Bilgram-Mallanwan Assembly Caste Equations: बिलग्राम मल्लावां का जातीय समीकरण और 2027 का चुनावी गणित

Published on 20 अग॰ 2026

Bilgram-Mallanwan Assembly Caste Equations में कुर्मी और मुस्लिम मतदाता दो सबसे प्रभावशाली सामाजिक धुरियों में माने जाते हैं। इनके साथ रैदास, यादव, ब्राह्मण, पासी, पाल, क्षत्रिय और धोबी समुदाय भी चुनावी नतीजे पर सीधा असर डालते हैं। पुराने चुनावी अनुमानों में कुर्मी मतदाता करीब 61 हजार और मुस्लिम करीब 54 हजार बताए गए थे, जबकि रैदास मतदाताओं का अनुमान करीब 39 हजार था। हालांकि ये 2022 से पहले के संकेतात्मक अनुमान हैं, वर्तमान आधिकारिक जाति-वार मतदाता संख्या नहीं। 2026 की अंतिम SIR मतदाता सूची में बिलग्राम-मल्लावां विधानसभा में 3,53,889 मतदाता रह गए हैं। पूर्व प्रकाशित आधार 3,98,496 था, यानी 44,607 मतदाताओं की कमी हुई है। यह करीब 11.19 प्रतिशत की गिरावट है।

उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के जातिगत समीकरण / जातीय समीकरण और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर चुनावी परिणाम काफी हद तक निर्भर करता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की मानें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 एक ऐसा निर्णायक अवसर है जो राज्य की दीर्घकालिक राजनीतिक दिशा को स्पष्ट करेगा।

बिलग्राम-मल्लावां विधानसभा का क्रमांक 159 है। यह सामान्य सीट है और मिश्रिख सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। वर्तमान विधायक भाजपा के आशीष कुमार सिंह ‘आशू’ हैं। उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि पिछड़ा वर्ग के कुर्मी समाज की है। वह 2017 में पहली बार विधायक बने और 2022 में लगातार दूसरी बार सीट जीतने में सफल रहे। अगस्त 2026 तक मौजूदा विधानसभा सदस्य सूची में भी वह बिलग्राम-मल्लावां से भाजपा विधायक हैं।

उत्तर प्रदेश एसआईआर (SIR) की अंतिम सूची 2026 के तहत राज्य के सभी 75 जिलों में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कुल मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है।

हरदोई जिले के बिलग्राम मल्लावां विधानसभा के 2012  से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण, ताज़ा अपडेट, चुनावी इतिहास और पिछले चुनावों के नतीजे

उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के पिछले चुनावी नतीजों का 2007 से 2022 तक तुलनात्मक विश्लेषण, जिसमें प्रत्येक सीट का चुनावी इतिहास, विजेता और उपविजेता प्रत्याशी, मत प्रतिशत, जीत का अंतर और बदलते राजनीतिक समीकरण शामिल हैं।

बिलग्राम मल्लावां विधानसभा एक नजर में

विवरणजानकारी
विधानसभाबिलग्राम-मल्लावां
विधानसभा संख्या159
जिलाहरदोई
लोकसभा क्षेत्रमिश्रिख (SC)
आरक्षणसामान्य
वर्तमान विधायकआशीष कुमार सिंह ‘आशू’
पार्टीभारतीय जनता पार्टी
विधायक की सामाजिक पृष्ठभूमिकुर्मी/OBC
2026 अंतिम मतदाता3,53,889
SIR से पहले प्रकाशित आधार3,98,496
मतदाताओं की कमी44,607
कमी प्रतिशतकरीब 11.19%
2022 विजेताआशीष कुमार सिंह ‘आशू’, BJP
2022 उपविजेताबृजेश कुमार वर्मा, SP
2022 जीत का अंतर24,890 वोट
2024 लोकसभा में बिलग्राम-मल्लावां खंडBJP +5,537 वोट
प्रमुख सामाजिक समूहकुर्मी, मुस्लिम, रैदास, यादव, ब्राह्मण, पासी, पाल, क्षत्रिय

2026 की अंतिम मतदाता सूची के मुताबिक बिलग्राम-मल्लावां हरदोई जिले की बड़ी विधानसभा सीटों में शामिल है। सवायजपुर के 3,69,554 मतदाताओं के बाद जिले में बिलग्राम-मल्लावां का वोटर बेस 3,53,889 है।

Bilgram-Mallanwan Assembly Caste Equations: कुर्मी-मुस्लिम के साथ दलित वोट बड़ी चाबी

Bilgram-Mallanwan Assembly Caste Equations के पुराने विधानसभा-स्तरीय अनुमान में करीब 61 हजार कुर्मी, 54 हजार मुस्लिम, 39 हजार रैदास, 28 हजार यादव, 18 हजार ब्राह्मण, 17 हजार पासी, 17 हजार पाल, 11 हजार क्षत्रिय और करीब 6 हजार धोबी मतदाता बताए गए थे।

