हेड कॉन्स्टेबल के 22 बैंक खाते जांच के दायरे में: 17 खातों में मिले ₹10 लाख,अधिकारियों की गाड़ियां चलाता था; अब करोड़ों की संपत्ति की जांच - Indore News

Published on 15 अक्टू॰ 2026

पुलिस विभाग में आरक्षक के रूप में भर्ती होकर अधिकारियों की गाड़ियां चलाने वाले हेड कॉन्सटेबल फिरोज खान की संपत्तियों को लेकर लोकायुक्त की जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं।

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लोकायुक्त के मुताबिक, अब तक की जांच में फिरोज खान द्वारा चल-अचल संपत्तियों पर करीब 13.08 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का पता चला है। यह राशि उसकी आय की तुलना में 575% अनुपातहीन बताई गई है।

14 अक्टूबर को लोकायुक्त ने इंदौर में फिरोज खान के विभिन्न आवासों और अन्य ठिकानों पर सर्च कार्रवाई की थी। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए बैंक खातों, संपत्ति के दस्तावेजों, आरटीओ रिकॉर्ड और शेयर बाजार व म्यूचुअल फंड में निवेश से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में देवास में उसकी लंबी पदस्थापना और वहां रियल एस्टेट में किए गए निवेश की भी पड़ताल की जा रही है।

देवास में कई प्रापर्टी मिली।

देवास में कई प्रापर्टी मिली।

लोकायुक्त की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब तक सामने आए 22 बैंक खातों का ब्योरा जुटाने के लिए संबंधित बैंकों को पत्र भेजे गए हैं। इनमें से 17 खातों की जानकारी मिल चुकी है। इन खातों में अंतिम शेष राशि के रूप में कुल 10 लाख रु. से ज्यादा जमा पाए गए हैं। बाकी पांच खातों की जानकारी अभी जुटाई जा रही है।

जांच एजेंसी ने खातों से राशि निकालने पर रोक लगाने और खातों में उपलब्ध अंतिम शेष राशि का ब्योरा देने के लिए भी बैंकों को पत्र भेजे हैं।

शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश की जानकारी लेने के लिए संबंधित संस्थाओं को पत्र लिखे गए हैं। आरटीओ सहित अन्य विभागों से भी रिकॉर्ड मांगे गए हैं। अभी तक की जांच में किसी बैंक लॉकर की जानकारी सामने नहीं आई है।

फिरोज खान, हेड कॉन्स्टेबल।

फिरोज खान, हेड कॉन्स्टेबल।

देवास में लंबे समय तक पदस्थापना, तबादलों के बावजूद बना रहा जुड़ाव

फिरोज खान मूल रूप से उज्जैन का रहने वाला है। उसके पिता पुलिस विभाग में पदस्थ थे। पिता के तबादले के बाद परिवार देवास आ गया, जहां फिरोज की पढ़ाई हुई। वर्ष 2002 में पुलिस विभाग में भर्ती होने के बाद उसकी पोस्टिंग देवास में हुई थी।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उसके सेवाकाल का बड़ा हिस्सा देवास में बीता। बीच में तबादले होने के बावजूद वह अधिकारियों के साथ अटैचमेंट और चालक की ड्यूटी के चलते लंबे समय तक देवास में रहा। वह सीएसपी स्तर के अधिकारियों सहित अन्य पुलिस अधिकारियों के वाहन चलाता रहा। करीब दो साल पहले उसकी पदस्थापना इंदौर में हुई थी।

अब जांच में उसकी लंबे समय तक रही पदस्थापना के दौरान अर्जित संपत्तियों, निवेश और आय के स्रोतों का मिलान किया जा रहा है। हालांकि, तबादलों और अटैचमेंट की परिस्थितियों को लेकर आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्थिति स्पष्ट होगी।

रियल एस्टेट में निवेश, अलग-अलग नामों पर संपत्तियों की पड़ताल

जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, देवास के इटावा क्षेत्र और आसपास के इलाकों में कृषि भूमि, प्लॉट और मकानों की खरीद की पड़ताल की जा रही है। संपत्तियां केवल फिरोज खान या उसके परिवार के नाम पर ही नहीं, बल्कि रिश्तेदारों और परिचित महिलाओं के नाम पर खरीदे जाने की जानकारी भी जांच के दायरे में है।

इंदौर के स्कीम 94 स्थित बिल्डिंग।

इंदौर के स्कीम 94 स्थित बिल्डिंग।

इंदौर में बिल्डिंग की ऊपरी फ्लोर पर महिला का निवास

लोकायुक्त अब संपत्तियों के दस्तावेज, रजिस्ट्री में दर्ज कीमत, भुगतान के सोर्स और वास्तविक निवेशक की भूमिका का मिलान कर रही है। इंदौर के स्कीम-94 स्थित एक बहुमंजिला इमारत को लेकर भी जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि इमारत का ऊपरी हिस्सा फिरोज खान की एक परिचित महिला के निवास में है, जबकि ग्राउंड फ्लोर सहित दो मंजिलों का हिस्सा एक कंपनी को किराए पर दिया गया है।

लकड़ी के कारोबार से रियल एस्टेट तक पहुंचने के दावों की भी जांच

जांच से जुड़े इनपुट में फिरोज खान के शुरुआती दौर में लकड़ी के कारोबार से जुड़ने और बाद में रियल एस्टेट में निवेश करने की बात भी सामने आई है। जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि करीब 24 साल के सेवाकाल में उसकी वैध आय कितनी रही और इस दौरान उसके तथा उससे जुड़े लोगों के नाम पर कितनी संपत्तियां खरीदी गईं। अलग-अलग नामों पर दर्ज जमीनों और मकानों के पीछे वास्तविक निवेश किसका था, यह दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

लोकायुक्त की ओर से बताया गया है कि मामले में केस दर्ज होने की सूचनापुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, इंदौर और अन्य वरिष्ठ कार्यालयों को भेज दी गई है। फिलहाल जांच एजेंसी बैंक खातों, निवेश, संपत्तियों और संबंधित विभागों से मिले रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। अब तक सामने आए करीब 13.08 करोड़ रुपए के संपत्ति व्यय और आय की तुलना में 575% प्रतिशत अनुपातहीनता का आंकड़ा जांच का प्रमुख आधार है। आगे की कार्रवाई दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।

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24 साल नौकरी, 75 लाख सैलरी, 30 करोड़ की संपत्ति

देवास पुलिस में आरक्षक के पद पर भर्ती हुए फिरोज खान पर 24 साल की नौकरी के दौरान आय से अधिक संपत्ति जुटाने का आरोप है। फिरोज खान को अधिकारियों की गाड़ियां चलाने की ड्यूटी मिली थी, लेकिन इसी ड्यूटी के दौरान उसने करोड़ों की संपत्ति बना ली। पढ़िए पूरी खबर।