15 साल बाद फिर वही समुद्री टक्कर, पाकिस्तान की नौसेना के रवैये पर क्यों उठे सवाल? 1991 के समझौते में क्या है?

Published on 16 सित॰ 2026

Time Published: Thursday, September 17, 2026, 0:01 [IST]

Pakistani Ship Collided Indian Warship: समंदर में दो युद्धपोतों का आमने-सामने आ जाना अपने आप में असामान्य नहीं है। युद्धपोत एक-दूसरे की निगरानी करते हैं, रास्ता काटते हैं और सैन्य गतिविधियों के दौरान बेहद करीब भी आ सकते हैं। लेकिन जब दो परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसी देशों के युद्धपोत इतने करीब आ जाएं कि टक्कर हो जाए, तो मामला सिर्फ समुद्री दुर्घटना का नहीं रह जाता।

15 सितंबर 2026 को उत्तरी अरब सागर में ऐसा ही हुआ। भारत के मुताबिक, पाकिस्तान की नौसेना का एक जहाज भारतीय नौसेना के एक फ्रंटलाइन युद्धपोत के करीब तेज रफ्तार से आया और असुरक्षित तरीके से पैंतरेबाजी करते हुए उससे टकरा गया। घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। भारत ने पाकिस्तान के राजनयिक को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के आचरण को 'अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर' बताया।

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लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। क्योंकि करीब 15 साल पहले, 2011 में भी भारत और पाकिस्तान के युद्धपोतों के बीच ऐसी ही टक्कर हुई थी। उस समय भी भारत ने पाकिस्तान के युद्धपोत की पैंतरेबाजी को नौवहन सुरक्षा नियमों का उल्लंघन बताया था। तो सवाल है, क्या 2026 की घटना महज एक समुद्री हादसा है या इससे कहीं बड़ा सुरक्षा सवाल जुड़ा है?

पहले समझिए 15 सितंबर को क्या हुआ?

भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 15 सितंबर की शाम उत्तरी अरब सागर में भारतीय नौसेना का एक युद्धपोत नियमित निगरानी अभियान पर था। इसी दौरान पाकिस्तान नौसेना का एक जहाज तेज गति से भारतीय युद्धपोत के करीब आया और असुरक्षित तथा गैर-पेशेवर तरीके से पैंतरेबाजी किया। इसके बाद दोनों जहाजों के बीच टक्कर हुई।

भारत के अनुसार, घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई और इसमें कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। पाकिस्तान के जहाज को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं, जबकि भारतीय युद्धपोत आपरेशनल बना रहा। भारत ने इस घटना को लेकर 16 सितंबर को पाकिस्तान के वरिष्ठ राजनयिक को तलब किया। विदेश मंत्रालय ने इस घटना को सिर्फ एक दुर्घटनाग्रस्त टक्कर के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे दोनों देशों के बीच मौजूद समुद्री सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में उठाया।

असली विवाद 3 नॉटिकल मील की दूरी का है

इस पूरी कहानी में सबसे अहम- '1991 का भारत-पाकिस्तान समझौता' है। 6 अप्रैल 1991 को दोनों देशों ने सैन्य अभ्यासों और सैन्य गतिविधियों से जुड़ी गलतफहमियों को रोकने के लिए एक समझौता किया था। इसमें अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के बीच न्यूनतम दूरी का भी प्रावधान है। अनुच्छेद 10 के मुताबिक, दोनों देशों के नौसैनिक जहाज और पनडुब्बियां अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक-दूसरे से 3 नॉटिकल मील से कम दूरी पर नहीं आएंगी। इसका मकसद बिल्कुल साफ था, समुद्र में किसी दुर्घटना या गलतफहमी को टालना। यानी यह कोई अनौपचारिक समुद्री शिष्टाचार नहीं था। दोनों देशों ने बाकायदा इस नियम पर सहमति जताई थी। भारत का कहना है कि 15 सितंबर की घटना इसी प्रावधान के खिलाफ गई।

पाकिस्तान का क्या कहना है?

इस मामले में पाकिस्तान का पक्ष भी सामने आया है। पाकिस्तान ने घटना को अलग तरीके से पेश किया है। उसके मुताबिक टक्कर उसके समुद्री क्षेत्र में चल रहे नौसैनिक अभ्यास के दौरान हुई और उसने भारतीय जहाज पर खतरनाक और आक्रामक युद्धाभ्यास का आरोप लगाया गया है। पाकिस्तान ने भी भारतीय राजनयिक को तलब कर विरोध दर्ज कराया है। इसलिए अभी यह कहना कि घटना की पूरी जिम्मेदारी किस पक्ष की थी, केवल उपलब्ध सार्वजनिक बयानों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष होगा। हालांकि, भारत का आधिकारिक आरोप स्पष्ट है, पाकिस्तानी जहाज का संचालन असुरक्षित था और 1991 समझौते के अनुच्छेद 10 का उल्लंघन हुआ।

अब 2011 की घटना पर लौटिए...

