आजादी के इस पर्व पर करनाल जिले के घरौंडा क्षेत्र का गांव डिंगर माजरा अपने वीर सपूत हवलदार बलजीत सिंह की शहादत को गर्व और नम आंखों के साथ याद कर रहा है। 11 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान उन्होंने मातृभूम
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उस समय वे भारतीय सेना की 50 राष्ट्रीय राइफल्स में हवलदार के पद पर तैनात थे। उनकी शहादत की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी।
35 वर्षीय बलजीत सिंह बहादुर, अनुशासित और कर्तव्यनिष्ठ सैनिक थे। जब उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो हजारों लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे अर्नव ने मुखाग्नि दी, यह दृश्य देखकर हर आंख नम हो गई।

गांव के सरकारी स्कूल का दृश्य जिसका नाम शहीद बलजीत सिंह के नाम पर रखा गया।
परिवार और गांव को उन पर गर्व
शहीद के भाई कुलदीप सिंह ने बताया कि उनके छोटा भाई बलजीत सिंह का जन्म 6 अगस्त 1984 को गांव डिंगर माजरा में किशन चंद के घर हुआ था। उन्हें अपनी माता मूर्ति से गहरा लगाव था। वह 2 भाइयों में छोटे थे। बलजीत ने करनाल के इंद्री की रहने वाली अरूणा से लव मैरिज की थी। जिनके 2 बच्चे है, जिसमें एक 14 साल की बड़ी बेटी और 8 साल का छोटा बेटा अर्नव है।
विवाह के बाद अपने बच्चों से भी उनका विशेष स्नेह था। उनकी शहादत के बाद परिवार के साथ-साथ पूरा गांव गर्व महसूस करता है।
सेना में 17 साल का गौरवपूर्ण सफर
बलजीत सिंह वर्ष 2002 में महाराष्ट्र के अहमदनगर से भारतीय थल सेना में भर्ती हुए थे। करीब 17 साल के सेवा काल में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। रक्षा मंत्री राजनाथ के साथ कमांडो के रूप में भी उन्होंने सेवाएं दीं। बाद में उनकी ड्यूटी जम्मू-कश्मीर में लगी, जहां उन्होंने कई आतंकवाद विरोधी अभियानों में हिस्सा लिया।

बलजीत के घर के बाहर का दृश्य।
ऑपरेशनों में दिखाई वीरता, आतंकियों के निशाने पर आए
ड्यूटी के दौरान उन्होंने 2 ऑपरेशनों में कई आतंकवादियों को ढेर किया। इसके बाद वे आतंकियों के निशाने पर आ गए। तीसरे ऑपरेशन के दौरान पुलवामा के अनंतनाग क्षेत्र में 11 फरवरी 2019 को उन्होंने वीरगति प्राप्त की।
सेना मेडल से हुआ सम्मानित, स्मारक की मांग
देश के प्रति उनके अदम्य साहस को सम्मान देते हुए वर्ष 2021 में उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी पत्नी अरुणा ने सेना से प्राप्त किया। शहादत के बाद गांव के राजकीय माध्यमिक स्कूल का नाम शहीद बलजीत सिंह के नाम पर रखा गया।
ग्रामीण सरपंच बलिंद्र, प्रवीण लाठर, बलकार लाठर, जसमेर लाठर, कर्मबीर फौजी, इंद्र फौजी और अशोक फौजी ने मांग की है कि गांव में शहीद बलजीत सिंह के नाम से एक स्मारक भी बनाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान से प्रेरणा ले सकें।