Shreyas Iyer: भारत और जापान के बीच 22 सितंबर को खेला गया एकमात्र टी20 इंटरनेशनल मैच क्रिकेट इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है. जापान के सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए इस बेहद रोमांचक मैच में वर्ल्ड चैंपियन टीम इंडिया ने जापान को सिर्फ 2 रन से हराया. इस मुकाबले में मिली जीत के साथ ही भारतीय टीम टी20 इंटरनेशनल में 200 जीत दर्ज करने वाली दुनिया की पहली टीम बन गई है. इसके अलावा इस मैच में एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जिसने सभी को हैरान कर दिया. दरअसल, भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर सिर्फ 16 रन बनाकर ही 'प्लेयर ऑफ द मैच' का अवॉर्ड जीत गए.
श्रेयस अय्यर सिर्फ 16 रन बनाकर बने प्लेयर ऑफ द मैच
टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट आम तौर पर चौकों, छक्कों और शतकों का खेल माना जाता है. यहां अक्सर भारी-भरकम रन बनाने वाले बल्लेबाजों को ही 'प्लेयर ऑफ द मैच' (POTM) के अवॉर्ड से नवाजा जाता है. लेकिन भारत और जापान के बीच खेले गए एकमात्र ऐतिहासिक टी20 मैच में कप्तान श्रेयस अय्यर ने मात्र 16 रनों की पारी खेली और 'मैन ऑफ द मैच' बन गए. क्रिकेट इतिहास में ऐसा बेहद कम होता है कि कोई बल्लेबाज 20 रन का आंकड़ा भी पार न कर पाए और मैच का सबसे बड़ा हीरो चुन लिया जाए.
श्रेयस अय्यर के 16 रन क्यों बने 'मैच विनिंग' पारी?
भले ही श्रेयस अय्यर का 16 रन का यह निजी स्कोर किसी सामान्य टी20 मैच में बेहद मामूली लगे, लेकिन इस 5-5 ओवर के 'लो-स्कोरिंग' मैच में यही रन दोनों टीमों के बीच का सबसे बड़ा अंतर साबित हुए. 33 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए जापान की टीम ने शानदार लड़ाई लड़ी, लेकिन वे 5 ओवर में सिर्फ 30/3 रन ही बना सके. इस तरह भारत ने यह मैच सिर्फ 2 रन से जीता.
भले ही वाशिंगटन सुंदर के 2 विकेटों और अक्षर पटेल के आखिरी ओवर के शानदार डिफेंस ने मैच जिताया हो, लेकिन बल्लेबाजी में कप्तान अय्यर अकेले ही महफिल लूट ले गए. टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया के ओपनर अभिषेक शर्मा पहली ही गेंद पर बिना खाता खोले आउट हो गए. इसके बाद संजू सैमसन (9 रन) और ईशान किशन (3 रन) भी सस्ते में पवेलियन लौट गए, लेकिन कप्तान श्रेयस अय्यर ने 12 गेंद पर 1 चौके की मदद से 16 रन बनाए, जिसकी बदौलत भारत ने निर्धारित 5 ओवरों में 32/4 का स्कोर खड़ा किया. यानी टीम इंडिया के स्कोर का ठीक आधा हिस्सा बनाने वाली इसी कप्तानी पारी की वजह से उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया.
श्रेयस अय्यर की यह पारी टीम इंडिया को हार से बचा गई. अगर अय्यर जल्दी पवेलियन लौट जाते तो भारत का स्कोर इतना भी नहीं होता और जापान, जो सिर्फ 2 रन से हारा है, वह भारत के खिलाफ अपने पहले ही टी20 इंटरनेशनल मैच में जीत दर्ज कर इतिहास रच देता.
— BCCI (@BCCI) September 22, 2026
क्या T20I इतिहास में पहले कभी ऐसा हुआ है?
