फेंटा से मैगी तक... भारत में 100 से ज्यादा फुड पैकेट पर लगेंगे लाल निशान, क्यों?

Published on 31 अग॰ 2026

फेंटा से मैगी तक... भारत में 100 से ज्यादा फुड पैकेट पर लगेंगे लाल निशान, क्यों?

फूड पैकेट पर लाल लेबल लगेगाImage Credit source: getty image

चिप्स का पैकेट हो, बिस्किट का डिब्बा या ठंडी ड्रिंक की बोतल… अब इन्हें खरीदने से पहले आपको पैकेट के पीछे लिखी छोटी-छोटी पोषण संबंधी जानकारी पढ़ने की जरूरत शायद न पड़े. भारत में पैकेज्ड फूड पर सामने ही लाल रंग का चेतावनी निशान लगाने की तैयारी हो रही है. इस निशान से तुरंत पता चल सकेगा कि किसी खाने या पीने की चीज में चीनी, नमक या फैट जरूरत से ज्यादा है. मोटापा, डायबिटीज और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच यह मुद्दा खासा अहम हो गया है.

FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में फ्रंट पैकेज चेतावनी लेबल का प्रस्ताव रखा है. वहीं, ICMR-NIN की 2024 की आहार संबंधी गाइडलाइन भी ज्यादा चीनी, नमक, फैट और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड खाने से सावधानी बरतने की सलाह देती है. हालांकि, खाद्य कंपनियां ऐसे चेतावनी निशानों को लेकर सवाल उठा रही हैं. ऐसे में सवाल है कि पैकेट पर लाल निशान लगने से क्या वाकई लोग अपना खाना बदलेंगे, या फिर यह सिर्फ पैकेजिंग पर एक और निशान बनकर रह जाएगा?

पैकेट के आगे लाल रंग का निशान

सुप्रीम कोर्ट में दिए एक प्रस्ताव में पैकेट के आगे लाल रंग का हेक्सागोन यानी छह कोनों वाला निशान लगाने की बात कही है. इसमें प्रोडक्ट के हिसाब से ‘ज्यादा चीनी’, ‘ज्यादा नमक’, ‘ज्यादा फैट’ या ‘बहुत ज्यादा मीठा पेय’ जैसी चेतावनी दिखाई जा सकती है. मकसद यह है कि ग्राहक को पैकेट पलटकर बारीक अक्षरों में पोषण संबंधी जानकारी पढ़ने की जरूरत न पड़े और वह खरीदारी के समय ही समझ सके कि कोई प्रोडक्ट ज्यादा चीनी, नमक या फैट वाला है.

क्यों जरूरी हो गया पैकेट के सामने चेतावनी लेबल?

ICMR-NIN की भारतीयों के लिए आहार संबंधी गाइडलाइन 2024 भी खाने में संतुलन और ज्यादा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से सावधानी पर जोर देती है. गाइडलाइन में ऐसे खाद्य पदार्थों की पहचान और वर्गीकरण किया गया है जिनमें ज्यादा कैलोरी, चीनी, फैट या नमक हो सकता है.

  • चीनी पर नजर: बहुत ज्यादा मिलाई गई चीनी वाला खाना और पेय रोजाना की डाइट को असंतुलित कर सकता है. इसलिए पैकेट पर साफ चेतावनी ग्राहक को तुरंत सावधान कर सकती है.
  • नमक भी चिंता की वजह: जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है. ICMR-NIN भी ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों को सीमित करने की सलाह देता है.
  • ज्यादा फैट वाले प्रोडक्ट: कुछ पैकेज्ड फूड में फैट और कैलोरी काफी ज्यादा हो सकती है. ICMR-NIN ने ऐसे खाद्य पदार्थों को जिनमें फैट, चीनी और नमक ज्यादा हो, अलग श्रेणियों में रखा है.
  • बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड पर चिंता: ICMR-NIN की गाइडलाइन में कई औद्योगिक तरीके से तैयार खाद्य पदार्थों को बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड की श्रेणी में रखा गया है. इनमें अक्सर कई तरह के एडिटिव्स इस्तेमाल होते हैं और इनमें फाइबर तथा कुछ जरूरी पोषक तत्व कम हो सकते हैं.

Front Of Pack Warning Label

पैकेट पर लाल निशान कब लगेगा? (Getty Image)

लंबे समय से चल रही है कोशिश

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पैकेज्ड फूड के सामने चेतावनी लेबल लगाने की कोशिश लंबे समय से चल रही थी, लेकिन खाद्य कंपनियों की आपत्तियों के बाद यह मामला अटकता रहा. अब सुप्रीम कोर्ट में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की याचिकाओं और सरकार से जल्द कदम उठाने की मांग के बीच FSSAI ने फिर चेतावनी लेबल का प्रस्ताव रखा है. हालांकि, अभी इसे अंतिम नियम नहीं माना जा सकता. प्रस्ताव के मुताबिक, ऐसे प्रोडक्ट जिनमें तय सीमा से ज्यादा दो या उससे ज्यादा पोषक तत्व, जैसे नमक, चीनी या सैचुरेटेड फैट हों, उन पर लाल चेतावनी लगाने की बात कही गई है. इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव है और कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ, जिनमें सिर्फ एक मुख्य सामग्री होती है, उन्हें इससे बाहर रखा जा सकता है.

पैकेट पर लाल निशान दिखेगा तो क्या समझें?

मान लीजिए आप कोई चिप्स, बिस्किट या मीठा पेय खरीदने जा रहे हैं. अभी ज्यादातर मामलों में आपको पैकेट के पीछे जाकर पोषण संबंधी जानकारी देखनी पड़ती है. वहां चीनी, नमक, फैट और कैलोरी की जानकारी लिखी होती है. लेकिन आम ग्राहक हमेशा इन आंकड़ों को आसानी से नहीं समझ पाता. पैकेट के सामने चेतावनी लगाने का विचार इसी परेशानी को कम करने के लिए है. अगर किसी पैकेट के सामने लाल निशान में ‘ज्यादा चीनी’ लिखा हो, तो ग्राहक तुरंत समझ सकता है कि उसमें चीनी ज्यादा है. इसी तरह ‘ज्यादा नमक’ या ‘ज्यादा फैट’ लिखा होने पर भी खरीदने वाला व्यक्ति फैसला लेने से पहले दोबारा सोच सकता है. FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि इस तरह की चेतावनी से खासकर बच्चों और दूसरे संवेदनशील समूहों को खाने का चुनाव करने में मदद मिल सकती है.

लाल लेबल के लिए कितनी मात्रा तय है?

ICMR-NIN की 2024 की गाइडलाइन में खाद्य पदार्थों को उनके पोषक तत्वों और कैलोरी के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है. इसी आधार को FSSAI के प्रस्ताव में इस्तेमाल किया गया है. ठोस या पैक किए हुए खाद्य पदार्थों के लिए गाइडलाइन में एक श्रेणी में 100 ग्राम में 250 किलो कैलोरी तक ऊर्जा, 4.2 ग्राम तक जोड़ी गई फैट, 3 ग्राम तक जोड़ी गई चीनी और 0.625 ग्राम तक नमक की सीमा बताई गई है. इसके ऊपर जाने पर खाद्य पदार्थ को ज्यादा फैट, चीनी या नमक वाली श्रेणी में रखा जा सकता है, संबंधित पोषक तत्व के आधार पर.

  • जोड़ी गई फैट: 100 ग्राम खाद्य पदार्थ में 4.2 ग्राम से ज्यादा जोड़ी गई फैट होने पर इसे ज्यादा फैट वाली श्रेणी में रखा जाता है.
  • जोड़ी गई चीनी: 100 ग्राम खाद्य पदार्थ में 3 ग्राम से ज्यादा जोड़ी गई चीनी होने पर यह ज्यादा चीनी वाली श्रेणी में आता है.
  • नमक: 100 ग्राम खाद्य पदार्थ में 0.625 ग्राम से ज्यादा नमक होने पर यह ज्यादा नमक वाली श्रेणी में आता है.
  • ऊर्जा: ICMR-NIN की संबंधित श्रेणी में 250 किलो कैलोरी प्रति 100 ग्राम तक की सीमा दी गई है. 250 से 500 किलो कैलोरी और 500 किलो कैलोरी से ऊपर की श्रेणियां भी बताई गई हैं, खासकर जब ज्यादा ऊर्जा का कारण जोड़ी गई चीनी या फैट हो.