ये संख्या वर्तमान 2026 जाति-वार मतदाता सूची नहीं हैं। निर्वाचन नामावली जाति के आधार पर मतदाताओं की संख्या प्रकाशित नहीं करती। इसके अलावा SIR के बाद विधानसभा का कुल मतदाता आधार ही घटकर 3.54 लाख के आसपास रह गया है। इसलिए पुराने अनुमानों को केवल सामाजिक प्रभाव और चुनावी वजन समझने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि मौजूदा जाति-वार सटीक आंकड़ों के रूप में।

बिलग्राम-मल्लावां विधानसभा का पुराना संकेतात्मक जातीय समीकरण

जाति/समुदायपुराना अनुमानचुनावी महत्व
कुर्मीकरीब 61 हजारसबसे बड़ा अनुमानित सामाजिक समूह; मौजूदा विधायक इसी समाज से
मुस्लिमकरीब 54 हजारबड़ा स्वतंत्र वोट ब्लॉक, विपक्षी समीकरण में महत्वपूर्ण
रैदासकरीब 39 हजारदलित राजनीति की प्रमुख धुरी
यादवकरीब 28 हजारSP का परंपरागत आधार
ब्राह्मणकरीब 18 हजारमहत्वपूर्ण सवर्ण वोट
पासीकरीब 17 हजारदलित वोट का दूसरा प्रमुख हिस्सा
पालकरीब 17 हजारगैर-यादव OBC स्विंग वोट
क्षत्रियकरीब 11 हजारसवर्ण वोट में भूमिका
धोबीकरीब 6 हजारअनुसूचित जाति समीकरण का हिस्सा
अन्य OBC/SC/सवर्णशेषउम्मीदवार और स्थानीय समीकरण पर निर्भर
2026 कुल मतदाता3,53,889वर्तमान अंतिम मतदाता आधार

पुराने अनुमान की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कुर्मी, मुस्लिम और दलित समूहों में से कोई भी अकेले सीट जिताने की स्थिति में नहीं है। जीत के लिए कम से कम दो-तीन बड़े सामाजिक समूहों के साथ छोटे OBC और सवर्ण मतदाताओं का समर्थन भी जोड़ना पड़ता है।

बिलग्राम मल्लावां वोटर लिस्ट 2026: 44,607 मतदाता कम

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बिलग्राम-मल्लावां के राजनीतिक गणित में सबसे बड़ा सांख्यिकीय बदलाव मतदाता सूची में आया है।

SIR से पहले प्रकाशित आधार में विधानसभा में 3,98,496 मतदाता थे। अंतिम सूची में संख्या घटकर 3,53,889 रह गई। यानी कुल 44,607 मतदाता कम हुए। यह करीब 11.19 प्रतिशत की कमी है।

बिलग्राम-मल्लावां मतदाता सूची 2026

विवरणमतदाता
SIR से पहले प्रकाशित आधार3,98,496
2026 अंतिम मतदाता3,53,889
शुद्ध कमी44,607
कमी प्रतिशतकरीब 11.19%

इस बदलाव का राजनीतिक महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि 2017 का चुनाव सिर्फ 8,025 वोट के अंतर से तय हुआ था। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी BJP की विधानसभा खंड स्तर की बढ़त केवल 5,537 वोट रही। ऐसे में नई सूची में 44 हजार से ज्यादा मतदाताओं का बदलाव पुराने बूथ समीकरणों को फिर से जांचने के लिए पर्याप्त है।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जाति-वार कितने मतदाता सूची से बाहर हुए या जुड़े, इसका कोई आधिकारिक विवरण नहीं है। इसलिए पुराने जातीय आंकड़ों में समान प्रतिशत घटाकर नया जाति-वार अनुमान बनाना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।

कुर्मी वोट बिलग्राम-मल्लावां की सबसे बड़ी राजनीतिक धुरी

पुराने अनुमान में कुर्मी मतदाता करीब 61 हजार बताए गए थे। सीट के मौजूदा विधायक आशीष कुमार सिंह ‘आशू’ भी कुर्मी समाज से आते हैं। उनकी आधिकारिक विधानसभा प्रोफाइल में जाति पिछड़ा वर्ग-कुर्मी दर्ज है।

आशीष सिंह की लगातार दो जीत इस सामाजिक आधार के महत्व को और बढ़ाती है।

2017 में उन्होंने BJP प्रत्याशी के रूप में 83,405 वोट हासिल किए और SP के सुभाष पाल को 8,025 वोट से हराया।

2022 में उनका वोट थोड़ा घटकर 82,075 हो गया, लेकिन जीत का अंतर बढ़कर 24,890 हो गया।

यहां एक दिलचस्प बात है—पुराने अनुमान में कुर्मी वोट 61 हजार था, लेकिन आशीष सिंह को दोनों चुनावों में 82-83 हजार वोट मिले। यानी उनकी जीत केवल कुर्मी वोट के सहारे नहीं बनी। ब्राह्मण, सवर्ण, गैर-यादव OBC और दलित मतदाताओं का एक हिस्सा भी उनके समर्थन में जुड़ा होगा। यह चुनावी नतीजों से निकलने वाला राजनीतिक संकेत है।

