बीएसएल के सभी 12 गेट बंद, 4000 कर्मी-श्रमिक 22 घंटे से प्लांट में कैद - Bokaro News

Published on 18 अक्टू॰ 2026

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बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) में नौकरी की मांग को लेकर चल रहा विस्थापितों और अप्रेंटिस संघ का आंदोलन शनिवार को आक्रामक हो गया। अपनी मांगों को लेकर इन्होंेने मुख्य प्रशासनिक भवन और सभी गेट को पूरी तरह से बंद कर दिया। इस पूर्ण नाकेबंदी के कारण 22 घंटे से करीब 4000 अधिकारी और कर्मचारी प्लांट में कैद हो गए। न उन्हें बाहर निकलने दिया जा रहा है और न अगली शिफ्ट के कर्मचारियों को अंदर जाने की अनुमति मिल रही है। समाचार लिखे जाने तक रात आठ बजे तक इन कर्मचारियों को बाहर नहीं निकलने दिया गया था। उन्हीं कर्मचारियों से काम लिया जा रहा था। उनके लिए बाहर से खाना मंगाने की कोशिश की गई, जिसे विस्थापितों ने रोक दिया। इससे अंदर फंसे कर्मचारियों के सामने भोजन की भी समस्या खड़ी हो गई है।

ये कर्मचारी शुक्रवार रात 10 बजे नाइट शिफ्ट में काम करने गए थे। सुबह छह बजे शिफ्ट खत्म होने के बाद जब ये गेट पर पहुंचे तो गेट बंद मिला। बाहर लोग आंदोलन कर रहे थे। प्रबंधन के लाख प्रयासों के बावजूद ये टस से मस नहीं हुए। धरने पर बैठे लोगों ने गेट से हटने से इनकार कर दिया।-शेष पेज 13 पर

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर पहुंचे, आंदोलन को समर्थन

विस्थापितों के आंदोलन के कारण बोकारो शहर दिनभर अस्त-व्यस्त रहा। करीब एक दर्जन से ज्यादा लोग गेट पर भूख हड़ताल पर बैठे रहे। वहीं बड़ी संख्या में विस्थापित प्लांट के सभी 12 गेटों को जाम कर मोर्चा संभाले रहे। दोपहर में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की। इससे पहले बोकारो डीसी अजय नाथ झा धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों से वार्ता की। लेकिन ​वार्ता विफल रही। बीएसएल से अप्रेंटिस पास किए करीब 1500 युवा नौकरी की मांग पर अड़े रहे। उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

प्रबंधन ने कहा-कई यूनिट में उत्पादन ठप, 30 करोड़ का नुकसान

बीएसएल प्रबंधन ने कहा कि आंदोलन के दौरान प्लांट के सभी गेट बंद कर दिए गए हैं। कर्मचारियों और श्रमिकों को न अंदर जाने दिया जा रहा है और न बाहर निकलने दिया जा रहा है। इससे उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। शनिवार को ब्लास्ट फर्नेस, सिंटर प्लांट और स्टील मेल्टिंग शॉप (एसएमएस-1 एवं एसएमएस-2) सहित प्रमुख उत्पादन इकाइयों और मिलों का परिचालन ठप रहा। इस व्यवधान के ​कारण प्लांट को करीब 30 करोड़ रुपए का नुकसान होने की संभावना है।

कच्चे माल की भी किल्लत... प्लांट में ब्लास्ट फर्नेस, स्टील मेल्टिंग शॉप और रोलिंग मिलों को चलाने के लिए भारी मात्रा में कच्चे माल की जरूरत होती है। गेट जाम होने के लाइम स्टोन और डोलोमाइट से लदे वाहन प्लांट के बाहर खड़े हैं। कच्चे माल की कमी से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। अगर कुछ घंटे ऐसी ही स्थिति रही तो कच्चे माल के अभाव में कई यूनिट बंद करनी पड़ेगी।

शनिवार सुबह पहली शिफ्ट में काम करने के लिए पहुंचे कर्मचारियों और श्रमिकों को गेट पर ही रोक दिया।