जी-20 बैठक में घमासान: अमेरिका पर बिफरे यूरोपीय देश, कनाडा से तीखी नोकझोंक; जर्मनी-फ्रांस ने भी उठाए सवाल

Published on 2 सित॰ 2026

अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में आयोजित जी-20 वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक गवर्नर्स की बैठक में उस वक्त असहज स्थिति पैदा हो गई, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आर्थिक मॉडल को दुनिया के सामने 'रोल मॉडल' की तरह पेश करने की कोशिशें उल्टी पड़ गईं।



अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सम्मेलन के लगभग हर सत्र की शुरुआत यह कहते हुए की कि दुनिया को ट्रंप प्रशासन की नीतियों की नकल करनी चाहिए। लेकिन मेज के दूसरी तरफ बैठे अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी-जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा ने इस आत्ममुग्धता को स्वीकार करने के बजाय अमेरिकी नीतियों पर दुनिया की आर्थिक तरक्की को पटरी से उतारने का खुला आरोप मढ़ दिया।

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ईरान के साथ अमेरिकी युद्ध के चलते ग्लोबल एनर्जी सप्लाई और शिपिंग रूट्स का ठप होना, सहयोगियों को भरोसे में लिए बिना यूरोपीय मुद्रा (यूरो) बेचकर जापानी येन को सहारा देना, और कनाडा समेत यूरोपीय देशों पर थोपे गए दंडात्मक टैरिफ जैसे मुद्दों पर पश्चिमी ब्लॉक के भीतर ही खुला असंतोष फूट पड़ा।

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बेसेंट बोले- 13 गुना ताकतवर देश से मत भिड़ो


सम्मेलन के दौरान सबसे तीखी जुबानी जंग अमेरिका और उसके उत्तरी पड़ोसी कनाडा के बीच देखने को मिली। वित्त मंत्री बेसेंट ने सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में कनाडा का उपहास उड़ाते हुए कहा-मुझे नहीं लगता कि आपको किसी ऐसे देश से आंख में आंख मिलाकर भिड़ना चाहिए जो आपकी अर्थव्यवस्था से 13 गुना बड़ा है। इस बयान पर पलटवार करते हुए कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन ने कहा-हम किसी से डरने वाले नहीं हैं।



किसने क्या कहा?


अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट बोले कि अमेरिका दुनिया की एआई सुपरपावर है। हमारी कंप्यूटिंग क्षमता और डीरेगुलेशन बेजोड़ हैं। बाकी दुनिया हमारे साथ आकर तरक्की करे। वहीं, कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन ने कहा कि कनाडा अपने कामगारों और उद्योगों की हर कीमत पर रक्षा करेगा।



अमेरिका पर नाराजगी के ये 3 बड़े कारण

  • बिना पूछे यूरो बेचना और डॉलर बचाना: पिछले महीने अमेरिका ने जापानी मुद्रा (येन) को गिरने से बचाने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार में रखे 'यूरो' बेच दिए। इससे यूरोप की साझा मुद्रा 'यूरो' की वैल्यू गिर गई। जर्मनी के सेंट्रल बैंक के प्रमुख जोआकिम ने कहा कि इस कदम से यूरोप में भारी नाराजगी है।
  • ईरान युद्ध से आर्थिक विकास की रफ्तार घटी: आईएमएफ  ने हालिया समीक्षा में साफ किया है कि ट्रंप प्रशासन के ईरान युद्ध ने दुनिया भर में आर्थिक विकास की रफ्तार को धीमा किया है। जर्मन अर्थशास्त्रियों के अनुसार, युद्ध और अमेरिकी टैरिफ ने 2022 के बाद से जर्मनी के सबसे मजबूत विकास वर्ष पर पानी फेर दिया है।
  • रेगुलेशन बनाम क्लाइमेट का टकराव भी बढ़ा: जहां ट्रंप प्रशासन ने एआई और जीवाश्म ईंधन से तमाम पाबंदियां हटा दी हैं, वहीं यूरोप पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन ट्रांजिशन और एआई पर कड़े नियमों के पक्ष में है। जर्मनी के वाइस चांसलर लार्स ने कहा-हमारे बीच स्पष्ट मतभेद हैं।