2027 में BJP के लिए सबसे जरूरी होगा कि कुर्मी समाज में मौजूदा विधायक की पकड़ बनी रहे और उसके साथ दूसरे सामाजिक समूहों का पिछला गठजोड़ भी कायम रहे।

मुस्लिम वोट करीब 54 हजार का पुराना अनुमान

बिलग्राम-मल्लावां में पुराने अनुमान के अनुसार मुस्लिम मतदाता करीब 54 हजार थे। यह कुर्मी मतदाताओं के बाद दूसरा सबसे बड़ा अनुमानित सामाजिक समूह था।

इस कारण मुस्लिम वोट की दिशा मुख्य विपक्षी दल की ताकत पर बड़ा असर डालती है।

SP के लिए मुस्लिम वोट यादव आधार के साथ जुड़कर मजबूत शुरुआती सामाजिक गठजोड़ बना सकता है। लेकिन पुराने अनुमान के मुताबिक यादव करीब 28 हजार और मुस्लिम 54 हजार थे। दोनों को जोड़ने पर भी जीत की गारंटी नहीं बनती।

2017 में SP के सुभाष पाल को 75,380 वोट मिले थे। 2022 में SP के बृजेश कुमार वर्मा को सिर्फ 57,185 वोट मिले, लेकिन उसी चुनाव में कांग्रेस के सुभाष पाल ने 52,398 वोट हासिल कर लिए।

2022 का यही वोट बंटवारा बिलग्राम-मल्लावां को बाकी कई सीटों से अलग बनाता है।

अगर मुस्लिम, यादव और विपक्षी OBC वोट एक प्रमुख उम्मीदवार के पीछे अधिक एकजुट होता है तो 2027 में BJP के लिए मुकाबला कठिन हो सकता है।

अगर विपक्ष फिर कई मजबूत उम्मीदवारों में बंटता है तो BJP को 2022 जैसा लाभ मिल सकता है।

रैदास और पासी मिलकर बनाते हैं बड़ा दलित वोट

पुराने अनुमान में रैदास मतदाता करीब 39 हजार और पासी करीब 17 हजार बताए गए थे। धोबी समाज को भी करीब छह हजार के स्तर पर रखा गया था।

इस तरह अनुसूचित जाति मतदाता सामान्य सीट होने के बावजूद बिलग्राम-मल्लावां में बड़ा वोट ब्लॉक बनाते हैं।

BSP के लिए यह उसका परंपरागत सामाजिक आधार है। 2017 में BSP के अनुराग मिश्रा को 51,502 वोट, यानी लगभग 23 प्रतिशत मत मिले थे। 2022 में BSP के कृष्ण कुमार सिंह को 35,764 वोट, यानी करीब 15.23 प्रतिशत मत मिले।

बिलग्राम-मल्लावां में BSP का बदलता वोट

चुनावप्रत्याशीवोटवोट शेयर
2012बृजेश कुमार64,768करीब 30.50%
2017अनुराग मिश्रा51,502करीब 23.23%
2022कृष्ण कुमार सिंह35,764करीब 15.23%
2024 लोकसभा खंडबी.आर. अहिरवार26,038करीब 11.85%

2012 से 2024 के बीच BSP का वोट लगातार कमजोर हुआ दिखाई देता है।

हालांकि इससे यह साबित नहीं होता कि BSP के कम हुए सभी वोट किसी एक दल को चले गए। लेकिन पार्टी जितनी कमजोर हुई, मुख्य मुकाबला BJP और विपक्ष के दूसरे उम्मीदवारों के बीच उतना अधिक केंद्रित हुआ।

2027 में BSP अगर रैदास-पासी समेत अपने पुराने दलित आधार में वापसी करती है तो तीसरा कोण फिर मजबूत हो सकता है।

यादव वोट SP के लिए महत्वपूर्ण, लेकिन सीट का पूरा गणित नहीं

पुराने जातीय अनुमान में यादव मतदाता करीब 28 हजार बताए गए थे।

SP के लिए यह मजबूत परंपरागत आधार है, लेकिन बिलग्राम-मल्लावां की चुनावी संरचना ऐसी है जहां केवल यादव-मुस्लिम जोड़ भी पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

2017 में सुभाष पाल SP उम्मीदवार के रूप में 75 हजार से अधिक वोट तक पहुंचे थे। 2022 में टिकट बृजेश कुमार वर्मा को मिला और SP का वोट घटकर 57,185 रह गया। दूसरी तरफ सुभाष पाल कांग्रेस से मैदान में आए और 52,398 वोट ले गए।

यही चुनावी आंकड़ा बताता है कि यहां स्थानीय उम्मीदवार और उसका व्यक्तिगत नेटवर्क जातीय समीकरण के बराबर महत्वपूर्ण हो सकता है।

2027 में SP को अगर सीट जीतनी है तो यादव-मुस्लिम आधार के साथ कुर्मी, पाल, दलित और कुछ सवर्ण वोट तक पहुंच बनानी होगी।

