रायगढ़ : पीएम किसान सम्मान निधि की बचत से खरीदी पहली गाय, आज 1

Published on 4 सित॰ 2026

रायगढ़ : पीएम किसान सम्मान निधि की बचत से खरीदी पहली गाय, आज 10 गायों के साथ आत्मनिर्भर बने 75 वर्षीय परशुराम गुप्ता

रायगढ़, 4 सितम्बर 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना कई किसानों के लिए नई संभावनाओं का आधार बन रही है। ग्राम पंचायत महापल्ली के 75 वर्षीय किसान परशुराम गुप्ता ने भी योजना के तहत प्राप्त राशि को केवल दैनिक जरूरतों में खर्च करने के बजाय बचत कर गौ-पालन की शुरुआत की और आज वे सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय संचालित कर रहे हैं।

परशुराम गुप्ता ने वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली दो-दो हजार रुपए की किस्तों को बचाकर लगभग 10 हजार रुपए की पूंजी जुटाई। इसी राशि से उन्होंने पहली गाय खरीदी और गौ-पालन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपनी आय और संसाधनों को बढ़ाते हुए एक-एक कर गायों की संख्या में वृद्धि की।

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आज उनके पास 10 गाय हैं और वे नियमित रूप से दूध उत्पादन कर रहे हैं। वर्तमान में गुप्ता प्रतिदिन लगभग 100 लीटर दूध बेचते हैं। वे दूध को स्थानीय डेयरी में 40 रुपए प्रति लीटर की दर से विक्रय करते हैं। इससे उनके गौ-पालन व्यवसाय का मासिक कारोबार लगभग 1 लाख 20 हजार रुपए तक पहुंच रहा है। खर्च निकालने के बाद होने वाली आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

75 वर्ष की आयु में भी परशुराम गुप्ता पूरी लगन के साथ गौ-सेवा और गौ-पालन से जुड़े हुए हैं। वे बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें पशुपालन का शौक था और गायों की सेवा उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से प्राप्त राशि ने उन्हें अपने इस अनुभव और रुचि को आय के बेहतर माध्यम में बदलने की प्रारंभिक पूंजी उपलब्ध कराई।

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गुप्ता कहते है कि शासकीय योजनाओं से मिलने वाली छोटी-छोटी आर्थिक सहायता का योजनाबद्ध उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्र के किसान आत्मनिर्भरता की दिशा मंब मजबूत कदम बढ़ा सकते हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि से शुरू हुआ उनका छोटा प्रयास आज एक सफल गौ-पालन व्यवसाय के रूप में विकसित हो चुका है। यदि अनुभव, मेहनत और उपलब्ध संसाधनों का सही दिशा में उपयोग किया जाए तो उम्र कभी भी आत्मनिर्भर बनने की राह में बाधा नहीं बनती।