बीमा कंपनियों ने नहीं दिया क्लेम, लोक अदालत में समझौता: हादसे में मौत पर 19.50 लाख, बाइक चोरी पर 23 हजार देने होंगे - Dausa News

Published on 20 अग॰ 2026

दौसा की स्थाई लोक अदालत में बीमा क्लेम से जुड़े दो मामलों का समझौते से निपटारा हुआ है। पहले मामले में हादसे में अंकेश मीना की मौत के बाद अटके 20 लाख रुपए के पर्सनल एक्सीडेंट क्लेम पर SBI जनरल इंश्योरेंस कंपनी एक माह में 19.50 लाख रुपए देगी।

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वहीं, दूसरे मामले में 12 अगस्त 2023 को चोरी हुई मनोज कुमार की बाइक के क्लेम पर नेशनल इंश्योरेंस कंपनी 23 हजार रुपए का भुगतान करेगी। दोनों मामलों में बीमा कंपनियों ने अलग-अलग कारणों से क्लेम का भुगतान नहीं किया था। स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष राजेश चंद्र गुप्ता और सदस्य सुरेश कुमार गोयल व पूनम शर्मा ने दोनों पक्षों की समझाइश कर लोक अदालत की भावना से समझौता कराया।

पहला मामला: हादसे में मौत के बाद नहीं दिया था क्लेम प्रकरण के अनुसार, गिर्राज के बेटे अंकेश मीना ने SBI जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से 20 लाख रुपए की पर्सनल एक्सीडेंट पॉलिसी ली थी। इसके लिए 1,000 रुपए प्रीमियम दिया था। पॉलिसी अवधि में दुर्घटना से मौत होने पर नामिनी को 20 लाख रुपए देने का प्रावधान था।

इसी दौरान अंकेश मीना का अपने वाहन से एक्सीडेंट हो गया और इलाज के दौरान जयपुर के हॉस्पिटल में मौत हो गई। इसके बाद गिर्राज ने जरूरी दस्तावेजों के साथ बीमा क्लेम पेश किया, लेकिन कंपनी ने एमएलसी रिपोर्ट, पंचनामा, एफआर, ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य दस्तावेजों के अभाव में क्लेम खारिज कर दिया।

स्थाई लोक अदालत के पूर्णकालिक अध्यक्ष राजेश चंद्र गुप्ता और सदस्य सुरेश कुमार गोयल व पूनम शर्मा ने दोनों पक्षों की समझाइश कर लोक अदालत की भावना से मामले का समाधान कराया। इसके बाद बीमा कंपनी एक माह में प्रार्थी को 19 लाख 50 हजार रुपए देने पर सहमत हुई।

दूसरा मामला : 2023 में चोरी हुई बाइक का क्लेम अटका था दौसा की स्थाई लोक अदालत में लंबित मनोज कुमार बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मामले में भी दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया। मनोज कुमार ने अपनी हीरो HF डिलेक्स बाइक का बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, महवा से कराया था और 1,149 रुपए प्रीमियम दिया था।

बाइक की IDV वैल्यू 23 हजार रुपए थी। पॉलिसी अवधि में 12 अगस्त 2023 को बाइक चोरी हो गई। मनोज ने उसी दिन थाने में चोरी की सूचना दर्ज कराई और बीमा कंपनी में क्लेम भी पेश किया, लेकिन लंबे समय तक भुगतान नहीं हुआ। लोक अदालत की समझाइश के बाद कंपनी ने जरूरी दस्तावेज मांगे और मनोज ने 7 दिन में दस्तावेज उपलब्ध कराने पर सहमति दी। समझौते के तहत बीमा कंपनी दस्तावेज मिलने के एक माह के भीतर मनोज को 23 हजार रुपए का भुगतान करेगी।