पाल मतदाता और सुभाष पाल का व्यक्तिगत प्रभाव

पुराने जातीय अनुमान में पाल मतदाता करीब 17 हजार बताए गए थे। लेकिन 2017 और 2022 के चुनाव में सुभाष पाल का प्रदर्शन इस समाज की संख्या से कहीं आगे उनके व्यक्तिगत राजनीतिक आधार की ओर संकेत करता है।

2017 में SP प्रत्याशी के रूप में उन्हें 75,380 वोट मिले और वह BJP से केवल 8,025 वोट से हारे।

2022 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए भी उन्होंने 52,398 वोट, यानी करीब 22.32 प्रतिशत मत हासिल किए।

किसी ऐसे दल के उम्मीदवार का 52 हजार से ज्यादा वोट हासिल करना, जो प्रदेश स्तर पर उस चुनाव में कमजोर था, स्थानीय व्यक्तिगत नेटवर्क की ताकत दिखाता है।

2027 में अगर सुभाष पाल या इसी तरह प्रभावशाली स्थानीय चेहरा किसी प्रमुख दल या गठबंधन से मैदान में आता है तो पूरी जातीय गणित बदल सकती है।

ब्राह्मण और क्षत्रिय वोट की भूमिका

पुराने अनुमान में ब्राह्मण करीब 18 हजार और क्षत्रिय करीब 11 हजार बताए गए थे।

संख्या कुर्मी या मुस्लिम मतों की तुलना में कम है, लेकिन दोनों मिलकर करीब 29 हजार के पुराने अनुमान वाला सवर्ण वोट ब्लॉक बनाते हैं।

2017 और 2022 दोनों चुनावों में BJP के लिए यह आधार महत्वपूर्ण रहा होगा। पार्टी के उम्मीदवार का कुर्मी समाज से होने के कारण BJP सामाजिक रूप से OBC नेतृत्व के साथ सवर्ण वोट जोड़ने की स्थिति में रही।

2027 में अगर ब्राह्मण-क्षत्रिय वोट बड़े स्तर पर BJP के साथ बना रहता है तो पार्टी को फायदा होगा।

अगर विपक्ष प्रत्याशी या स्थानीय नाराजगी के जरिए सवर्ण वोट में पांच-दस हजार की भी सेंध लगाता है, तो 2024 के केवल 5,537 वोट वाले लोकसभा अंतर को देखते हुए यह महत्वपूर्ण हो सकता है।

2022 में सिर्फ 34.96% वोट लेकर भी BJP ने जीती सीट

बिलग्राम-मल्लावां का 2022 विधानसभा चुनाव हरदोई जिले के सबसे दिलचस्प मुकाबलों में था।

BJP के आशीष कुमार सिंह ‘आशू’ को 82,075 वोट, यानी 34.96 प्रतिशत मत मिले।

SP के बृजेश कुमार वर्मा को 57,185 वोट, यानी 24.36 प्रतिशत मत मिले।

कांग्रेस के सुभाष पाल ने 52,398 वोट, यानी 22.32 प्रतिशत हासिल किए।

BSP के कृष्ण कुमार सिंह को 35,764 वोट, यानी 15.23 प्रतिशत मत मिले।

BJP की जीत का अंतर 24,890 वोट रहा।

बिलग्राम-मल्लावां विधानसभा चुनाव 2022

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
आशीष कुमार सिंह ‘आशू’BJP82,07534.96%
बृजेश कुमार वर्माSP57,18524.36%
सुभाष पालकांग्रेस52,39822.32%
कृष्ण कुमार सिंहBSP35,76415.23%
NOTA1,8180.77%
दीपक कुमारAAP1,4740.63%
BJP की जीत24,890करीब 10.60 प्रतिशत अंक

इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण बात BJP की जीत से ज्यादा विपक्षी वोट का बिखराव था।

SP और कांग्रेस को जोड़ दें तो दोनों को 1,09,583 वोट मिले थे। लेकिन दोनों अलग-अलग चुनाव लड़े और BJP 82,075 वोट के साथ विजेता बन गई। यह जोड़ केवल गणितीय तुलना है—यह मानना सही नहीं होगा कि गठबंधन होने पर सभी वोट स्वतः एक-दूसरे को ट्रांसफर हो जाते। फिर भी 2027 की रणनीति में यह परिणाम बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।

2017 में BJP की जीत सिर्फ 8,025 वोट की थी

2017 में भी BJP के आशीष कुमार सिंह ‘आशू’ ही प्रत्याशी थे।

उन्हें 83,405 वोट, यानी करीब 37.61 प्रतिशत मत मिले।

SP के सुभाष पाल ने 75,380 वोट, यानी 33.99 प्रतिशत हासिल किए।

BSP के अनुराग मिश्रा को 51,502 वोट, यानी करीब 23.23 प्रतिशत मत मिले।

BJP की जीत का अंतर सिर्फ 8,025 वोट था।

बिलग्राम-मल्लावां विधानसभा चुनाव 2017

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
आशीष कुमार सिंह ‘आशू’BJP83,40537.61%
सुभाष पालSP75,38033.99%
अनुराग मिश्राBSP51,50223.23%
अब्दुल अजीजAIMIM2,7161.23%
NOTA1,826करीब 0.83%
BJP की जीत8,025करीब 3.62 प्रतिशत अंक

