झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, चतरा बाईपास के लिए 13,681 पेड़ों की कटाई पर लगाई रोक

Published on 4 सित॰ 2026

झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, चतरा बाईपास के लिए 13,681 पेड़ों की कटाई पर लगाई रोक

चतरा बाईपास के लिए पेड़ों की कटाई पर HC की रोकImage Credit source: Pixabay (प्रतीकात्मक तस्वीर)

झारखंड के चतरा शहर को जोड़ने वाली प्रस्तावित बाईपास सड़क के निर्माण के लिए 13,681 पूर्ण विकसित पेड़ों की कटाई पर झारखंड हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक रोक लगा दिया है. सुरेश सव द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस आनंद सेन ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि 13 हजार से ज्यादा की बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से पर्यावरण और पारिस्थितिक तंत्र को गंभीर नुकसान होगा. हालांकि अदालत ने सड़क निर्माण पर सिर्फ वहीं पर रोक लगाई है, जहां 13 हजार से ज्यादा पेड़ों की कटाई जरूरी बताई गई है.

दरअसल, याचिकाकर्ता ने यह तर्क देते हुए निर्धारित सड़क मार्ग में बदलाव की मांग की थी कि एक वैकल्पिक मार्ग से उसकी जमीन पर खड़े लगभग 300 पूर्ण विकसित पेड़ों को बचाया जा सकता है. सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित एजेंसी को सड़क के अलाईंनमेंट में बदलाव की संभावना तलाशने का निर्देश भी दिया है, ताकि प्रस्तावित बाईपास सड़क के निर्माण के दौरान काटने वाले पेड़ों की संख्या को बेहद कम किया जा सके और पूर्ण विकसित पेड़ों को बचाया जा सके.

मंत्रालयों को 6 हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश

अदालत ने इस मामले में केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को पक्षकार बनाया है. दोनों ही मंत्रालयों को 6 हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करना होगा. वहीं, राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मौजूदा अलाइनमेंट के तहत वन क्षेत्र समेत परियोजना वाले इलाके में 13,681 पेड़ों की कटाई करनी होगी और यह सभी पूर्ण विकसित पेड़ हैं. इस पर अदालत ने बड़ी संख्या में पेड़ों के काटने से संबंधित मामले पर सुनवाई करते हुए अगले आदेश तक पेड़ों को काटने पर रोक लगा दिया. अदालत ने कहा कि पौधों को बढ़ने में 100 साल से अधिक समय लग सकता है.

‘विकास के नाम पर पर्यावरणीय क्षति कम से कम करना जरूरी’

अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं बल्कि इसमें पशु-पक्षी, कीट और दूसरे जीव जंतु भी शामिल हैं. यह पूरा पारिस्थितिक तंत्र है, इतनी बड़ी संख्या में पूर्ण विकसित पेड़ों को सड़क निर्माण के लिए काटे जाने के बाद नए पौधे लगाने के बाद भी मौजूद पर्यावरण की भरपाई नहीं हो सकती है. विकास के नाम पर पर्यावरणीय क्षति जहां संभव हो, कम से कम करना जरूरी है.

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अशोक कुमार

अशोक कुमार

अशोक कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 वर्षों से अधिक का अनुभव है. राजनीति, क्राइम और ऑफबीट खबरों में दिलचस्पी रखने के कारण इन क्षेत्रों की खबरों पर बेहतरीन पकड़ है. नई जगहों को एक्सप्लोर करने के साथ पढ़ने-लिखने का शौक रखते हैं. झारखंड की स्थानीय न्यूज़ चैनल में विभिन्न पदों पर काम करने के साथ-साथ, इन्होंने एपीएन न्यूज़ में बतौर ब्यूरो चीफ के रूप में भी काम किया है. अशोक कुमार ने झारखंड में पिछले 7 वर्षों के दौरान हुई छोटी-बड़ी राजनीतिक हलचलों को रिपोर्ट किया है. वर्तमान में वो टीवी9 डिजिटल से जुड़े हैं.

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