वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा (अर्थशास्त्र) 2022 के परीक्षा से पहले पेपर लीक मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। SOG ने 14 सितंबर को वरण कुमार विश्नोई (30) निवासी धोरीमन्ना क्षेत्र बालोतरा को गिरफ्तार किया। आरोपी को
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पूछताछ में पेपर लीक प्रकरण से जुड़े कई अहम खुलासे होने की संभावना है।
बता दें कि वरण कुमार विश्नोई (30) वर्तमान में द्वितीय श्रेणी शिक्षक (विज्ञान) के पद पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कुंभार का तला ब्लॉक धोरीमन्ना जिला बालोतरा में कार्यरत था। पेपर लीक और डमी अभ्यर्थी प्रकरण में कार्रवाई के बाद वह निलंबित है।
RPSC के सदस्य बाबूलाल कटारा से लीक हुआ था पेपर
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से अक्टूबर 2022 में यह परीक्षा आयोजित की गई थी। जांच के मुताबिक तत्कालीन RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा ने अन्य सब्जेक्ट के साथ अर्थशास्त्र का पेपर भी परीक्षा से पहले शेरसिंह उर्फ अनिल मीणा को उपलब्ध कराया था। परीक्षा होने से पहले ही यह पेपर पेपर लीक माफिया तक पहुंच गया था।
इसके बाद सुरेश ढाका और भूपेंद्र सारण गग ने शेरसिंह उर्फ अनिल मीणा से पेपर हासिल किया। अपने नेटवर्क के जरिए राजस्थान के अलग-अलग स्थानों पर अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले पेपर पढ़ाया गया। इसमें जोधपुर भी शामिल था।
7 लाख में पेपर उपलब्ध कराने की बनी थी डील
SOG की जांच में सामने आया कि मामले में पूर्व में गिरफ्तार गोपाल निवासी नेड़ी-नाड़ी थाना धोरीमन्ना बालोतरा ने पूछताछ में वरण कुमार के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी थी।
गोपाल ने बताया- वरण कुमार और मैं एक ही गांव के रहने वाले हैं और आपस में दोस्त हैं। परीक्षा से पहले वरण कुमार ने मुझे अपने घर बुलाया था। वहां उसने पेपर लीक माफिया गैंग से सांठगांठ कर पेपर हासिल करने की बात बताई।
जांच के अनुसार- दोनों के बीच परीक्षा से दो दिन पहले पेपर उपलब्ध कराने के लिए 7 लाख रुपए में सौदा तय हुआ था। इसके बाद गोपाल को पेपर उपलब्ध कराया गया और उसका वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा में चयन हो गया।
आरोपी खुद भी द्वितीय श्रेणी शिक्षक
SOG के मुताबिक- गिरफ्तार आरोपी वरण कुमार खुद भी द्वितीय श्रेणी शिक्षक है। उसने कथित तौर पर अपनी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को परीक्षा में बैठाकर अपना चयन करवाया था। इस मामले में वह पहले ही गिरफ्तार हो चुका है।
पेपर लीक और डमी अभ्यर्थी से परीक्षा दिलाने के मामलों के चलते वरण कुमार और गोपाल दोनों वर्तमान में अपने-अपने पद से निलंबित हैं।
4 दिन की पुलिस रिमांड पर आरोपी
यह कार्रवाई SOG के डीआईजी भुवन भूषण यादव और पुलिस अधीक्षक कुंदन कंवरिया के सुपरविजन में की गई। अनुसंधान अधिकारी एसीपी महावीर सिंह मीणा के नेतृत्व में टीम ने वरण कुमार को 14 सितंबर को गिरफ्तार किया।
कोर्ट ने आरोपी को चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है। SOG अब उससे पेपर लीक नेटवर्क, पेपर की खरीद-फरोख्त, अभ्यर्थियों तक पेपर पहुंचाने और अन्य आरोपियों से संपर्क को लेकर पूछताछ कर रही है।