2017 में मुकाबला BJP-SP के बीच काफी करीबी था और BSP के पास भी 50 हजार से अधिक वोट थे।

2022 में BJP के वोट लगभग उसी स्तर पर रहे, लेकिन SP का वोट गिरा और कांग्रेस के रूप में एक नया मजबूत तीसरा कोण बन गया। यही वजह रही कि BJP का जीत का अंतर तीन गुना से ज्यादा बढ़ गया।

2017 से 2022: BJP का वोट घटा, लेकिन जीत का अंतर बढ़ गया

बिलग्राम-मल्लावां के परिणाम में यह सबसे दिलचस्प ट्रेंड है।

पार्टी/उम्मीदवार2017 वोट2022 वोटबदलाव
BJP83,40582,075-1,330
SP75,38057,185-18,195
BSP51,50235,764-15,738
कांग्रेसमामूली52,398बड़ा उछाल
BJP की जीत8,02524,890अंतर बढ़ा

BJP ने 2017 के मुकाबले 2022 में करीब 1,330 वोट कम पाए, फिर भी उसकी जीत का अंतर 8,025 से बढ़कर 24,890 हो गया। इसका मुख्य कारण मुख्य विपक्षी वोटों का कई उम्मीदवारों में बंटना था।

इसलिए 2027 में सबसे बड़ा सवाल केवल यह नहीं होगा कि BJP का वोट कितना है, बल्कि यह भी होगा कि विपक्ष कितने हिस्सों में बंटा है।

2012 में BSP ने जीती थी बिलग्राम-मल्लावां सीट

2012 में मौजूदा बिलग्राम-मल्लावां विधानसभा क्षेत्र से BSP के बृजेश कुमार ने चुनाव जीता था।

उन्हें 64,768 वोट, यानी करीब 30.50 प्रतिशत मत मिले।

SP के कृष्ण कुमार सिंह उर्फ सतीश वर्मा को 57,440 वोट, यानी करीब 27.05 प्रतिशत मत मिले।

सुभाष पाल उस समय पीस पार्टी से मैदान में थे और उन्हें 54,153 वोट, यानी करीब 25.51 प्रतिशत मत मिले।

BSP की जीत का अंतर 7,328 वोट था।

बिलग्राम-मल्लावां विधानसभा चुनाव 2012

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
बृजेश कुमारBSP64,76830.50%
कृष्ण कुमार सिंहSP57,44027.05%
सुभाष पालPECP54,15325.51%
BSP की जीत7,328करीब 3.45 प्रतिशत अंक

2012 का परिणाम बताता है कि सुभाष पाल का व्यक्तिगत आधार एक दशक से अधिक समय से इस सीट की राजनीति में मौजूद है।

वह 2012 में छोटे दल से 54 हजार से अधिक वोट लाए, 2017 में SP से 75 हजार और 2022 में कांग्रेस से 52 हजार से ज्यादा वोट हासिल करने में सफल रहे।

2007 के नतीजे की सीधी तुलना क्यों सावधानी से करनी चाहिए?

मौजूदा बिलग्राम-मल्लावां विधानसभा संख्या 159 का वर्तमान स्वरूप परिसीमन के बाद तय हुआ। 2012 से वर्तमान सीट की तुलना स्पष्ट और समान आधार पर की जा सकती है। 2007 के चुनाव पुराने निर्वाचन क्षेत्रों और अलग सीमा संरचना के तहत हुए थे।

इसलिए 2027 के जातिगत समीकरण का विश्लेषण करते समय 2012, 2017 और 2022 के परिणाम ज्यादा उपयोगी हैं। पुराने प्री-परिसीमन परिणामों को सीधे मौजूदा बिलग्राम-मल्लावां के बूथ और जातीय आंकड़ों के साथ जोड़ना भ्रामक हो सकता है।

वर्तमान दौर में बिलग्राम-मल्लावां का चुनावी इतिहास

चुनावविजेतापार्टीवोटजीत का अंतर
2012बृजेश कुमारBSP64,7687,328
2017आशीष कुमार सिंह ‘आशू’BJP83,4058,025
2022आशीष कुमार सिंह ‘आशू’BJP82,07524,890

2012 में BSP ने सीट जीती।

2017 में BJP ने आशीष सिंह के साथ सीट छीन ली।

2022 में BJP का वोट नहीं बढ़ा, फिर भी विपक्षी वोट के विभाजन के कारण जीत का अंतर काफी बढ़ गया।

आशीष सिंह ‘आशू’ फैक्टर: कुर्मी नेतृत्व के साथ संगठन की ताकत

आशीष कुमार सिंह ‘आशू’ का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों से शुरू हुआ। वह 2017 में पहली बार विधानसभा पहुंचे और 2022 में दोबारा विधायक बने। उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि कुर्मी है और पेशे से कृषि तथा वकालत से जुड़े रहे हैं।

