2 मिनट में मिली थी 11 वार्निंग, ब्लू-येलो और ग्रीन सिस्टम भी हो गए थे फेल; एयर इंडिया टर्बुलेंस में हैरतंगेज खुलासा

Published on 12 अग॰ 2026

Aug 12, 2026 07:49 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली

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इस हादसे की गंभीरता को देखते हुए एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) वर्तमान में फ्लाइट क्रू और मुख्य पायलट (पायलट इन कमांड) से पूछताछ कर रही है। मुख्य पायलट पर गांजा पीकर उड़ान भरने के आरोप लगे हैं।

air india flight injured passengers

एयर इंडिया की फ्लाइट टर्बुलेंस में फंसने के चलते घायल हुए यात्री।

थाइलैंड के फुकेत से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट के हवा में अचानक करीब 300 फीट नीचे गिरने (ड्रॉप) और भीषण टर्बुलेंस के मामले में बड़ा और हैरतंगेज खुलासा हुआ है। विमान की 'पोस्ट-फ्लाइट मेंटेनेंस रिपोर्ट' (फ्लाइट के बाद की रखरखाव रिपोर्ट) से पता चला है कि इस संकट के दौरान विमान को महज 2 से 3 मिनट के भीतर 11 आपातकालीन चेतावनी (वार्निंग) सिग्नल मिले थे। इस गंभीर हादसे के दौरान विमान में सवार 17 लोग घायल हो गए थे।

एअर इंडिया का एक विमान (एअरबस ए320 - एआई2379) चार अगस्त को सुबह टर्बुलेंस (वायुमंडलीय अस्थिरता) के कारण हवा में अपनी निर्धारित ऊंचाई से अचानक लगभग 300 फुट नीचे आ गया था, जिससे विमान में सवार कम से कम 17 लोग घायल हो गए थे। उस वक्त विमान में 137 यात्रियों और चालक दल के आठ सदस्यों सहित कुल 145 लोग सवार थे।

एक के बाद एक फेल हुए विमान के सिस्टम

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, संकट की शुरुआत विमान के सिस्टम में गड़बड़ी से हुई। विमान की स्क्रीन पर सबसे पहली चेतावनी 'फर्स्ट हाइड्रोलिक ग्रीन सिस्टम' के फेल होने और उसमें कम दबाव (लो प्रेशर) होने की फ्लैश हुई थी। इसके बाद बहुत ही कम समय के भीतर एक के बाद एक कई चेतावनियां आईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्क्रीन पर सबसे पहली वॉर्निंग 'हाइड्रोलिक ग्रीन सिस्टम' के फ़ेल होने की थी, जो कम प्रेशर का संकेत दे रही थी। इसके तुरंत बाद इसी तरह की कई वॉर्निंग आईं। इसके बाद 'हाइड्रोलिक ब्लू+येलो सिस्टम' और 'ग्रीन+ब्लू सिस्टम' के फ़ेल होने की वॉर्निंग आईं, जो फिर से कम प्रेशर का संकेत दे रही थीं।

ऑटोपायलट सिस्टम भी डिस्कनेक्ट

इसके बाद ऑटोपायलट सिस्टम डिस्कनेक्ट हो गया, फिर फ़्लाइट कंट्रोल में गड़बड़ी हुई और एक और हाइड्रोलिक सिस्टम फ़ेल हो गया। हाइड्रोलिक फ़ेलियर की आखिर में तीन और हाइड्रोलिक चेतावनियां आईं, जिन्होंने हाइड्रोलिक फ्लूइड (तरल पदार्थ) और ईंधन के गंभीर रूप से कम स्तर पर होने का संकेत दिया। इसके साथ ही आपातकालीन निकास द्वार (इमरजेंसी एग्जिट डोर) से जुड़ी चेतावनी भी आई, जो विमान के कैबिन दबाव (प्रेसराइजेशन) से संबंधित खराबी की ओर इशारा करती है। आसान शब्दों में कहें तो, विमान के एलिवेटर्स (जो उड़ान के दौरान स्थिरता और ऊपर-नीचे के नियंत्रण के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं) को नियंत्रित करने वाले तीनों हाइड्रोलिक सर्किट (ग्रीन, ब्लू और येलो) बहुत कम समय में फेल होने लगे थे। इसने न केवल ऑटोपायलट को बंद कर दिया, बल्कि कंप्यूटर सिस्टम को भी प्रभावित किया जो स्थिर उड़ान के लिए जरूरी है।

पायलट से पूछताछ और 'कंट्रोल्ड रेस्ट' का दावा

इस हादसे की गंभीरता को देखते हुए एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) वर्तमान में फ्लाइट क्रू और मुख्य पायलट (पायलट इन कमांड) से पूछताछ कर रही है। मुख्य पायलट पर गांजा पीकर उड़ान भरने के आरोप लगे हैं। उसने जांचकर्ताओं के सामने स्पष्ट किया है कि वे डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाएं (प्रिस्क्राइब्ड मेडिकेशन) ले रहे थे। पायलट ने अपने बयान में बताया कि निजी परिस्थितियों के कारण उसे पिछले कुछ समय से सोने में गंभीर समस्या आ रही थी, जिसके इलाज के लिए उनके फैमिली डॉक्टर ने उन्हें दवाएं दी थीं।

पायलट ने घटना के समय के बारे में बताया कि वह सो नहीं पाया था, इसलिए उसने अपने सह-पायलट (को-पायलट) को सूचित किया था कि वे कुछ समय के लिए सो रहे हैं। पायलट ने दावा किया कि कानून के तहत इसे 'नियंत्रित आराम' (कंट्रोल्ड रेस्ट) कहा जाता है और जब वे आराम कर रहे थे, तब विमान का पूरा नियंत्रण सह-पायलट (फर्स्ट ऑफिसर) के हाथों में था। मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है।