किशनगंज के ठाकुरगंज नगर पंचायत स्थित मदरसा इस्लाहुल मुस्लेमीन, मदरसा संख्या-528 में शिक्षकों की कथित फर्जी बहाली का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।
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मदरसे में तीन शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच में प्रथम दृष्टया कई अनियमितताएं सामने आई हैं।
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अवधेश कुमार ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंप दी है। अब DEO के स्तर से आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
रिक्त तीन पदों पर गुपचुप बहाली का आरोप
आवेदनकर्ता मोहम्मद मुख्तार ने डीएम, जिला शिक्षा पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और विधायक गोपाल अग्रवाल को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि मदरसे में पहले से तीन शिक्षक कार्यरत थे और तीन पद रिक्त थे।
आरोप है कि इन पदों पर स्थानीय लोगों को जानकारी दिए बिना कथित तौर पर पूर्व नियोजित तरीके से कमेटी बनाकर तीन लोगों की बहाली कर दी गई।
आवेदन में नियुक्ति के नाम पर मोटी रकम के लेन-देन का भी आरोप लगाया गया है।

चयन प्रक्रिया और अभिलेखों की जांच की मांग
आवेदक ने पूरी नियुक्ति प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। इसमें विज्ञापन जारी करने, चयन समिति के गठन, चयन प्रक्रिया और संबंधित अभिलेखों की जांच शामिल है।
आवेदन में कहा गया है कि अगर नियुक्तियां नियमों के विपरीत या फर्जी पाई जाती हैं तो उन्हें रद्द किया जाए।
26 सितंबर को योगदान, 1 सितंबर से हाजिरी!
BEO अवधेश कुमार की जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि तीनों शिक्षकों की बहाली बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड, पटना के पत्रांक-94, दिनांक 05 जनवरी 2026 के आलोक में की गई है।
जांच में एक अहम विसंगति सामने आई। तीनों शिक्षकों ने 26 सितंबर 2026 को योगदान किया, लेकिन मदरसे की हाजिरी पंजी में उनकी उपस्थिति 1 सितंबर 2026 से ही दर्ज मिली।
योगदान से पहले की तारीख से हाजिरी दर्ज होने पर नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

36 छात्रों का नामांकन, निरीक्षण में मिले सिर्फ 7
जांच के दौरान मदरसे में कुल 36 छात्रों के नामांकन की बात सामने आई, जबकि पूर्व से तीन शिक्षक कार्यरत थे। निरीक्षण के दिन मात्र सात छात्र ही उपस्थित मिले।
स्थानीय लोगों ने भी जांच टीम को बताया कि मदरसे में छात्रों की उपस्थिति अक्सर काफी कम रहती है। ऐसे में वास्तविक छात्र उपस्थिति और दर्ज नामांकन के बीच अंतर भी जांच का अहम बिंदु बन गया है।
जर्जर भवन में चल रहा मदरसा, हादसे का खतरा
जांच रिपोर्ट में मदरसे के भवन की स्थिति को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार भवन अत्यंत जर्जर है। छत का प्लास्टर लगातार गिर रहा है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसे भवन में छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
फिलहाल BEO की जांच रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंप दी गई है। अब देखना होगा कि DEO स्तर से नियुक्तियों, हाजिरी पंजी, चयन प्रक्रिया और मदरसे के अभिलेखों की विस्तृत जांच के बाद क्या कार्रवाई की जाती है।