
दो फरार शूटरों की तस्वीर आई सामने.
Ankit Balian Murder Case: हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान हत्याकांड की जांच में पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है. हत्या के बाद फरार चल रहे दो संदिग्ध शूटर आर्यन और सत्यम की तस्वीरें सामने आई हैं. दोनों की तलाश में यूपी एसटीएफ और शामली पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं. इससे पहले सोमवार को पुलिस ने मुठभेड़ में दो शूटरों को मार गिराया था. इनकी पहचान मोहित और सुमित के रूप में हुई है.
4 शूटरों ने मिलकर दिया वारदात को अंजाम
पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया है कि अंकित बालियान की हत्या के लिए कुल चार शूटर शामली पहुंचे थे. इनमें से दो आरोपी मोहित और सुमित पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं, जबकि आर्यन और सत्यम अभी फरार हैं. जांच में यह भी पता चला है कि चार शूटरों के अलावा दो अन्य लोग भी हत्याकांड में मदद कर रहे थे. इन लोगों पर रेकी करने और दूसरी तरह की सहायता देने का आरोप है. इस तरह पुलिस की जांच में अब तक कुल छह लोगों की भूमिका सामने आई है.
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CCTV फुटेज से हुई शूटरों की पहचान
अंकित बालियान की हत्या के बाद पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली. फुटेज में संदिग्धों की गतिविधियां सामने आने के बाद पुलिस ने चारों शूटरों की पहचान की. पुलिस के मुताबिक, गोली चलाने वाले शूटर हरियाणा के हिसार और रोहतक से जुड़े हुए हैं. इनमें से एक आरोपी पहले भी हत्या के मामले में जेल जा चुका है. वहीं, बाकी आरोपियों के खिलाफ भी छोटे-मोटे आपराधिक मामले सामने आए हैं.
पहचान सामने आने के बाद हरियाणा पुलिस ने आरोपियों के घरों और उनके रिश्तेदारों के ठिकानों पर दबिश दी. पुलिस की पूछताछ और दबाव बढ़ने के बाद आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए और फरार हो गए. इसके बाद यूपी एसटीएफ ने उनकी तलाश तेज कर दी.
कॉल डिटेल और वॉट्सऐप चैट भी खंगाली गई
हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने अंकित बालियान की कॉल डिटेल और वॉट्सऐप मैसेजिंग हिस्ट्री की भी जांच की. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या की साजिश किसने रची और शूटरों को किस-किस व्यक्ति से मदद मिली. पुलिस की जांच का फोकस फरार शूटरों के साथ-साथ उन लोगों पर भी है, जिन्होंने हत्या से पहले रेकी, ठहरने और भागने में मदद की थी.
मेरठ जोन की 8 टीमें जांच में जुटीं
अंकित बालियान हत्याकांड के खुलासे के लिए मेरठ जोन के सात जिलों के पुलिस अधिकारियों की आठ टीमें लगाई गई थीं. पुलिस की टीमें लगातार उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा और दिल्ली में भी दबिश दे रही हैं. इससे पहले मेरठ जोन के ADG भानु भास्कर ने शामली पहुंचकर अधिकारियों के साथ करीब दो घंटे तक बैठक की थी. उन्होंने जांच की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जल्द से जल्द आरोपियों तक पहुंचने के निर्देश दिए थे. ADG ने कहा था कि पुलिस आरोपियों और वारदात में इस्तेमाल हथियारों के काफी करीब पहुंच चुकी है.
20 अगस्त को हुई थी अंकित की रेकी
पुलिस के मुताबिक, हत्या से पहले 20 अगस्त को अंकित बालियान की रेकी की गई थी. दो शूटर शामली पहुंचे और उन्होंने अंकित की गतिविधियों पर नजर रखी. दोनों ने शामली के सूर्या होटल में कमरा लिया था. होटल में आरोपियों ने आधार कार्ड समेत जरूरी दस्तावेज जमा किए थे. पुलिस ने होटल में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली तो जांच को अहम सुराग मिले. पुलिस के मुताबिक, इसी आधार पर आरोपियों की गतिविधियों को ट्रैक किया गया.
2 शूटर करनाल की ओर भागे, मोहित-सुमित बागपत की तरफ निकले
पुलिस की जांच के अनुसार, वारदात के बाद चारों शूटर अलग-अलग रास्तों से भागे. दो शूटर बाइक से करनाल की ओर फरार हुए, जबकि मोहित और सुमित बागपत की तरफ निकल गए. पुलिस ने दोनों को ट्रैक किया और कैराना रोड स्थित इंडियन गैस गोदाम के पास उनकी घेराबंदी की गई. यहां पुलिस और आरोपियों के बीच मुठभेड़ हुई. जवाबी फायरिंग में मोहित और सुमित को गोली लगी. दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
दोनों पर 50-50 हजार रुपए का इनाम था
पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ में मारे गए मोहित और सुमित पर 50-50 हजार रुपए का इनाम घोषित था. दोनों के कुख्यात गोगी गैंग से जुड़े होने की बात सामने आई है. मुठभेड़ के दौरान SWAT टीम के हेड कांस्टेबल हरविंदर और प्रदीप भी घायल हुए. पुलिस ने मौके से दो पिस्टल, जिंदा और खोखा कारतूस, एक स्प्लेंडर बाइक, बैग, मोबाइल फोन और करीब 5 हजार रुपए नकद बरामद किए.
फिलहाल पुलिस की टीमें फरार शूटर आर्यन और सत्यम की तलाश में जुटी हैं. पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद हत्याकांड की पूरी साजिश और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का खुलासा होने की उम्मीद है.

आशीष कुमार मिश्रा
आशीष कुमार मिश्रा की 6 साल से जर्नलिज्म की Journey जारी है. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को बनाने में अहम योगदान भारत के राज्यों का है. इन राज्यों से जुड़ी हर खटपट, चाहे राजनीतिक हो या सामाजिक, वो आप तक पहुंचाने में जुटा हुआ हूं. उत्तर प्रदेश समेत देश के तमाम बड़े राज्यों की सियासत को समझता हूं और बेबाकी से उसे लिखता हूं. जर्नलिज्म की Journey 2017 में न्यूज चैनल समाचार टुडे से स्टार्ट हुई, फिर नेशनल वॉइस के साथ भी काम करने का मौका मिला. दो न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल की तरफ में रुख किया. 2018 में पहली बार हैदराबाद में ईटीवी भारत की डिजिटल विंग टीम से जुड़ा. यहां साढ़े 3 साल का समय बिताने के बाद 2021 में दैनिक भास्कर (लखनऊ) की टीम से जुड़ा. अब यह सफर 2022 से टीवी9 भारतवर्ष के साथ चल रहा है. पत्रकारिता का मैंने ककहरा दैनिक जागरण इंस्टीट्यूट से सीखा. यहीं से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.
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