल आधारित कृषि सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

शिवराज सिंह चौहान ने लैंड और डिजिटल सर्वे को मिशन की रीढ़ बताते हुए कहा कि नक्शों को जोड़ने और डेटा के वेरिफिकेशन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई जगह तकनीकी कारणों से सर्वे का डेटा पूरी तरह सटीक नहीं आ रहा है। ऐसे मामलों में जमीन पर व्यावहारिक समाधान निकालना होगा, ताकि डिजिटल रिकॉर्ड वास्तविक जमीन की स्थिति से मेल खाए और योजनाओं का लाभ सही किसानों तक पहुंचे।

692 जिलों में डिजिटल क्रॉप का लक्ष्य

Digital Crop Survey का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2024-25 में यह 290 जिलों तक सीमित था, जो रबी 2025-26 में बढ़कर 650 जिलों तक पहुंच गया। अब खरीफ 2026-27 में इसे 692 जिलों में लागू करने की योजना है।

क्षेत्र कवरेज की बात करें तो यह 2024-25 में 3.87 करोड़ हेक्टेयर से बढ़कर 2025-26 में 9.18 करोड़ हेक्टेयर हो गया। खरीफ 2026-27 के लिए 13.4 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है।

दलहन उत्पादन बढ़ा, आयात निर्भरता घटी

सम्मेलन में दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की प्रगति भी सामने रखी गई। आंकड़ों के अनुसार, देश में दलहन उत्पादन वर्ष 2024-25 के 256.83 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 274.09 लाख मीट्रिक टन हो गया। वहीं, दलहन की खेती का क्षेत्रफल 277.20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 286.46 लाख हेक्टेयर हुआ है।

दलहन की उत्पादकता में भी सुधार हुआ है। यह 2024-25 में 926 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी, जो 2025-26 में बढ़कर 957 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई। घरेलू उत्पादन बढ़ने का असर आयात पर भी पड़ा है। दलहन की आयात निर्भरता 72.56 लाख मीट्रिक टन से घटकर 59.64 लाख मीट्रिक टन रह गई है।

प्रोसेसिंग और मार्केट कनेक्टिविटी पर जोर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए बीज से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना जरूरी है। इसके लिए प्रोसेसिंग यूनिट, भंडारण और बाजार कनेक्टिविटी को बढ़ाने पर जोर दिया गया।

दलहन मिशन के तहत वर्ष 2026-27 में राज्यों में कुल 528 प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। केंद्रीय मंत्री ने शासकीय और निजी भागीदारी के जरिए इन इकाइयों को तेजी से विकसित करने की जरूरत बताई, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिल सके। उन्होंने राज्यों से सफल प्रयोगों और बेहतर कार्यप्रणालियों को दूसरे राज्यों में भी अपनाने की अपील की। साथ ही समय पर कृषि इनपुट और भुगतान सुनिश्चित करने तथा योजनाओं में किसी भी तरह की अनियमितता पर निगरानी रखने के निर्देश दिए।  

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture