भोपाल2 घंटे पहलेलेखक: जितेंद्र मेहरा
- कॉपी लिंक

लालघाटी पर रोज करीब डेढ़ लाख लोग जिस जाम में फंसते हैं, उसकी वजह सिर्फ बिजली का सब-स्टेशन नहीं, बल्कि हाईवे के लिए अधिग्रहित जमीन पर कब्जे भी हैं। वीआईपी रोड से लालघाटी की ओर मुड़ते ही सर्विस लेन 5 मीटर से भी कम रह जाती है, जबकि इसे 7 मीटर चौड़ा बनाया जाना था।
सरकारी रिकॉर्ड की पड़ताल में सामने आया कि 2019 में सड़क चौड़ीकरण के लिए 2.11 करोड़ रुपए का मुआवजा तय हुआ। जमीन एनएचएआई के नाम दर्ज भी हो गई, लेकिन सात साल बाद भी पूरी तरह खाली नहीं हुई। यहां दुकानें, पटाखा गोदाम और विद्युत सब-स्टेशन मौजूद हैं। इसी कारण इंदौर-उज्जैन जाने वाली बसों से लेकर एंबुलेंस और स्कूल वाहन तक जाम में फंसते हैं।
2019 में अवार्ड, जमीन एनएचएआई के नाम; कब्जे बरकरार: एसडीएम (भू-अर्जन) हुजूर ने 25 फरवरी 2019 को हलालपुर के खसरा नंबर 82 सहित आसपास की जमीन के लिए 2,11,80,490 रुपए का मुआवजा तय किया था। अवार्ड में जमीन सड़क परिवहन मंत्रालय और एनएचएआई के नाम दर्ज करने के निर्देश थे। रिकॉर्ड में नामांतरण भी हो गया। इसके बावजूद सड़क किनारे कब्जे नहीं हटे।
इन दुकानों और सब-स्टेशन की वजह से सर्विस लेन की चौड़ाई 5 मी. रह गई है
सब-स्टेशन हटाने के लिए 5.25 करोड़ स्वीकृत, फिर भी काम अटका
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवांश नुवाल के अनुसार, ट्रांसफॉर्मर शिफ्टिंग के लिए 5.25 करोड़ रुपए स्वीकृत हैं। 40 लाख सुपरविजन चार्ज जमा कर दो साल पहले पत्र भी भेजा गया। बिजली कंपनी या नगर निगम को काम कराना है। उन्होंने कहा कि कब्जे से मालिकाना हक नहीं मिलेगा और नियम विरुद्ध काम करने वाले राजस्व अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
असली मालिक का हक उलझा, दूसरे के कब्जे को जगह मिली
खसरा नंबर 82 के भू-स्वामी मोहम्मद ताहिर के वारिस के नाम में त्रुटि से उनका हक विवादित हुआ। दस्तावेजों के अनुसार, र|ा शर्मा की जमीन पीछे खसरा 82/2 में बताई गई, लेकिन बंटान में उन्हें ताहिर की जमीन वाले हिस्से पर दर्शाया गया। इसी क्षेत्र में आतिशबाजी दुकानें और गोदाम भी हैं। बंटान की वैधानिकता और कब्जाधारियों के अधिकार की जांच जरूरी है।
बंटान में कब्जे को आधार बनाया, सड़क किनारे छोड़ दी जगह
खसरा नंबर 82 के नए बंटान नक्शे और राजस्व रिपोर्ट में लिखा है- ‘मौके पर कब्जे के आधार पर बंटान प्रस्तावित की गई है।’ दस्तावेजों के अनुसार, सड़क किनारे 100 से 150 फीट की पट्टी में कब्जों के हिसाब से जगह छोड़ी गई। आरोप है कि इससे कब्जाधारियों के लिए भविष्य में मुआवजे का दावा करने की गुंजाइश बन सकती है।
प्रशासन बोला-जांच कर कब्जे हटाएंगे... एसडीएम बैरागढ़ रवीश श्रीवास्तव का इस संबंध में कहना है, ‘यदि जमीन अधिग्रहित है और मुआवजा बंट चुका है तो मामले की जांच कराएंगे। अवैध कब्जे मिलने पर उन्हें हटाने की कानूनी कार्रवाई होगी।’
.