आसमान छू रहे प्याज के दाम, थोक भाव 135% उछला; जानें कब मिलेगी महंगाई से आम जनता को राहत

Published on 22 सित॰ 2026

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): देश भर में किचन का बजट एक बार फिर बुरी तरह गड़बड़ा गया है और प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की आंखों से आंसू निकाल दिए हैं। पिछले एक वर्ष के मुकाबले प्याज की खुदरा कीमतों में दोगुने से भी अधिक का उछाल दर्ज किया गया है। सरकारी उपभोक्ता मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा बाजार के साथ-साथ थोक मंडियों में भी प्याज की कीमतों में जबर्दस्त तेजी देखने को मिल रही है। 21 सितंबर को मंडियों में प्याज का थोक भाव 4615.98 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गया, जो ठीक एक साल पहले 3299.85 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी इस दौरान थोक कीमतों में करीब 135 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है।

प्रमुख महानगरों में प्याज की कीमतें 60 रुपये के करीब पहुंचीं
लगभग 10 महीनों तक शांत रहने के बाद बीते दो महीनों से प्याज की कीमतें लगातार उछल रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, महज एक महीने पहले जहां प्याज की राष्ट्रीय औसत कीमत 40.79 रुपये प्रति किलो थी, वहीं 21 सितंबर को यह बढ़कर 54.23 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। महानगरों की बात करें तो दिल्ली में एक साल पहले 32 रुपये किलो बिकने वाला प्याज अब 53 रुपये पर पहुंच चुका है। इसी तरह मुंबई में भाव 30 रुपये से बढ़कर 58 रुपये, चेन्नई में 30 से सीधे 60 रुपये और रांची में 25 रुपये से उछलकर 57 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है।

बेमौसम बारिश और स्टॉक का नुकसान बनी महंगाई की मुख्य वजह
प्याज के इस कदर महंगे होने के पीछे उत्पादन और भंडारण से जुड़े कई कारण सामने आए हैं। महाराष्ट्र में गर्मियों की प्याज की फसल को मार्च के दौरान हुई बेमौसम बारिश से भारी नुकसान पहुंचा था। इसके अलावा केंद्रीय एजेंसियों के सुरक्षित बफर स्टॉक में भी लगभग 30 प्रतिशत प्याज सड़ने या खराब होने की खबर है। हालांकि, विदेशी बाजारों में भारतीय प्याज की मांग कमजोर बनी हुई है और बांग्लादेश में उत्पादन बढ़ने से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा भी कड़ी हुई है।

बीज कंपनियों की मांग खत्म होते ही गिरेंगे दाम, कब तक मिलेगी राहत?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते से प्याज के दामों में ठहराव आया है और फिलहाल बहुत बड़ी तेजी की गुंजाइश कम है। वर्तमान में मंडियों में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज की जोरदार मांग मुख्य रूप से बीज कंपनियों की तरफ से आ रही है। जानकारों का मानना है कि जैसे ही बीज कंपनियों की थोक खरीद प्रक्रिया पूरी होगी, प्याज के दामों में प्रति किलो 5 से 10 रुपये तक की नरमी देखने को मिल सकती है।

फसल चक्र और आवक पर टिकी कीमतें, नई फसल से उम्मीद
प्याज के भावों में साल के चुनिंदा महीनों में आने वाला यह उछाल सीधे तौर पर इसके फसल चक्र और मंडी आवक से जुड़ा हुआ है। रबी सीजन की प्याज मार्च-अप्रैल में मंडियों में आती है, जिसे भंडारित करके रखा जाता है। खरीफ की नई फसल आने तक देश भर की आपूर्ति इसी पुराने स्टॉक पर निर्भर करती है। अगस्त से जनवरी के बीच जब रबी का पुराना स्टॉक तेजी से घटने लगता है, तब मंडियों में आवक कमजोर पड़ने से मांग और आपूर्ति का अंतर बढ़ जाता है। हालांकि, आने वाले हफ्तों में खरीफ सीजन की नई आवक मंडियों में शुरू होते ही प्याज की कीमतों में बड़ी गिरावट और आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।

You Might Be Interested In

  • यूपी-उत्तराखंड की 11 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का ऐलान, 16 अक्टूबर को मतदान
  • ‘क्या ये नया वाला iPhone है?’; युवती से सवाल पूछकर हाथ से छीन ले गए बदमाश, 3 दिन पहले ही खरीदा था
  • स्टेट बार काउंसिल में 30% महिला आरक्षण पर SC में सुनवाई, महिला वकीलों के विरोध पर CJI ने जताई हैरानी
  • AI और डेटा सेंटर्स की मांग से भारत-चीन कारोबार में बड़ा उछाल, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 40% बढ़ा
  • स्कूल में खूनी खेल, क्लासरूम के बाहर महिला टीचर को घसीटकर मारी गोली, प्रेमी ने खुद की भी ली जान
  • कब है अनंत चतुर्दशी? जानें पूजन मुहूर्त, व्रत और अनंत सूत्र बांधने की मान्यता