Published: Tuesday, July 21, 2026, 18:51 [IST]
China WAICO: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि वैश्विक ताकत का नया पैमाना बनता जा रहा है। इसी बीच चीन ने 29 देशों के साथ मिलकर वर्ल्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (WAICO) की शुरुआत कर दुनिया को बड़ा संदेश दिया है।
शंघाई मुख्यालय वाले इस नए संगठन को चीन एआई सहयोग का मंच बता रहा है, लेकिन विशेषज्ञ इसे भविष्य के एआई नियम तय करने की उसकी रणनीति मान रहे हैं। ऐसे समय में जब अमेरिका और पश्चिमी देश अलग एआई ढांचा तैयार कर रहे हैं, WAICO वैश्विक टेक राजनीति में नई बहस और नए समीकरण पैदा कर सकता है।
29 देशों के साथ चीन ने लॉन्च किया WAICO
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 17 जुलाई 2026 को शंघाई में WAICO की औपचारिक शुरुआत की। इससे एक दिन पहले 29 देशों ने इसके गठन समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। संगठन का स्थायी मुख्यालय भी शंघाई में रहेगा। रूस, पाकिस्तान, ब्राजील, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान और कई अफ्रीकी व एशियाई देश इसके संस्थापक सदस्य हैं। चीन का कहना है कि इसका उद्देश्य एआई क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना और विकासशील देशों को तकनीकी साझेदारी उपलब्ध कराना है।
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सिर्फ तकनीक नहीं, AI के नियम तय करना भी मकसद
विशेषज्ञों के मुताबिक WAICO का लक्ष्य केवल एआई तकनीक को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि भविष्य में एआई गवर्नेंस के वैश्विक नियमों को प्रभावित करना भी है। चीन ने पहली बार 2025 में इस संगठन का प्रस्ताव रखा था। अब इसे अंतरराष्ट्रीय मंच का रूप देकर वह विकासशील देशों को अपने साथ जोड़ना चाहता है। इससे एआई नीति निर्माण में चीन की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो सकती है।
पश्चिमी देश बाहर, विकासशील देशों पर फोकस
अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे पश्चिमी देश WAICO का हिस्सा नहीं हैं। इसके उलट चीन ने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों पर फोकस किया है। अगले पांच वर्षों में 5,000 एआई प्रशिक्षण और सेमिनार सीटें देने का एलान भी किया गया है। साथ ही आसियान, अफ्रीकी संघ, अरब लीग और ब्रिक्स जैसे समूहों के साथ तकनीकी सहयोग बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है।
दुनिया में बन सकते हैं AI के दो अलग-अलग सिस्टम
विश्लेषकों का मानना है कि WAICO के आने के बाद एआई गवर्नेंस दो ध्रुवों में बंट सकती है। एक तरफ यूरोपीय संघ का AI Act, OECD और G-7 देशों का मॉडल होगा, जबकि दूसरी तरफ चीन के नेतृत्व वाला WAICO। ऐसे में वैश्विक कंपनियों को अलग-अलग नियमों का पालन करना पड़ सकता है। छोटे देशों पर भी किसी एक व्यवस्था के साथ खड़े होने का दबाव बढ़ सकता है।
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क्या चीन का यह दांव सफल होगा?
WAICO की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सदस्य देशों को वास्तव में कितनी तकनीक, कंप्यूटिंग क्षमता और प्रशिक्षण मिल पाता है। फिलहाल यह संगठन सीधे एआई उद्योग पर लागू होने वाले नियम बनाने की स्थिति में नहीं है। इसके संस्थापक सदस्यों में ब्राजील और इंडोनेशिया को छोड़कर बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी कम हैं। इसलिए आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि कितने नए देश इससे जुड़ते हैं और क्या WAICO वैश्विक एआई व्यवस्था में प्रभावी भूमिका निभा पाता है।