बिलग्राम-मल्लावां में उनके लिए तीन स्तर पर राजनीतिक ताकत दिखाई देती है—

पहला, कुर्मी सामाजिक आधार

दूसरा, BJP का सवर्ण और गैर-यादव OBC संगठन

तीसरा, लगातार दो कार्यकाल के दौरान विकसित हुआ व्यक्तिगत स्थानीय नेटवर्क

लेकिन 2027 में यही दो कार्यकाल जवाबदेही का सवाल भी बनेंगे। तीसरी बार टिकट मिलने की स्थिति में मतदाता सड़क, नगर विकास, ग्रामीण संपर्क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे स्थानीय सवालों पर पिछले दस वर्ष का आकलन कर सकता है।

2024 लोकसभा चुनाव: BJP की बढ़त घटकर सिर्फ 5,537 वोट

2027 से पहले बिलग्राम-मल्लावां का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत 2024 के लोकसभा चुनाव से मिलता है।

मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र के बिलग्राम-मल्लावां विधानसभा खंड में BJP के अशोक कुमार रावत को 97,089 वोट, यानी करीब 44.19 प्रतिशत मत मिले।

SP की संगीता राजवंशी को 91,552 वोट, यानी 41.67 प्रतिशत मत मिले।

BSP के बी.आर. अहिरवार को 26,038 वोट, यानी करीब 11.85 प्रतिशत मत मिले।

BJP विधानसभा खंड में सिर्फ 5,537 वोट से आगे रही।

बिलग्राम-मल्लावां विधानसभा खंड: लोकसभा चुनाव 2024

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
अशोक कुमार रावतBJP97,08944.19%
संगीता राजवंशीSP91,55241.67%
बी.आर. अहिरवारBSP26,03811.85%
BJP की बढ़त5,537करीब 2.52 प्रतिशत अंक

यह परिणाम BJP के लिए मिश्रित संकेत देता है।

एक तरफ पार्टी विधानसभा खंड में आगे रही।

दूसरी तरफ 2022 विधानसभा चुनाव का 24,890 वोट वाला अंतर 2024 लोकसभा में सिर्फ 5,537 रह गया। दोनों चुनाव अलग प्रकृति के हैं, इसलिए इसे सीधे 19 हजार वोट का विधानसभा स्विंग नहीं माना जाना चाहिए। फिर भी मुख्य दो खेमों के बीच प्रतिस्पर्धा काफी करीबी होने का संकेत जरूर मिलता है।

2019 से 2024 तक BJP की लोकसभा बढ़त तेजी से घटी

2019 में इसी विधानसभा खंड से BJP को 1,12,290 वोट और उस समय गठबंधन प्रत्याशी को 88,056 वोट मिले थे। BJP की बढ़त 24,234 वोट थी।

2024 में BJP को 97,089 और SP को 91,552 वोट मिले। बढ़त घटकर सिर्फ 5,537 रह गई।

बिलग्राम-मल्लावां में लोकसभा चुनाव का बदलता रुझान

चुनावBJP वोटमुख्य विपक्षBJP की बढ़त
2019 लोकसभा1,12,29088,05624,234
2024 लोकसभा97,08991,5525,537

यह बदलाव 2027 में विपक्ष को राजनीतिक अवसर देता है, लेकिन BJP का आधार भी कमजोर नहीं कहा जा सकता क्योंकि पार्टी अब भी विधानसभा खंड में आगे रही।

2022 का कांग्रेस वोट 2027 की सबसे बड़ी पहेली

बिलग्राम-मल्लावां की 2027 वाली राजनीति में सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस के 52,398 वोट का है।

2022 में सुभाष पाल कांग्रेस प्रत्याशी थे और उन्होंने 22 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल किए।

अगर 2027 में SP और कांग्रेस किसी चुनावी समझौते में साथ रहते हैं, तो सीट किस दल के खाते में जाती है और प्रत्याशी कौन होता है—यह पूरे मुकाबले का सामाजिक स्वरूप बदल सकता है।

लेकिन 2022 के SP और कांग्रेस वोट को सीधे जोड़कर भविष्य का परिणाम निकालना उचित नहीं है। उम्मीदवार बदलने पर वोट ट्रांसफर कभी सौ प्रतिशत नहीं होता।

सुभाष पाल का व्यक्तिगत नेटवर्क, पाल-OBC पहचान और लंबे समय से सीट पर सक्रियता इस वोट का एक हिस्सा व्यक्तिगत भी बनाती है।

इसीलिए गठबंधन होने की स्थिति में भी प्रत्याशी चयन सबसे बड़ा सवाल रहेगा।

BJP का 2027 वाला संभावित जातीय फॉर्मूला

बिलग्राम-मल्लावां में BJP का संभावित सामाजिक समीकरण हो सकता है—

कुर्मी + ब्राह्मण-क्षत्रिय सवर्ण + गैर-यादव OBC + पासी-रैदास दलित मतों का हिस्सा + महिला लाभार्थी वोट।

