Worlds Firsr Car: दुनिया की पहली कार बेंज पेटेंट-मोटरवैगन में आज की तरह गोल स्टीयरिंग व्हील नहीं बल्कि मोड़ने के लिए एक हैंडल या टिलर सिस्टम दिया गया था।

समय कम है?
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ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। आज कार चलाने के लिए स्टीयरिंग व्हील सबसे जरूरी चीजों में से एक है। ड्राइवर इसी की मदद से पूरी गाड़ी को कंट्रोल करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की शुरुआती कारों में आज जैसा गोल स्टीयरिंग व्हील नहीं होता था? आइए जानते हैं Karl Benz की Benz Patent-Motorwagen है।
कब बनी थी यह कार?
Benz Patent-Motorwagen को Karl Benz ने 1880 के दशक में बनाया था। इसे दुनिया की पहली व्यावहारिक पेट्रोल से चलने वाली कारों में गिना जाता है। यह आज की कारों से काफी अलग दिखती थी और इसमें सिर्फ तीन व्हील ही थे।
नहीं था स्टीयरिंग व्हील
इस कार में आज की तरह गोल स्टीयरिंग व्हील नहीं दिया गया था। इसकी जगह ड्राइवर के सामने एक हैंडल या टिलर लगाया गया था। ड्राइवर इसी टिलर का इस्तेमाल कर के कार के डायरेक्शन को बदलता था और उसे दाएं या बाएं मोड़ सकता था।
कैसे होती थी कंट्रोल?
जब ड्राइवर को कार को मोड़ना होता था तो वह सामने लगे टिलर को दाएं या बाएं घुमाता था। टिलर का यह मूवमेंट आगे के व्हील्स को मोड़ता था। इसी तरह से कार अपनी डायरेक्शन बदलती थी। यानी कार में स्टीयरिंग व्हील नहीं था लेकिन कार को मोड़ने के लिए एक स्टीयरिंग सिस्टम मौजूद था। इसका काम आज के स्टीयरिंग व्हील जैसा ही था बस तरीका अलग था।
थ्री-व्हीलर कार
Benz Patent-Motorwagen में चार की जगह सिर्फ तीन पहिए थे। इसमें पीछे की तरफ दो बड़े पहिए और आगे की तरफ एक पहिया था। आगे वाला पहिया ही कार की डायरेक्शन को बदलने में मदद करता था।
आज की कारों से अलग
उस समय कारों की तकनीक आज की तुलना में काफी शुरुआती दौर में थी। इसमें न तो आज के जैसे मॉडर्न डैशबोर्ड था और न ही कोई इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम। ड्राइवर को कार को चलाने और कंट्रोल करने के लिए बहुत साधारण मैकेनिकल सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ता था।
अलग थी तकनीक
आज स्टीयरिंग व्हील से कार को कंट्रोल करना हमारे लिए आम बात है लेकिन शुरुआती कारों में इस्तेमाल होने वाला टिलर दिखाता है कि उस समय कारों की तकनीक कितनी अलग थी। इसलिए यह कहना है ज्यादा सही है कि दुनिया की पहली कार में स्टीयरिंग व्हील नहीं था लेकिन उसे मोड़ने और कंट्रोल करने के लिए टिलर सिस्टम मौजूद था।