कौन-सा है दुनिया का सबसे छोटा यूनिवर्सिटी कैंपस, जहां हैं सिर्फ 3 क्लासरूम?

Published on 12 सित॰ 2026

क्या आप जानते हैं दुनिया में एक ऐसी यूनिवर्सिटी कैंपस भी है, जहां सिर्फ 3 क्लासरूम हैं. यह छोटा सा कैंपस हर साल सैकड़ों छात्रों की पढ़ाई में करता है मदद

Written By : निर्जला गौड़ |  Updated at : 12 Sep 2026 10:41 AM (IST)

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smallest university tuvalu 3 classrooms कौन-सा है दुनिया का सबसे छोटा यूनिवर्सिटी कैंपस, जहां हैं सिर्फ 3 क्लासरूम?

तुवालु का यूनिवर्सिटी कैंपस

Source : pexels

यूनिवर्सिटी का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में बड़ी-बड़ी बिल्डिंग और बहुत सारे क्लासरूम की तस्वीर आती है. लेकिन क्या आपने कभी ऐसी यूनिवर्सिटी देखी है, जहां सिर्फ 3 क्लासरूम हों? दरअसल, प्रशांत महासागर में मौजूद छोटे से देश तुवालु में यूनिवर्सिटी ऑफ द साउथ पैसिफिक का एक कैंपस है, जिसमें सिर्फ 3 क्लासरूम हैं. इस कैंपस को दुनिया का सबसे छोटा यूनिवर्सिटी कैंपस बताया जाता है. खास बात यह है कि जगह छोटी होने के बाद भी यहां सैकड़ों छात्र पढ़ाई से जुड़े हैं.

तुवालु में है यह छोटा कैंपस

यह कैंपस तुवालु की राजधानी फुनाफुटी में है. तुवालु प्रशांत महासागर में मौजूद एक छोटा सा द्वीपीय देश है. यहां का यह कैंपस यूनिवर्सिटी ऑफ द साउथ पैसिफिक यानी यूएसपी का हिस्सा है. यूएसपी का मुख्य कैंपस फिजी में है और इसके कई दूसरे कैंपस प्रशांत महासागर के अलग-अलग देशों में हैं. तुवालु के छात्रों को अपने देश में ही पढ़ाई का मौका मिले, इसलिए यहां भी यूनिवर्सिटी का कैंपस बनाया गया है. इससे छात्रों को पढ़ाई के लिए दूसरे देश जाने की जरूरत नहीं पड़ती.

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सिर्फ 3 क्लासरूम में होती है पढ़ाई

इस कैंपस की सबसे खास बात यहां के सिर्फ 3 क्लासरूम हैं. पूरी बिल्डिंग भी बहुत बड़ी नहीं है. इसमें क्लासरूम के अलावा कुछ ऑफिस और एक कॉन्फ्रेंस रूम भी है. रिपोर्ट के मुताबिक, हर सेमेस्टर करीब 330 छात्र इस कैंपस की सुविधाओं से जुड़े रहते हैं. इनमें से कुछ छात्र कैंपस में आकर पढ़ते हैं, जबकि दूर रहने वाले छात्रों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा भी इस्तेमाल की जाती है. यानी जगह भले ही छोटी है, लेकिन छात्रों की संख्या और पढ़ाई का काम काफी बड़ा है.

छात्रों के लिए क्यों जरूरी है यह कैंपस

तुवालु में कई छोटे-छोटे द्वीप हैं और एक जगह से दूसरी जगह जाना आसान नहीं होता. ऐसे में वहां का यह कैंपस छात्रों के लिए काफी काम आता है. उन्हें उच्च शिक्षा के लिए अपना देश छोड़कर बाहर जाने की जरूरत कम पड़ती है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह कैंपस 1980 के दशक की शुरुआत में एक एक्सटेंशन सेंटर के तौर पर शुरू हुआ था. बाद में यह यूनिवर्सिटी ऑफ द साउथ पैसिफिक के कैंपस का हिस्सा बन गया. आज यहां सीमित जगह में छात्रों को पढ़ाई से जुड़ी सुविधाएं दी जाती हैं.

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About the author निर्जला गौड़

निर्जला गौड़ इस वक्त  ABP Live की लाइफस्टाइल डेस्क पर इंटर्न के तौर पर काम कर रही हैं. वह मंदसौर यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में अपनी डिग्री कर रही हैं. इससे पहले वह  EBNW Stories में कंटेंट राइटर के तौर पर इंटर्नशिप कर चुकी हैं. डिजिटल जर्नलिज्म और कंटेंट क्रिएशन में उनकी खास रुचि है. आसान, आकर्षक और रिलेटेबल अंदाज में कहानियों को पेश करना और पाठकों तक जानकारी को प्रभावी तरीके से पहुंचाना उनकी खासियत है.

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Published at : 12 Sep 2026 10:41 AM (IST)

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