गौशाला बनी नहीं, 20 लाख निकले, टेंडर में भी खेल: 37.85 लाख के प्रोजेक्ट में फर्जी निविदाओं से चहेती फर्म को फायदा पहुंचाने का आरोप, EOW ने दर्ज की FIR - Rewa News

Published on 16 अक्टू॰ 2026

रीवा जिले के डभौरा में गौशाला निर्माण के नाम पर सरकारी राशि में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। नगर परिषद की यूनिट-3 में 37.85 लाख रुपए की लागत से होने वाले निर्माण कार्य में पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाने, कथित तौर पर फर्जी निविदाएं तैयार करने

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जांच के मुताबिक, गौशाला निर्माण का काम ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक-2, रीवा के माध्यम से कराया जाना था। इसके लिए 37.85 लाख रुपए की लागत तय की गई थी। निर्माण कार्य में बछड़ा शेड, भूसा गोदाम, बीमार गायों के लिए शेड, नलकूप, 6000 लीटर की पानी टंकी, बाउंड्रीवॉल और समतलीकरण शामिल थे।

एक ही काम के लिए दो तारीखों में निविदाएं

ईओडब्ल्यू की जांच में आरोप है कि अधिकारियों ने पारदर्शी ओपन टेंडर प्रक्रिया अपनाने के बजाय छतरपुर की फर्म मेसर्स दीनदयाल कुशवाहा को लाभ पहुंचाने के लिए कथित तौर पर आपराधिक षड्यंत्र रचा। इसके तहत एक ही काम के लिए 3 दिसंबर 2020 और 31 दिसंबर 2020 की तारीखों में अलग-अलग फर्जी और कूटरचित संक्षिप्त निविदाएं तैयार की गईं।

गौशाला निर्माण के लिए 28 प्रकार की सामग्रियों की आपूर्ति के लिए निविदा बुलाई गई थी। जांच के मुताबिक, संबंधित फर्म ने केवल 9 सामग्रियों के ही कोटेशन दिए। इसके बावजूद फर्म को न्यूनतम दर वाली बताते हुए एल-1 घोषित कर दिया गया और कार्यादेश जारी कर दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि निविदा प्रपत्र का निर्धारित शुल्क जमा नहीं कराया गया और न ही अमानत राशि (ईएमडी) ली गई।

मौके पर अधूरे निर्माण के बावजूद पोर्टल पर बिल

ईओडब्ल्यू के भौतिक सत्यापन में मौके पर केवल 80×25 फीट की अधूरी बाउंड्रीवॉल और एक अधूरा भवन मिला। गौशाला के लिए प्रस्तावित अन्य जरूरी निर्माण कार्य नहीं पाए गए। इसके बावजूद मनरेगा पोर्टल पर 27,38,578.22 रुपए के बिल प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 20,22,020 रुपए का भुगतान प्राप्त कर लिया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, अधूरे निर्माण के बावजूद भुगतान किए जाने से शासन को आर्थिक नुकसान हुआ।

तत्कालीन अधिकारियों और फर्म संचालक पर FIR

ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन कार्यपालन यंत्री राजेंद्र सिंह धुर्वे, एस.आर. आर्य और हिमांशु तिवारी, तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी संजीव कुमार सेठी और गजाधर सिंह राजपूत, तत्कालीन सहायक ग्रेड-3 एवं प्रभारी निविदा शाखा लक्ष्मण प्रसाद शुक्ला तथा मेसर्स दीनदयाल कुशवाहा के प्रोपराइटर दीनदयाल कुशवाहा सहित संबंधित लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है।

मामले में भारतीय दंड विधान की धाराओं 409, 420, 467, 468, 471 और 120बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 7(सी), 13(1) और 13(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया है।