मध्यप्रदेश सरकार की तरफ से शनिवार को मुनिपुंगव सुधासागर महाराज को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया है। इसके बाद टोंक में भी जैन समाज में खुशी की लहर है।
.
सरकार के इस निर्णय का जैन समाज ने स्वागत करते हुए इसे अच्छी पहल बताया है। इसे संत परंपरा, तप, त्याग और राष्ट्रहित में समर्पित जीवन के प्रति शासन की सम्मानपूर्ण श्रद्धांजलि के रूप में देखा जा रहा है।
इसी के साथ मुनिपुंगव सुधासागर का टोंक से भी खास लगाव रहा है। टोंक जिले से करीब 50 किलोमीटर दूर आवां कस्बे में साल 2000 में पहली बार पधारे थे। इसके बाद वह करीब 5 बार यहां आए थे।
जैन समाज और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान
अखिल भारतीय जैन धर्म प्रचारक राजेश अरिहंत एवं विमल पाटनी जौंला ने बताया कि हाल ही में मुनि सुधा सागर महाराज ससंघ के इंदौर (मध्यप्रदेश) में मंगल प्रवेश के साथ ही मध्यप्रदेश सरकार ने मुनिपुंगव सुधासागर महाराज को राजकीय अतिथि का दर्जा देकर देशभर के दिगम्बर जैन समाज में गौरवान्वित कर दिया है।
यह सम्मान केवल इनका नहीं है बल्कि संपूर्ण संत परंपरा, दिगम्बर जैन समाज और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान है। उन्होंने कहा कि मुनिपुंगव सुधासागर महाराज का जीवन तप, संयम, सेवा और धर्म प्रभावना का अनुपम उदाहरण रहा है, जिसका सम्मान मध्यप्रदेश सरकार ने राजकीय अतिथि का दर्जा देकर किया है।
समाज की सामूहिक श्रद्धा का प्रतीक
सकल दिगम्बर जैन समाज धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष सपना मनीष गोधा ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि तपस्वी परंपरा के प्रति शासन और समाज की सामूहिक श्रद्धा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संतों के चरण जहां पड़ते हैं, वहां केवल धर्मसभा ही नहीं सजती, बल्कि समाज में नैतिकता, सदाचार, सेवा, सद्भाव और आत्मजागरण का वातावरण भी निर्मित होता है।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इंदौर स्थित तीर्थ स्वरूप आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर, दलालबाग में आयोजित होने वाले वर्षायोग चातुर्मास-2026 को लेकर देशभर के जैन समाज में विशेष उत्साह और श्रद्धा का माहौल है। ऐसे ऐतिहासिक चातुर्मास से पूर्व पूज्य गुरुदेव को राजकीय अतिथि का दर्जा मिलना इसकी गरिमा को और अधिक बढ़ाने वाला निर्णय है।

जैन अतिशय क्षेत्र आवां में मूल मंदिर में शांतिनाथ भगवान की पद्मासन आदिनाथ भगवान पारसनाथ भगवान की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
आवां से विशेष लगाव, पांच बार आए
टोंक जिले से करीब 50 किलोमीटर दूर आवां कस्बे के रहने वाले विद्याशीष हथकरघा संचालक आशीष जैन शास्त्री ने बताया कि जगत पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव सुधा सागर महाराज का प्रथम बार आवां में प्रवेश सन 2000 में हुआ। उस दौरान महाराज ने क्षेत्र का भ्रमण किया और वहां पर पहाड़ी पर स्थित शिलालेखों को देखकर प्राचीन में कोई महान अतिश्यकारी क्षेत्र होने की पुष्टि की।
फिर मुनी ने 2008 में यहां पर मूल मंदिर का पंचकल्याण करवाया। मूल मंदिर में शांतिनाथ भगवान की पद्मासन आदिनाथ भगवान पारसनाथ भगवान की प्रतिमाएं स्थापित हैं तथा त्रिकाल चौबीसी भी है । उसी समय गांव के सभी बच्चों को अच्छी ओर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विद्यालय की भी स्थापना की। उसके बाद महाराज ने यहां पर नंदीश्वर मंदिर, समवशरण मंदिर, सहस्रकुट जिनालय आदि की स्थापना की।
सन 2018 में आवां सुधा सागर ने ससंघ चातुर्मास किया। उस समय यहां पर भव्य पंचकल्याण भी करवाया। यह एकमात्र क्षेत्र है, जहां पर निशुल्क भोजनशाला चलती है। पूज्य मुनि के आशीर्वाद से अब तक सुदर्शनों के अच्छे क्षेत्र पर भी सैकड़ो वृक्ष लग चुके है। यहां देश विदेश से जैन समाज के लोग दर्शन करने आते हैं।

यह आवां का जैन अतिशय क्षेत्र, जिसका शिलान्यास सन 2000 में पूज्य गुरुदेव मुनि सुधा सागर जी महाराज ने किया था। उसके बाद यह धीरे धीरे करीब सौ बीघा में विस्तारित हो गया।
टोंक के लिए गौरव का विषय, समाज ने जताया आभार
इसे मध्यप्रदेश के साथ-साथ टोंक जिले के लिए भी गौरव का विषय बताया गया है। मध्यप्रदेश सरकार के इस निर्णय पर जैन समाज के अध्यक्ष नेमीचंद,अखिल भारतीय जैन धर्म प्रचारक विमल जौंला, राजेश अरिहंत एवं राकेश संधी समेतचेतन कुमार गंगवाल, मंत्री महावीर प्रसाद पराणा, सरावगी समाज के अध्यक्ष शिखरचंद काला, मंत्री त्रिलोकचंद पांडया, जिला मंत्री मनोज, संरक्षक हेमचंद संधी, गोपाललाल शंभूकुमार कठमाणा, जैन धर्म प्रचारक विमल पाटनी, राकेश संधी, अग्रवाल समाज चौरासी ब्लॉक अध्यक्ष महेन्द्र चंवरिया, हेमराज नमक, त्रिलोक रजवास, सुभाष चंवरिया, धनराज चंवरिया, अतुल ठोलिया, रामपाल चंवरिया, विमल सोगानी, राजेन्द्र सेदरिया, त्रिलोक सिरस, अजीत काला, राजकुमार संधी, मुकेश संधी, प्रिंस छाबड़ा, राजकुमार बिलाला, मुकेश बनेठा, आशीष जैन शास्त्री, विमल भाणजा दलाल सहित धर्म प्रभावना समिति, जैन सोशल ग्रुप प्रज्ञा निवाई, धर्म जागृति संस्थान राजस्थान, राजस्थान जैन युवा सभा तथा टोंक जिला सरावगी समाज के अनेक पदाधिकारियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मध्यप्रदेश शासन का आभार प्रकट किया।