Red Warning Label

पैकेज्ड फूड चेतावनी (Getty Image)

ठोस और तरल चीजों की सीमा अलग हो सकती है

यहां एक और जरूरी अंतर है. ठोस खाने और तरल पेय को एक ही पैमाने पर नहीं देखा जाता. बच्चों के स्कूलों से जुड़े FSSAI के 2026 के प्रस्ताव में तरल खाद्य पदार्थों के लिए अलग सीमाएं बताई गई हैं. इनमें 100 मिलीलीटर में 1.5 ग्राम से ज्यादा जोड़ी गई फैट, 2 ग्राम से ज्यादा जोड़ी गई चीनी और 0.175 ग्राम से ज्यादा नमक को ज्यादा मात्रा माना गया है. यह फिलहाल स्कूल फूड से जुड़े प्रस्तावित मानक हैं, इसलिए इन्हें मौजूदा अंतिम फ्रंट-ऑफ-पैक लेबल नियम समझना सही नहीं होगा.

ICMR-NIN की गाइडलाइन क्या कहती है?

ICMR-NIN की 2024 की भारतीयों के लिए आहार संबंधी गाइडलाइन में कुल 17 दिशानिर्देश हैं. इनका मुख्य उद्देश्य बीमारी से बचाव और बेहतर पोषण को बढ़ावा देना है. गाइडलाइन में ज्यादा चीनी, नमक और फैट वाले भोजन को सीमित करने, संतुलित भोजन लेने और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से सावधानी बरतने पर जोर दिया गया है.

कंपनियां क्यों कर रही हैं विरोध?

इस मुद्दे पर सरकार और खाद्य कंपनियों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं. Reuters के मुताबिक, कुछ बड़ी कंपनियों और उद्योग संगठनों ने तर्क दिया है कि ऐसे चेतावनी चिन्ह ग्राहकों को भ्रमित कर सकते हैं और सिर्फ एक निशान देखकर लोगों की खाने की आदत बदलना आसान नहीं है. मार्च में हुई एक बैठक में कोका-कोला इंडिया की एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा था कि केवल पैकेट पर एक चिन्ह लगा देने से ग्राहक की डाइट में बड़ा बदलाव आएगा, यह मानना बहुत सरल सोच होगी.

दूसरी तरफ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का तर्क है कि ग्राहक को जानकारी देना ही पहला कदम है. अगर किसी प्रोडक्ट में चीनी, नमक या फैट ज्यादा है तो यह जानकारी पैकेट के पीछे छोटे अक्षरों में छिपी रहने के बजाय सामने साफ दिखाई देनी चाहिए. रिपोर्ट के अनुसार, नेस्ले के सीईओ ने भी कहा है कि पैकेट के सामने चेतावनी लगाने के नियम कंपनियों से सलाह लेकर और वैज्ञानिक आधार पर बनाए जाने चाहिए.

ICMR की गाइडलाइन क्या कहती है?

ICMR-NIN की 2024 की आहार संबंधी गाइडलाइन में कुल 17 दिशानिर्देश हैं और इनका जोर बीमारी से बचाव तथा बेहतर पोषण पर है. गाइडलाइन में ज्यादा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों, ज्यादा चीनी, नमक और फैट वाले भोजन को लेकर सावधानी बरतने पर जोर दिया गया है. ICMR-NIN ने ऐसे खाद्य पदार्थों की पहचान के लिए कैलोरी और पोषक तत्वों के आधार पर अलग-अलग श्रेणियां भी बताई हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि हर पैकेज्ड फूड खराब है या उसे पूरी तरह छोड़ देना चाहिए. असली बात है कि खाने की मात्रा, उसकी गुणवत्ता और रोज की पूरी डाइट का संतुलन कैसा है. ICMR की सलाह का मूल उद्देश्य भी यही है कि लोग अपने खाने में विविधता रखें और जरूरत से ज्यादा चीनी, नमक, फैट तथा बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड चीजों से बचें.

अंकिता

अंकिता

शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है.  पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.

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