मेवाड़ के ऐतिहासिक वैभव, राजदरबार की परंपराओं और पश्चिमी भारत के पुरातात्त्विक स्थलों की करीब डेढ़ सौ साल पुरानी तस्वीरें अब उदयपुर में देखने को मिलेंगी।
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सिटी पैलेस म्यूजियम में अंतरर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी ‘अर्ली फोटोग्राफी एंड आर्कियोलॉजी इन वेस्टर्न इंडिया द उदयपुर चैप्टर’ का शुभारंभ गुरुवार को हुआ। इसमें 1850 से 1890 के दशक के बीच खींची गई दुर्लभ ऐतिहासिक तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं।
जनाना महल स्थित फतह निवास गैलरी में आयोजित यह प्रदर्शनी ब्रिटिश लाइब्रेरी, लंदन, छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय, मुंबई और महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन के सिटी पैलेस म्यूजियम का संयुक्त प्रयास है। इसमें पश्चिमी भारत के ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक स्थलों के साथ मेवाड़ के राजपरिवार, राजदरबार, समारोहों और सांस्कृतिक जीवन से जुड़ी दुर्लभ फोटोज प्रदर्शित की गई हैं।
महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि यह प्रदर्शनी उस परंपरा की निरंतरता है, जिसके तहत पीढ़ियों से इतिहास, संस्कृति और धरोहर को संरक्षित किया जाता रहा है। तस्वीरों में केवल बीते समय की छवियां नहीं, बल्कि मेवाड़ की सामूहिक स्मृतियां भी समाहित हैं। ये तस्वीरें उन लोगों, स्थानों और परंपराओं से जोड़ती हैं, जिन्होंने मेवाड़ की सांस्कृतिक पहचान को आकार दिया।

प्रदर्शनी में लगे ऐतिहासिक फोटोज।
ब्रिटिश लाइब्रेरी के अंतरिम मुख्य कार्यकारी डॉ. जेरेमी सिल्वर ने कहा कि इस तरह का सहयोग ऐतिहासिक संग्रहों को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने और सांस्कृतिक विरासत के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर देता है।
मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय के महानिदेशक सब्यसाची मुखर्जी ने इसे संस्थागत सहयोग का सशक्त उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक तस्वीरों को साझा करना इतिहास को समझने और विभिन्न संस्थानों के बीच सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने का माध्यम है।
अजंता-एलोरा से मेवाड़ के राजदरबार तक की झलक
प्रदर्शनी में ब्रिटिश लाइब्रेरी और सिटी पैलेस म्यूजियम के संग्रहों से चुनी गई तस्वीरें शामिल हैं। इनमें अजंता, एलोरा, नासिक, हम्पी और सोमनाथ सहित पश्चिमी भारत के कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक स्थलों की तत्कालीन स्थिति दिखाई गई है।
उदयपुर संस्करण की खासियत यह है कि इसमें मेवाड़ को केंद्र में रखा गया है। सिटी पैलेस, झीलों, मंदिरों, उद्यानों, प्रवेश द्वारों, गलियों और स्थापत्य स्मारकों के साथ राजपरिवार के सदस्यों, समारोहों और सांस्कृतिक जीवन की झलक भी देखने को मिलेगी। प्रदर्शनी 31 मार्च 2027 तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी।
कैमरे के भारत आने से पहले से जुड़ा है मेवाड़ का इतिहास
मेवाड़ में फोटोग्राफी की परंपरा का इतिहास भी इस प्रदर्शनी का महत्वपूर्ण पक्ष है। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, वर्ष 1818 में मेवाड़ दरबार में कैमरा ऑब्स्क्यूरा जैसे प्रकाशीय उपकरण का उपयोग होता था। कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी पुस्तक ‘ट्रैवल्स इन वेस्टर्न इंडिया’ में महाराणा भीम सिंह के शासनकाल के दौरान कुंवर अमर सिंह को इस उपकरण के बारे में जानकारी देने का उल्लेख किया है।
महाराणा स्वरूप सिंह और महाराणा सज्जन सिंह के शासनकाल में फोटोग्राफी ने राजदरबार के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान बनाया। विभिन्न भारतीय, स्थानीय और अन्य फोटोग्राफरों ने राजपरिवार, स्थापत्य, समारोहों और सांस्कृतिक परंपराओं को तस्वीरों में दर्ज किया। इन तस्वीरों ने मेवाड़ के इतिहास और शहर के बदलते स्वरूप का महत्वपूर्ण दृश्य अभिलेख तैयार किया है।