आशीष सिंह स्वयं कुर्मी समाज से आते हैं।

पुराने अनुमान में कुर्मी करीब 61 हजार थे, जबकि 2022 में BJP को 82 हजार से ज्यादा वोट मिले। इसका अर्थ है कि पार्टी को अपने कुर्मी आधार से बाहर भी बड़ा समर्थन मिला।

2027 में BJP के सामने तीन चुनौती होंगी—

कुर्मी वोट में अपनी पकड़ बनाए रखना;

2024 में घटे लोकसभा मार्जिन को फिर बढ़ाना;

और दो बार के विधायक के कामकाज को सकारात्मक वोट में बदलना।

SP के लिए कुर्मी वोट में सेंध के बिना राह मुश्किल

SP के लिए सबसे स्वाभाविक शुरुआती सामाजिक आधार मुस्लिम + यादव है।

लेकिन बिलग्राम-मल्लावां में पुराने अनुमान में कुर्मी सबसे बड़ा समूह था और BJP विधायक भी इसी समाज से हैं।

इसलिए SP की संभावित जीत की राह होगी—

मुस्लिम + यादव + रैदास-दलित मतों का हिस्सा + कुर्मी वोट में सेंध + पाल और दूसरे OBC।

2024 में SP लोकसभा प्रत्याशी को 91,552 वोट मिलना बताता है कि पार्टी-गठबंधन इस विधानसभा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी स्तर पर पहुंच चुका है।

लेकिन विधानसभा चुनाव में स्थानीय उम्मीदवार का प्रभाव ज्यादा होगा। इसलिए सिर्फ 2024 की लोकसभा बढ़त-घटत को 2027 का परिणाम मानना जल्दबाजी होगी।

BSP अब भी तय कर सकती है मुख्य मुकाबले का अंतर

बिलग्राम-मल्लावां में BSP का वोट लगातार गिरा है, लेकिन खत्म नहीं हुआ।

2012 में पार्टी सीट जीती थी।

2017 में उसे 51,502 वोट मिले।

2022 में 35,764 वोट मिले।

2024 लोकसभा में भी विधानसभा खंड से 26,038 वोट हासिल हुए।

2024 में BJP और SP के बीच अंतर सिर्फ 5,537 था, जबकि BSP के पास 26 हजार से अधिक वोट थे।

इसलिए 2027 में BSP का दलित आधार किस स्तर पर रहता है, यह सीधे BJP और SP दोनों के समीकरण को प्रभावित करेगा।

अगर BSP मजबूत दलित-मुस्लिम उम्मीदवार उतारती है तो विपक्षी वोट में बंटवारा बढ़ सकता है।

अगर कुर्मी या OBC चेहरा लाती है तो BJP और SP दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

अगर पार्टी और कमजोर होती है तो उसका पारंपरिक वोट मुख्य दो खेमों के बीच अधिक खुलकर बंट सकता है।

सड़क और कनेक्टिविटी 2027 में बड़ा स्थानीय मुद्दा

बिलग्राम-मल्लावां क्षेत्र में सड़क और ग्रामीण संपर्क लंबे समय से बड़ा स्थानीय सवाल है। फरवरी-मार्च 2026 में विधानसभा क्षेत्र की पांच सड़क परियोजनाओं के लिए करीब 8.32 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं का उद्देश्य गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर करना और किसानों, विद्यार्थियों तथा कारोबारियों के आवागमन को आसान बनाना है।

दूसरी ओर बिलग्राम-मल्लावां से गुजरने वाले महत्वपूर्ण सड़क मार्ग की चौड़ाई और दुर्घटनाओं का सवाल भी बड़े स्तर पर उठाया गया है। क्षेत्र को उन्नाव और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ने वाले मार्ग को चौड़ा करने और बेहतर श्रेणी में विकसित करने की मांग सामने आई है।

इसलिए 2027 में BJP इन स्वीकृत परियोजनाओं को विकास उपलब्धि के रूप में रख सकती है, जबकि विपक्ष निर्माण की गति, गुणवत्ता और वास्तविक ग्रामीण संपर्क को मुद्दा बना सकता है।

बिलग्राम और मल्लावां नगरों का अलग शहरी गणित

यह विधानसभा केवल ग्रामीण क्षेत्र नहीं है। बिलग्राम और मल्लावां दोनों नगरों की अपनी अलग स्थानीय राजनीति और व्यापारिक संरचना है।

बिलग्राम नगर क्षेत्र में 2025 में करीब चार करोड़ रुपये की विकास कार्ययोजना में सड़क, नाली, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, कूड़ा प्रबंधन और अन्य नगरीय सुविधाओं से जुड़े कई कार्य मंजूर हुए थे।

मल्लावां में भी पेयजल व्यवस्था के लिए 2025 में करीब 98.66 लाख रुपये की स्वीकृति दर्ज हुई।

इस तरह शहरी मतदाता के लिए सड़क, जल निकासी, पेयजल, सफाई, ट्रैफिक और बाजार की सुविधाएं जातिगत समीकरण के समानांतर चलने वाले मुद्दे हैं।

