Aurangabad News: बिहार के औरंगाबाद जिले में प्रेम-प्रसंग के बीच नाबालिग लड़की की इच्छा के खिलाफ जबरन शादी करना एक युवक को भारी पड़ गया. मंदिर में नाबालिग की मांग में सिंदूर भरकर शादी रचाने वाले आरोपी को औरंगाबाद के स्पेशल पोक्सो कोर्ट ने 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. साथ ही उस पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. अदालत ने अपने फैसले में साफ संदेश दिया कि नाबालिगों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. स्पेशल पोक्सो कोर्ट के न्यायाधीश लक्ष्मीकांत मिश्रा ने दोषी गुंजन सिंह बंदेया को सजा सुनाई. इससे पहले 6 जुलाई 2026 को अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया था.
जानकारी के अनुसार, 28 जून 2025 को पीड़िता अल्ट्रासाउंड कराने के लिए रफीगंज गई थी. आरोप है कि वहीं से आरोपी गुंजन सिंह उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया. अगले दिन वह उसे हसपुरा प्रखंड स्थित प्रसिद्ध देवकुंड मंदिर ले गया, जहां उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरन मांग में सिंदूर भरकर शादी कर ली थी.
पीड़िता से की थी जबरन शादी
घटना के बाद पीड़िता ने किसी तरह अपने पिता को फोन कर पूरी जानकारी दी. इसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नाबालिग को आरोपी के घर से बरामद कर लिया. न्यायालय में दर्ज कराए गए बयान में भी पीड़िता ने जबरन शादी कराने की बात कही थी.जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया. पीड़िता नाबालिग थी, इसलिए 31 अक्टूबर 2025 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए गए. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाहों को अदालत में पेश किया गया.
स्पेशल लोक अभियोजक शिवलाल मेहता ने बताया कि अदालत ने पोक्सो एक्ट की धारा 4(2) और बीएनएस की धारा 65(1) के तहत आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. इसके अलावा बीएनएस की धारा 87 के तहत 7 वर्ष के कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने का भी आदेश दिया गया. हालांकि अदालत ने दोनों सजाओं को साथ-साथ चलाने का निर्देश दिया है.
पीड़िता को मिलेंगे एक लाख रुपये
अदालत ने बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना-2019 के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद को निर्देश दिया है कि पीड़िता को एक लाख रुपये का मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए. साथ ही आरोपी को जेल में पहले से बिताए गए चार माह 22 दिन की अवधि का समायोजन भी मिलेगा.
यह फैसला सिर्फ एक आरोपी को सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि नाबालिग लड़कियों के साथ जबरन शादी, शोषण या उनके अधिकारों का हनन करने वालों के खिलाफ कानून बेहद सख्त है. अदालत के इस फैसले को बालिकाओं की सुरक्षा और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

मोहित पंडित
मोहित पंडित ने साल 2004 से अपनी पत्रकारिता की शुरुआत की. नई बात, सन्मार्ग, सोनभद्र जैसे अखबारों में वे अपनी सेवा दे चुके हैं. वे सीमांचल के समाचारों को सकारात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं और स्थानीय घटनाओं को उच्च स्तर पर रिपोर्ट करने में निपुण हैं. उनकी लेखनी में संवेदनशीलता और नैतिकता झलकती है.
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