नाबालिग से रेप, आरोपी को 20 साल की सजा: घर से भगाकर मंदिर में की शादी फिर कई बार किया दुष्कर्म,5 लाख मुआवजे की सिफारिश - Raipur News

Published on 22 अग॰ 2026

रायपुर की प्रथम फास्ट ट्रैक कोर्ट (POCSO) ने 17 साल की नाबालिग बच्ची को घर से भगाकर ले जाने, शादी करने और अलग-अलग जगहों पर कई बार दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी संजय कुमार चंद्राकर को 20 साल की कठोर सजा सुनाई है।

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कोर्ट के न्यायाधीश अच्छेलाल काछी ने यह फैसला सुनाते हुए आरोपी पर 1 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर उसे 2 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

कोर्ट ने पीड़िता को हुए शारीरिक और मानसिक नुकसान और उसके पुनर्वास के लिए 5 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति देने की अनुशंसा भी की है। मामले में पीड़िता की ओर से विशेष लोक अभियोजक डालेश्वर प्रसाद साहू ने पैरवी की।

घर से भगाकर मंदिर में की शादी

वकील डालेश्वर साहू ने बताया कि मई 2005 में आरोपी संजय नाबालिग के घर के सामने से आता-जाता था। इसी दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। बाद में आरोपी ने उसे अपना मोबाइल नंबर दिया और फोन पर बातचीत होने लगी।

आरोपी नाबालिग से कहता था कि वह उससे प्यार करता है और उससे शादी करना चाहता है। शादी नहीं करने पर आत्महत्या करने की बात करता था। इस बात का झांसा देकर आरोपी नाबालिग को घर से भगा का ले गया और महासमुंद के बागबाहरा स्थित मंदिर में शादी की। इसके बाद आरोपी ने नाबालिग के साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए।

पहले से शादीशुदा था आरोपी, फिर भी नाबालिग को बताया अविवाहित

वकील ने बताया कि आरोपी ने नाबालिग ने बताया था कि वह अविवाहित है, लेकिन बाद में उसे पता चला कि आरोपी दूसरी जाति का है और पहले से शादीशुदा है। कोर्ट के मुताबिक आरोपी को शुरू से पता था कि वह पहले से शादीशुदा है, इसलिए वह नाबालिग से शादी नहीं कर सकता था।

नाबालिग ने यह भी बताया कि आरोपी उसे अपने साथ चलने के लिए धमकाता था। वह कहता था कि अगर वह उसके साथ नहीं गई तो वह खुद को मार लेगा। कोर्ट ने माना कि आरोपी ने नाबालिग को डर और दबाव में रखकर अपने साथ जाने के लिए मजबूर किया।

कोर्ट ने कहा- नाबालिग की सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं

कोर्ट ने कहा कि घटना के समय नाबालिग की उम्र 18 साल से कम थी, इसलिए वह पॉक्सो एक्ट के तहत बालिका की श्रेणी में आती थी। ऐसी स्थिति में उसके साथ बनाए गए शारीरिक संबंधों में उसकी सहमति का कोई कानूनी औचित्य नहीं है।

कोर्ट ने माना कि आरोपी नाबालिग को उसके संरक्षक की अनुमति के बिना अपने साथ ले गया और उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। कोर्ट ने इसे दुष्कर्म और गंभीर यौन अपराध माना।

तीन धाराओं में सजा,

कोर्ट ने आरोपी को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई है।

BNS धारा 137(2): 5 साल का सश्रम कारावास और 500 रुपए जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर 1 महीने की अतिरिक्त सजा।

BNS धारा 87: 7 साल का सश्रम कारावास और 500 रुपए जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर 1 महीने की अतिरिक्त सजा।

BNS धारा 64(2)(ड) और POCSO एक्ट की धारा 5(ठ)/6: 20 साल का सश्रम कारावास और 1 हजार रुपए जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर 2 महीने की अतिरिक्त सजा।

कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग धाराओं में दी गई मुख्य सजाएं एक साथ चलेंगी। इसलिए आरोपी को प्रभावी रूप से 20 साल के सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी।