नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के भाटपाल में करीब 15 साल तक सुरक्षा बलों की मौजूदगी का गवाह रहा कैंप अब बच्चों की पढ़ाई का ठिकाना बन गया है। कभी सुरक्षा व्यवस्था के लिए इस्तेमाल होने वाला यह परिसर अब दूरदराज के गांवों से आने वाले आदिवासी विद्यार्थियों के
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यहां 11 अगस्त से प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास शुरू किए गए हैं। दोनों छात्रावासों में 150 सीटें स्वीकृत हैं, जबकि फिलहाल 153 विद्यार्थी रह रहे हैं। भाटपाल जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर है। यहां लंबे समय तक सुरक्षा बलों का कैंप होने की वजह से यह इलाका सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा।
हालात बदलने के बाद कैंप परिसर को खाली छोड़ने के बजाय प्रशासन ने इसे विद्यार्थियों के लिए इस्तेमाल करने की योजना बनाई। कलेक्टर नम्रता जैन के सुझाव के बाद परिसर को छात्रावास में बदला गया।

स्कूल से महज 50 मीटर दूर, अब गांव से रोज आने-जाने की जरूरत नहीं
भाटपाल का शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय छात्रावास से करीब 50 मीटर दूर है। इससे दूरस्थ गांवों से आने वाले विद्यार्थियों को रोज लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती। छात्रावास में रहने, भोजन और पढ़ाई के लिए जगह मिलने से उनकी स्कूल तक पहुंच आसान हुई है।
प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास में कक्षा 6वीं से 10वीं तक के बच्चों के लिए 100 सीटें स्वीकृत हैं। यहां फिलहाल 114 विद्यार्थी रह रहे हैं। वहीं कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए शुरू किए गए पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास में 50 सीटें हैं और 39 विद्यार्थी रह रहे हैं। यह छात्रावास एजुकेशन सिटी कुतुल से जुड़े विद्यार्थियों के लिए भी आवास की जरूरत पूरी कर रहा है।

22 किमी दूर से आता था छात्र, अब हॉस्टल में रहकर पढ़ रहा
कक्षा 12वीं का विद्यार्थी कोमेंद्र राजबेड़ा का रहने वाला है। उसका गांव भाटपाल से करीब 22 किलोमीटर दूर है। पहले स्कूल के पास रहने के लिए उसे बाहर कमरा लेना पड़ता था, जिसका खर्च परिवार को उठाना पड़ता था। अब पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास शुरू होने के बाद उसे वहीं रहने की सुविधा मिल गई है।
कक्षा 9वीं में पढ़ने वाला रितेश सोनी हलामीमुंजमेटा से आता है। रितेश के मुताबिक छात्रावास में साथियों के साथ रहने और स्कूल पास होने से पढ़ाई आसान हुई है। सुरक्षित परिसर में रहने की सुविधा मिलने से वह पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे पा रहा है।
कक्षा 10वीं के बाद पढ़ाई छूटने की चुनौती भी होगी कम
अबूझमाड़ के दूरस्थ इलाकों में बच्चों के लिए सिर्फ स्कूल तक पहुंचना ही चुनौती नहीं है। कक्षा 10वीं के बाद 11वीं-12वीं की पढ़ाई जारी रखना भी कई परिवारों के लिए मुश्किल होता है। स्कूल के पास रहने की व्यवस्था नहीं होने से बच्चों को बाहर कमरा लेना पड़ता है या फिर रोज लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
भाटपाल में शुरू हुआ पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास इसी परेशानी को कम करने की कोशिश है। इससे विद्यार्थियों को 11वीं और 12वीं की पढ़ाई जारी रखने के लिए सुरक्षित आवास मिल रहा है।

कलेक्टर ने अचानक पहुंचकर देखी व्यवस्था
छात्रावास शुरू होने के बाद कलेक्टर नम्रता जैन ने भाटपाल पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने बच्चों के कमरों के साथ भोजन, स्वच्छता और दूसरी मूलभूत सुविधाओं को देखा। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से सीधे बात कर उनकी समस्याएं और जरूरतें भी जानीं।
बच्चों ने अपनी जरूरतों और कुछ मांगों के बारे में कलेक्टर को बताया। कलेक्टर ने संबंधित व्यवस्थाओं को पूरा करने का आश्वासन दिया। उन्होंने बच्चों से कमरों और पूरे परिसर में साफ-सफाई बनाए रखने के लिए भी कहा। किचन के निरीक्षण के दौरान उन्होंने बच्चों के लिए तैयार किए जा रहे चावल और सब्जी को देखा। भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और तय मीनू के अनुसार नाश्ता और भोजन देने के निर्देश भी दिए।
सुरक्षा कैंप से छात्रावास तक पहुंचा परिसर
भाटपाल के इस कैंप की बदली तस्वीर अबूझमाड़ में बदलते हालात को भी दिखाती है। करीब डेढ़ दशक तक जिस परिसर की पहचान सुरक्षा बलों की मौजूदगी से थी, उसी जगह अब स्कूल ड्रेस में बच्चे नजर आ रहे हैं। दूरस्थ इलाकों में सड़क, स्कूल और दूसरी सुविधाओं तक पहुंच के साथ बच्चों को पढ़ाई के लिए आवास उपलब्ध कराना भी बड़ी जरूरत रही है।
भाटपाल में पुराने सुरक्षा परिसर का इसी काम में इस्तेमाल उस बदलाव की तस्वीर है, जिसमें खाली पड़ी अधोसंरचना को बच्चों की शिक्षा से जोड़ा गया है। अब यहां रहने वाले बच्चों के लिए यह जगह किसी सुरक्षा कैंप के रूप में नहीं, बल्कि स्कूल जाने, पढ़ने और आगे की पढ़ाई की तैयारी करने की जगह बन गई है।