आषाढ़ विनायक चतुर्थी 2026: इस दिन क्यों नहीं देखना चाहिए चंद्रमा? 13 घंटे तक बनेगा दुर्लभ रवि योग, जानिए रहस्य| Navbharat Live

Published on 11 जुल॰ 2026

Updated On: Jul 11, 2026 | 05:23 PM IST

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सार

Vinayak Chaturthi Puja Vidhi 2026: आषाढ़ विनायक चतुर्थी 2026 पर 13 घंटे तक दुर्लभ रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन चंद्रमा के दर्शन न करने की मान्यता के पीछे का धार्मिक रहस्य।

Ashadha Vinayak Chaturthi Ravi Yog

भगवान श्रीगणेश (सौ.जैमिनी)

विस्तार

Ashadha Vinayak Chaturthi Ravi Yog:  हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि भगवान श्रीगणेश को समर्पित मानी जाती है। इस दिन विनायक चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करने पर जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं, आर्थिक परेशानियां कम होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

इस बार आषाढ़ माह की विनायक चतुर्थी 17 जुलाई 2026, शुक्रवार को पड़ रही है। खास बात यह है कि इस दिन करीब 13 घंटे तक रवि योग का शुभ संयोग रहेगा, वहीं एक ऐसी परंपरा भी जुड़ी है, जिसके कारण इस दिन चंद्रमा का दर्शन करने से बचने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं इस दिन की पूरी तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व।

आषाढ़ विनायक चतुर्थी 2026 कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 17 जुलाई को सुबह 6 बजकर 27 मिनट पर प्रारंभ होगी और 18 जुलाई को प्रातः 4 बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर विनायक चतुर्थी का व्रत 17 जुलाई, शुक्रवार को रखा जाएगा।

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विनायक चतुर्थी पर भगवान श्रीगणेश की पूजा के लिए दिन में 11 बजकर 05 मिनट से दोपहर 1 बजकर 50 मिनट तक का शुभ मुहूर्त रहेगा। लगभग 2 घंटे 45 मिनट का यह समय पूजा, मंत्र जाप और गणपति आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

13 घंटे तक रहेगा रवि योग, बन रहे हैं कई शुभ संयोग

इस बार विनायक चतुर्थी का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इस दिन रवि योग सुबह 5 बजकर 34 मिनट से शाम 6 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही व्यतीपात योग रात 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद वरीयान योग प्रारंभ होगा। वहीं मघा नक्षत्र शाम 6 बजकर 34 मिनट तक रहेगा और उसके बाद पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र शुरू हो जाएगा।

आखिर इस दिन चंद्रमा देखने की मनाही क्यों है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन वर्जित माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा देखने से व्यक्ति को झूठे आरोप या कलंक का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को इस दिन विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

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करीब 13 घंटे तक चंद्रमा से रखें दूरी

आषाढ़ विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रोदय सुबह 8 बजकर 37 मिनट पर होगा और चंद्रास्त रात 9 बजकर 33 मिनट पर। यानी लगभग 12 घंटे 56 मिनट तक चंद्रमा का दर्शन करने से बचना चाहिए।

शाम से लगेगी भद्रा, इन कार्यों से करें परहेज

इस बार विनायक चतुर्थी के दिन शाम 5 बजकर 29 मिनट से भद्रा प्रारंभ हो जाएगी, जो 18 जुलाई प्रातः 4 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में भद्रा का वास पृथ्वी पर रहेगा। इसलिए इस समय नए कार्य, शुभ शुरुआत, गृह प्रवेश या मांगलिक कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि विनायक चतुर्थी का व्रत और भगवान गणेश की पूजा इस भद्रा से प्रभावित नहीं मानी जाती।

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