किसानों के लिए सड़क, सिंचाई और बाजार तक पहुंच अहम

मौजूदा विधायक की राजनीतिक प्रोफाइल में मुख्य व्यवसाय कृषि और वकालत दर्ज है, जबकि विधानसभा का बड़ा भूगोल भी कृषि आधारित है।

किसान मतदाता के लिए फसल की लागत, खाद-बीज, सिंचाई, छुट्टा पशु, सड़क और मंडी तक पहुंच राजनीतिक व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।

कुर्मी किसान हो, यादव किसान, मुस्लिम किसान, दलित किसान या सवर्ण किसान—खराब संपर्क मार्ग या कृषि लागत जैसी समस्याएं जाति से बाहर साझा असंतोष पैदा कर सकती हैं।

यही कारण है कि जातीय आंकड़े मजबूत संकेत जरूर देते हैं, लेकिन 2027 का वोट केवल बिरादरी के आधार पर तय होना जरूरी नहीं है।

2026 की नई सूची ने पुराने बूथ समीकरण को बदल दिया

बिलग्राम-मल्लावां में 2026 की अंतिम मतदाता संख्या 3,53,889 है। पुराने प्रकाशित SIR आधार की तुलना में 44,607 नाम कम हुए हैं।

इसका मतलब है कि राजनीतिक दलों को 2022 और 2024 के बूथ परिणामों को नई सूची के साथ फिर से मिलाना होगा।

किस बूथ पर नाम सबसे ज्यादा घटे,

कहां नए मतदाता जुड़े,

कुर्मी बहुल क्षेत्रों में वोटर बेस कितना बदला,

मुस्लिम और दलित प्रभाव वाले बूथों की नई स्थिति क्या है,

और 2024 की केवल 5,537 वोट की BJP बढ़त किन बूथों पर बनी—

ये सवाल 2027 के वास्तविक चुनावी गणित में पुराने जातीय अनुमान से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होंगे।

2027 में बिलग्राम मल्लावां का असली चुनावी गणित क्या होगा?

वर्तमान दौर के तीन विधानसभा चुनाव, 2019 और 2024 के लोकसभा परिणाम तथा 2026 की नई मतदाता सूची एक साथ रखें तो बिलग्राम-मल्लावां का मुकाबला काफी खुला दिखाई देता है।

चुनावराजनीतिक बढ़त
2012 विधानसभाBSP +7,328
2017 विधानसभाBJP +8,025
2022 विधानसभाBJP +24,890
2019 लोकसभा में बिलग्राम-मल्लावां खंडBJP +24,234
2024 लोकसभा में बिलग्राम-मल्लावां खंडBJP +5,537

2012 में BSP ने सीट जीती।

2017 में BJP ने सिर्फ 8,025 वोट से सीट छीनी।

2022 में BJP ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की और अंतर बढ़कर 24,890 हो गया, लेकिन इसमें SP और कांग्रेस के अलग-अलग मजबूत प्रत्याशियों का चुनाव लड़ना भी महत्वपूर्ण रहा।

2024 के लोकसभा चुनाव में BJP विधानसभा खंड में आगे तो रही, लेकिन उसकी बढ़त घटकर केवल 5,537 वोट रह गई।

इसके बाद 2026 की अंतिम मतदाता सूची में वोटर बेस घटकर 3,53,889 हो गया है। पूर्व प्रकाशित आधार के मुकाबले 44,607 मतदाता यानी करीब 11.19 प्रतिशत कम हुए हैं।

2027 में BJP के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा कि वह आशीष सिंह के कुर्मी आधार के साथ सवर्ण, गैर-यादव OBC और दलित मतों का पर्याप्त हिस्सा बनाए रखे।

SP के लिए जीत का रास्ता मुस्लिम-यादव आधार, रैदास-पासी दलित वोट में विस्तार, कुर्मी समाज में सेंध और पाल समेत दूसरे OBC मतदाताओं से निकलेगा।

कांग्रेस या SP-कांग्रेस गठबंधन की स्थिति में सुभाष पाल जैसे प्रभावशाली स्थानीय चेहरे का भविष्य पूरे समीकरण को बदल सकता है।

BSP जितना अपना पुराना दलित वोट वापस हासिल करेगी, उतना ही मुख्य मुकाबला दो कोण या तीन-चार कोण वाला बन सकता है।

बिलग्राम-मल्लावां की 2027 वाली असली चुनावी चाबी कुर्मी मतदाताओं की दिशा, मुस्लिम वोट की एकजुटता, रैदास-पासी दलित मतों के बंटवारे, यादव-पाल OBC समीकरण, सुभाष पाल जैसे स्थानीय नेताओं के व्यक्तिगत आधार और विपक्षी वोट के बिखराव या एकीकरण में छिपी है। 2022 में BJP की 24,890 वोट की जीत के बावजूद 2024 में उसकी बढ़त सिर्फ 5,537 रह गई और 2026 में वोटर बेस बदलकर 3.54 लाख हो गया। यही तीन आंकड़े बताते हैं कि 2027 में बिलग्राम-मल्लावां हरदोई जिले की सबसे रणनीतिक और उम्मीदवार-निर्भर सीटों में शामिल हो सकती है।

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