यहीं से 2026 की घटना को लेकर कहानी दिलचस्प हो जाती है। जून-जुलाई 2011 में भी भारतीय और पाकिस्तानी युद्धपोत के बीच टक्कर हुई थी। उस समय भारतीय नौसेना का INS Godavari समुद्री डकैती के खिलाफ अभियान पर था। जहाज एक ऐसे पोत के पास पहुंचा था जिसे समुद्री डाकुओं ने हाईजैक किया था। भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, इसी दौरान पाकिस्तान नौसेना का PNS Babur पीछे से तेज रफ्तार में INS Godavari के करीब आया। पाकिस्तानी जहाज ने युद्धाभ्यास किया और दोनों जहाजों का संपर्क हो गया।

टक्कर में INS Godavari के हेलिकॉप्टर डेक की विस्तारित सुरक्षा घेरा (Extended Safety Net) को मामूली नुकसान पहुंचा। भारत ने इसे नौवहन सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए पाकिस्तान के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराया था। यानी 2011 और 2026 के मामलों में एक समानता जरूर दिखाई देती है, दोनों में भारतीय पक्ष ने पाकिस्तानी नौसेना जहाज की पैंतरेबाज़ी और सुरक्षा को लेकर आपत्ति उठाई। लेकिन दोनों घटनाओं को बिल्कुल एक जैसा बताना भी सही नहीं होगा। 2011 में भारत ने जिस खास पैंतरेबाज़ी को लेकर विरोध दर्ज कराया था, 2026 की घटना की परिस्थितियां और दोनों पक्षों के दावे अलग हैं।

2011 वाला वीडियो अब फिर क्यों वायरल हो रहा है?

15 सितंबर की घटना के बाद सोशल मीडिया पर युद्धपोतों की टक्कर का एक वीडियो तेजी से शेयर किया गया। दावा किया गया कि यह 2026 की भारत-पाकिस्तान नौसैनिक टक्कर का वीडियो है। लेकिन यह दावा गलत निकला। फैक्ट-चेक में पाया गया कि वायरल वीडियो 2011 में INS Godavari और PNS Babur के बीच हुई घटना का पुराना वीडियो है। इसका मतलब यह है कि 2026 की घटना के वास्तविक दृश्य और 2011 की घटना के वीडियो को आपस में मिलाना सही नहीं होगा। हालांकि, 2011 का वीडियो दोबारा वायरल होने की एक वजह साफ है, दोनों घटनाओं के बीच मौजूद ऐतिहासिक समानता।

1991 में यह समझौता क्यों करना पड़ा था?

भारत-पाकिस्तान के बीच 1991 का समझौता अचानक नहीं हुआ था। दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के दौर में यह जरूरत महसूस हुई कि सैन्य अभ्यासों और गतिविधियों को लेकर गलतफहमी कम की जाए। समझौते में बड़े सैन्य अभ्यासों की पूर्व सूचना से लेकर समुद्र और हवा में दोनों देशों की सेनाओं के बीच न्यूनतम दूरी तक कई प्रावधान किए गए। नौसैनिक जहाजों के लिए 3 नॉटिकल मील का नियम इसी व्यवस्था का हिस्सा था। इसके पीछे मूल सोच थी, युद्ध न भी हो, लेकिन गलत युद्धाभ्यास से युद्ध जैसी स्थिति पैदा न हो। समुद्र में कुछ मिनट की गलतफहमी भी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है। खासकर तब, जब दोनों तरफ हथियारों से लैस युद्धपोत हों।

एक नॉटिकल मील कितना होता है?

समुद्र में दूरी किलोमीटर के बजाय अक्सर नॉटिकल मील में मापी जाती है। एक नॉटिकल मील लगभग 1.852 किलोमीटर होता है। इस हिसाब से 3 नॉटिकल मील करीब 5.56 किलोमीटर होते हैं। यानी 1991 के समझौते का नियम यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता है कि दोनों देशों के युद्धपोत अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इतने करीब न आएं कि टक्कर या किसी गलतफहमी का खतरा पैदा हो।

इस घटना का बड़ा सवाल क्या है?

15 सितंबर की टक्कर में बड़ा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन समुद्र में सैन्य जहाजों की टक्कर को केवल नुकसान की मात्रा से नहीं मापा जाता। क्योंकि सवाल तीन स्तर पर है...

  • पहला: क्या दोनों देशों के युद्धपोतों ने सुरक्षित दूरी बनाए रखी?
  • दूसरा: क्या 1991 के उस समझौते का पालन हुआ, जिसका उद्देश्य ही ऐसी दुर्घटनाओं को रोकना था?
  • तीसरा: अगर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दोनों देशों के युद्धपोत लगातार एक-दूसरे की निगरानी करते हैं, तो क्या मौजूदा सुरक्षा प्रोटोकॉल पर्याप्त हैं?

भारत ने अपने जवाब में इसे सैन्य कार्रवाई या हमला नहीं बताया, बल्कि पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के 'अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर' आचरण पर आपत्ति दर्ज की है। पाकिस्तान ने इसके विपरीत भारतीय जहाज पर आरोप लगाए हैं।

15 साल का अंतर, लेकिन सवाल वही

2011 में INS Godavari और PNS Babur के बीच हुई घटना में भारत ने पाकिस्तानी जहाज की युद्धाभ्यास पर आपत्ति जताई थी। 2026 में फिर एक पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज और भारतीय युद्धपोत के बीच टक्कर हुई है।भारत ने फिर सुरक्षा और युद्धाभ्यास को लेकर विरोध दर्ज कराया है। दोनों घटनाओं के बीच 15 साल का अंतर है, लेकिन समुद्र में सुरक्षित दूरी और पेशेवर युद्धाभ्यास का सवाल फिर सामने आ गया है। 1991 का समझौता इसी तरह की स्थिति को रोकने के लिए बनाया गया था। इसलिए 15 सितंबर की घटना का असली महत्व सिर्फ यह नहीं है कि दो युद्धपोत टकरा गए। बड़ा सवाल यह है कि दोनों देशों के बीच दशकों पहले तय किए गए सुरक्षा नियमों के बावजूद ऐसी स्थिति दोबारा कैसे बनी?