दूध हुआ महंगा, मुंबई में 102 रु लीटर और तमिलनाडु में 44 रु लीटर, हरियाणा में भी बढ़ सकता है दूध के दाम

Published on 1 सित॰ 2026

अगर आप रोजाना बाहर से दूध खरीदते हैं तो ये खबर आपके लिए है। चीनी, पेट्रोल, डीज़ल और प्याज़ के बाद अब दूध की कीमत में बढ़ोत्तरी की बारी है। सितंबर की शुरुआत के साथ ही मुंबई में दूध के दाम बढ़ गए हैं। वहीं तमिलनाडु में किसानों से खरीदे जाने वाले दूध की कीमत बढ़ाने का फैसला लिया गया है। इसका असर आगे चलकर दूध और उससे बनने वाले दूसरे उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

(दूध) सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार: खबर लहरिया)

दरअसल मुंबई में 1 सितंबर 2026 में डेयरियों और स्थानीय फार्मों से मिलने वाले दूध की कीमत 9 रुपए प्रति लीटर बढ़ गई है। ये जानकारी मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने दी है। पहले इसकी कीमत 93 रुपये थी जो अब बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इसके बाद जब यही दूध स्थानीय दूध विक्रेताओं या डेयरियों के जरिए लोगों के घरों तक पहुंचेगा तो इसकी खुदरा कीमत करीब 110 से 115 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचने की संभावना है। यानी मुंबई और उसके आसपास रहने वाले लोगों के लिए रोजाना के दूध का खर्च अब पहले से ज्यादा होगा।

दूध की कीमत बढ़ने की एक बड़ी वजह पशुपालकों की बढ़ती लागत बताई जा रही है। पशुओं के लिए चारा, दाना और दूसरी जरूरी चीजों के दाम बढ़ने के साथ-साथ परिवहन का खर्च भी बढ़ा है। ऐसे में पशुपालकों का मानना है कि पुरानी कीमत पर दूध बेचना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।

दूध उत्पादन पशुओं को रोज चारा देना, उनके इलाज और देखभाल पर खर्च करना, दूध को डेयरी या बाजार तक पहुंचाना इन सभी पर लगातार पैसा खर्च होता है। जब इन खर्चों में बढ़ोतरी होती है तो उसका असर दूध की कीमत पर भी पड़ता है। 

तमिलनाडु में भी दूध की कीमत बढ़ी 

तमिलनाडु में भी दूध उत्पादकों के लिए खरीद कीमत बढ़ाने का फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री विजय ने सोमवार यानी 31अगस्त 2026 को दूध की खरीद कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की। इसके बाद किसानों से खरीदे जाने वाले दूध का भाव 41 रुपये से बढ़कर 44 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

सरकार के मुताबिक इस फैसले का फायदा राज्य की दूध उत्पादक सहकारी समितियों से जुड़े करीब 3.15 लाख डेयरी किसानों को मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने बताया है कि किसानों की ओर से लंबे समय से दूध उत्पादन की बढ़ती लागत को देखते हुए खरीद कीमत बढ़ाने की मांग की जा रही थी।

इसमें पशुपालकों की शिकायत है कि दूध देने वाले पशुओं को पालने का खर्च लगातार बढ़ रहा है। चारा और पशु आहार महंगा होने के साथ दूसरी जरूरी चीजों की कीमतें भी बढ़ी हैं। इन्हीं मांगों को देखते हुए सरकार ने दूध खरीद की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का फैसला किया।

और राज्यों में इस बढ़ते कीमत का असर क्या हो सकता है 

दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव या असर सिर्फ मुंबई या तमिलनाडु तक नहीं है। मई 2026 में अमूल और मदर डेयरी ने भी कई प्रमुख शहरों में दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। उस समय पशु आहार, पैकेजिंग और ईंधन की बढ़ती लागत को कीमत बढ़ाने की वजह बताया गया था।

इससे साफ है कि दूध की कीमतों के पीछे सिर्फ बाजार में मांग और आपूर्ति की ही बस बात नहीं है दूध उत्पादन की बढ़ती लागत भी एक बड़ा कारण बन रही है। इसका असर एक तरफ पशुपालकों की कमाई पर पड़ रहा है तो दूसरी तरफ दूध खरीदने वाले परिवारों के घरेलू बजट पर।

हरियाणा में बढ़ी चारे की कीमत लोग परेशान 

इसी बढ़ती लागत का एक बड़ा उदाहरण हरियाणा में देखने को मिल रहा है। एक ओर पशुपालकों को चारा नहीं मिल रहा है और दूसरी ओर सोनीपत समेत राज्य के कई इलाकों में पशुपालकों को चारे की कमी और उसकी बढ़ती कीमतों से भी जूझना पड़ रहा है। गेहूं का भूसा और हरा चारा महंगा होने से डेयरी चलाने का खर्च बढ़ गया है। अब इसका असर सीधा किसानों पर हो रहा है। अब देखा जाए तो लगातार कटते जंगल, पर्यावरण परिवर्तन,

