सावन का तीसरा सोमवार नाग पंचमी के साथ, 23 साल बाद बना खास संयोग; जानें.. पूजा विधि और इस दिन का महत्व

Published on 15 अग॰ 2026

Sawan Somvar Nag Panchami: सावन का तीसरा सोमवार इस बार बेहद खास माना जा रहा है। 17 अगस्त 2026 को सावन सोमवार के साथ नाग पंचमी का पर्व भी मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करीब 23 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब सावन सोमवार और नाग पंचमी एक ही दिन पड़ रहे हैं। ऐसे में शिव भक्तों के लिए यह दिन भगवान शिव और नाग देवता की आराधना के लिहाज से विशेष माना जा रहा है।

सावन सोमवार और नाग पंचमी का महत्व

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान सोमवार को भगवान शिव की पूजा और व्रत रखने की विशेष परंपरा है। इस वर्ष सावन में कुल चार सोमवार पड़ रहे हैं और 17 अगस्त को तीसरा सावन सोमवार व्रत रखा जाएगा।

सावन सोमवार के दिन श्रद्धालु सुबह स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा के साथ भगवान शिव की पूजा करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

वहीं, 17 अगस्त को नाग पंचमी भी है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में नागों का संबंध भगवान शिव से माना जाता है। भगवान शिव के गले में नागराज विराजमान हैं, इसलिए सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ पड़ना धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

23 साल बाद बना ऐसा संयोग

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस बार सावन सोमवार और नाग पंचमी एक ही दिन पड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि करीब 23 साल बाद ऐसा संयोग बना है। इसी वजह से 17 अगस्त का दिन सामान्य सावन सोमवार की तुलना में अधिक विशेष माना जा रहा है।

मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है। वहीं, भगवान शिव की आराधना से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।

17 अगस्त को ऐसे करें भगवान शिव की पूजा

श्रद्धालु 17 अगस्त को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के मंदिर या किसी शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का स्मरण करें। पूजा के दौरान शिवलिंग पर पहले जल और फिर गंगाजल अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद दूध, दही और शहद आदि से अभिषेक करने की परंपरा है। 

भगवान शिव को बेलपत्र, आक के फूल, धतूरा और सफेद फूल अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद शिव चालीसा या शिव स्तुति का पाठ कर भगवान भोलेनाथ से परिवार की खुशहाली, सुख और समृद्धि की प्रार्थना की जा सकती है।

दान-पुण्य का भी विशेष महत्व

सावन सोमवार और नाग पंचमी के इस विशेष संयोग पर शिव मंदिर में जलाभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र या ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप और जरूरतमंद लोगों को दान करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के साथ सेवा और दान-पुण्य करने से इस पावन दिन का महत्व और बढ़ जाता है।