पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इसका मुख्य असर सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, रेवाड़ी और नारनौल जैसे जिलों में देखने को मिल सकता है।
हरियाणा में 28 से 30 सितंबर के बीच बारिश होने के संकेत हैं।
- Published: 23 Sep 2026, 06:38 PM IST
- Last Updated: 23 Sep 2026, 06:39 PM IST
हरियाणा में भीषण धूप और बढ़ती गर्मी का सामना कर रहे लोगों को जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है। राज्य में एक बार फिर मौसम करवट लेने जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 26 सितंबर से नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का आंशिक असर देखने को मिलेगा, जिसके प्रभाव से बादलों की आवाजाही शुरू होगी। इसके बाद 28 से लेकर 30 सितंबर के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश का अनुमान है।
इन जिलों में देखने को मिलेगा ज्यादा असर
मौसम विभाग के मुताबिक राजस्थान की सीमा से लगते दक्षिण और पश्चिमी हरियाणा के जिलों में इसका असर अधिक रह सकता है।
विशेष रूप से सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, रेवाड़ी और नारनौल में बादल छाने के साथ वर्षा की गतिविधियां दर्ज की जा सकती हैं। बारिश के बाद हवा में आर्द्रता (नमी) बढ़ेगी, जिससे दिन के साथ-साथ रात के तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिलेगी और हल्की ठंडक का अहसास बढ़ेगा।
अभी पारा 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है
अभी हरियाणा के अधिकांश क्षेत्रों में दिन का पारा 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान के ऊपर बने एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन (प्रति-चक्रवातीय तंत्र) की वजह से उत्तर-पश्चिमी और पश्चिमी दिशा से सूखी व गर्म हवाएं चल रही हैं। आसमान पूरी तरह साफ होने और सीधी धूप पड़ने से दिन का तापमान बढ़ रहा है।
हालिया आंकड़ों के अनुसार महेंद्रगढ़ में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 37.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि हिसार के सादलपुर क्षेत्र में सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
सूरज ढलते ही महसूस हो रही ठंडक
मानसून की विदाई की प्रक्रिया के दौरान हवा में नमी का स्तर घटने लगता है। दिन भर सूर्य की किरणों से गर्म हुई धरती की ऊष्मा रात के समय साफ आसमान होने के कारण तेजी से वातावरण में ऊपर लौट जाती है। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में रेडिएटिव कूलिंग (Radiative Cooling) कहा जाता है। इसी कारण शाम ढलते ही तापमान तेजी से नीचे गिरता है और रातें सुहानी व ठंडी हो जाती हैं।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए जारी की एडवाइजरी
मौसम में आने वाले इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आगामी 2 से 3 दिनों तक फसलों में सिंचाई करने और किसी भी प्रकार की कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करने से बचें।
हवा में नमी बढ़ने के कारण कपास (कॉटन) की फसल में सफेद मक्खी और गुलाबी सुंडी के प्रकोप की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए मौसम पूरी तरह साफ होने पर ही अनुशंसित दवाइयों का स्प्रे करें। इसके अलावा धान की फसल में तना छेदक (Stem Borer) और लीफ रोलर (Leaf Roller) कीटों की नियमित निगरानी करते रहें और खेतों में अत्यधिक जलभराव या सिंचाई से परहेज करें।