बेमौसम बारिश, फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले तूफान और 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंची भीषण गर्मी ने चारे की उपलब्धता को प्रभावित किया है। अब किसानों के सामने समस्या ये है कि पशुओं के लिए चारा तो महंगा मिल ही रहा है जबकि दूध बेचने से मिलने वाली आमदनी उसी अनुपात या बराबरी में नहीं बढ़ी है। ऐसे में छोटे डेयरी किसानों के लिए पशुपालन धीरे-धीरे घाटे का सौदा बनता जा रहा है।

गेहूं के भूसे के दाम में 40 फीसदी तक बढ़ोतरी

हरियाणा के कई बाजारों में सूखे चारे की कीमत इस समय काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के रिपोर्ट अनुसार रोहतक के चारा बाजार में गेहूं के भूसे की कीमत पिछले साल के मुकाबले करीब 40 फीसदी बढ़कर 950 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। सिरसा और दक्षिण हरियाणा के कुछ इलाकों में यही कीमत 1,200 से 1,300 रुपये प्रति क्विंटल तक बताई जा रही है।

मक्का और ज्वार जैसे हरे चारे की कीमत करीब 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है। वहीं धान के भूसे के दाम भी बढ़कर करीब 700 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं।

चारे की कीमतों में यह बढ़ोतरी उस समय ज्यादा चिंता पैदा कर रही है जब पशुपालकों के लिए पशुओं को खिलाने का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ज्यादा खर्च का मतलब है कि दूध उत्पादन की लागत भी बढ़ रही है। ऐसे में किसान या तो दूध की कीमत बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं या फिर कम पशु रखने को मजबूर हो रहे हैं।

हरियाणा में 100 रुपए लीटर तक पहुंच सकता है भैंस के दूध की कीमत 

चारे और पशु आहार के बढ़ती क़ीमतों के बीच हरियाणा के कई गावों में पशुपालक अब दूध के दाम बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। जिंद, कुरुक्षेत्र, कैथल, रोहतक और हिसार जैसे जिलों में दुधारू किसानों की बैठक हुई हैं। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार पशुपालकों का मानना है कि उन्हें दूध की गुणवत्ता और प्रकार के हिसाब से अभी तक़रीबन 60 से 80 रुपए प्रति लीटर मिल रहे हैं पर बढ़ती लागत को देखा जाए तो ये कीमत उनके लिए पर्याप्त नहीं है। कुछ गांवों में पशुपालकों ने नई क़ीमतें तय करने का फैसला भी किया है। हांसी के भैनी अमीरपुर गांव में दुधारू किसानों के मुताबिक 5 सितंबर से भैंस के दूध की कीमत 100 रुपए और गाय के दूध की कीमत 80 रुपए प्रति लीटर की जाएगी। आसपास के राजथल जैसे और कुछ गांवों में पशुपालकों ने भी इस फैसले पर अपना समर्थन दिया है। 

इसी तरह जिंद जिले के जुलाना में डेयरी ऑपरेटर्स एसोसिएशन की बैठक में भी दूध के नए दाम तय करने पर चर्चा हुई। इस बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज कुमार ने की। 

दूध की कीमत बढ़ने के पीछे सबसे बढ़ी वजह पशुपालकों की बढ़ती लागत बताई जा रही है। पिछले एक साल में पशु आहार के दाम करीब 25 फ़ीसदी तक बढ़े हैं। दुधारू पशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले चारे के साथ अनाज, तुवर, चुनी और मक्के की क़ीमतें भी बढ़ी हैं। इसके अलावा अच्छी नस्ल की भैंस ख़रीदना भी महंगा हो गया है और मवेशियों के कीमत में करीब 60 से 70 फीसदी तक बढ़ोतरी बताई जा रही है। मुंबई के तबेला के संचालकों और बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन का कहना है कि एक लीटर शुद्ध तैयार करने में ही तक़रीबन 98 रुपए खर्च हो रहे हैं। ऐसे में 93 रुपए प्रति लीटर के पुराने भाव पर दूध बेचना उनके लिए घाटे का सौदा है। इसके साथ ही तबेलों में काम करने वाले मज़दूरों की मज़दूरी और दूध को बाजार तक पहुँचाने का यातायात खर्च भी बढ़ा है। 

पशुओं को खिलाने का खर्च जितना बढ़ता है एक लीटर दूध तैयार करने की लागत भी उतनी ही बढ़ती जाती है। छोटे डेयरी किसान इस बड़े हुए खर्च को लंबे समय तक नहीं उठा पाते। ऐसे में कई किसानों के सामने अपने दुधारू पशु बेचने तक की नौबत आ जाती है। ऐसे में पशुपालक दूध का दाम बढ़ने की मांग कर रहे हैं ताकि कम से कम उन्होंने जितना पैसा लगाया है उतना निकल आए। यानी दूध की बढ़ती क़ीमतों के पीछे सिर्फ दूध इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए ही बस दूध महँगी नहीं हुई है पशुपालकों के सामने भी बढ़ती लागत और कम आमदनी की समस्या खड़ी हुई है।