अब हर क्रिकेट प्रेमी के दिमाग में यह बात जरूर घूम रही होगी कि क्या टी20 क्रिकेट में इतने कम रन बनाकर भी कोई 'मैन ऑफ द मैच' बन सकता है? आपको बता दें कि ऐसा पहले भी हो चुका है, पर बेहद ही कम हुआ है. हालांकि, पहले के मामलों में वे खिलाड़ी गेंदबाज या ऑलराउंडर थे, जिन्होंने मैच में 3-4 विकेट लेकर विरोधी टीम की कमर तोड़ी थी. लेकिन बिना गेंदबाजी किए, सिर्फ 16 रनों के बूते मैच का सबसे बड़ा अवॉर्ड जीत लेना श्रेयस अय्यर का एक दुर्लभ रिकॉर्ड बन गया है.
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संदीप लामिछाने-हरमीत सिंह भी कर चुके हैं ये कारनामा, लेकिन बतौर गेंदबाज
टी20 इंटरनेशनल के इतिहास में नेपाल के क्रिकेटर संदीप लामिछाने और अमेरिका के हरमीत सिंह जैसे खिलाड़ियों को महज 1-1 रन बनाने के बावजूद 'प्लेयर ऑफ द मैच' का अवॉर्ड मिला था. उन्हें यह सम्मान सिर्फ रनों के लिए नहीं, बल्कि उनकी घातक गेंदबाजी के लिए दिया गया था, क्योंकि उन्होंने अपनी कातिलाना गेंदबाजी से विरोधी टीम को अकेले ही ध्वस्त कर दिया था. वहीं डेविड मिलर भी साल 2019 में टी20I में 10 रन बनाकर प्लेयर ऑफ द मैच बने थे, लेकिन उन्हें यह सम्मान उनकी बेहद शानदार फील्डिंग के लिए मिला था. मिलर टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट के इतिहास में सिर्फ अपनी फील्डिंग के दम पर यह अवॉर्ड जीतने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बने थे, लेकिन बिना गेंदबाजी किए और बिना कैच पकड़े, एक शुद्ध बल्लेबाज के तौर पर सिर्फ 16 रनों के बूते मैच का सबसे बड़ा अवॉर्ड जीत लेना श्रेयस अय्यर का एक बेहद अनोखा रिकॉर्ड है.
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श्रेयस अय्यर की पारी इस छोटी पारी ने भारत को बचाई लाज
श्रेयस अय्यर को मिला यह अनोखा 'प्लेयर ऑफ द मैच' अवॉर्ड हर क्रिकेट प्रेमी को एक बहुत बड़ी बात सिखाता है. क्रिकेट के खेल में हमेशा सिर्फ रनों की गिनती मायने नहीं रखती, बल्कि सबसे ज्यादा जरूरी यह होता है कि वे रन किस परिस्थिति में और किस समय बनाए गए हैं. कई बार ऐसा होता है कि किसी बेहद आसान और सपाट पिच पर बल्लेबाज चौके-छक्कों की बरसात करते हुए शानदार शतक जड़ देता है, लेकिन फिर भी टीम मैच हार जाती है. ऐसे में उस बड़ी पारी का महत्व कम हो जाता है.
इसके विपरीत, जब सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड की मुश्किल और टर्न लेती पिच पर भारत के बड़े-बड़े धुरंधर बल्लेबाज एक-एक रन के लिए तरस रहे थे, तब कप्तान श्रेयस अय्यर ने क्रीज पर टिकने का जज्बा दिखाया. संकट के उस दौर में उनके बल्ले से निकले ये 16 रन किसी महाशतक से कम नहीं थे. अगर अय्यर ने वह कप्तानी पारी न खेली होती, तो टीम इंडिया बेहद छोटे स्कोर पर सिमट जाती और जापान बड़ा उलटफेर कर इतिहास रच देता. अय्यर के इन बेशकीमती 16 रनों ने न सिर्फ टीम इंडिया की लाज बचाई, बल्कि जापान के जबड़े से जीत छीनकर भारत को टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट की ऐतिहासिक 200वीं जीत भी दिला दी.
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