Bihar Sharif News: DNA जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जिससे साबित हुआ है कि तीन साल पहले अस्पताल द्वारा एक मां को सौंपी गई बच्ची उसकी जैविक संतान नहीं है. यह पूरा मामला बिहारशरीफ के एक निजी अस्पताल में बच्चे की अदला-बदली से जुड़ा है, जिसके बाद परिजनों ने नगर थाना में केस दर्ज कराया था. पुलिस द्वारा जांच में बरती गई लापरवाही के कारण परिजनों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाई कोर्ट के निर्देश पर करीब पांच माह पूर्व याचिकाकर्ता अविनाश कुमार की पत्नी और क्लीनिक द्वारा सौंपी गई बच्ची के डीएनए सैंपल लिए गए थे. हाल ही में हाई कोर्ट में सौंपी गई जांच रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई कि बच्ची याचिकाकर्ता दंपति की जैविक संतान नहीं है.
डीएनए रिपोर्ट में बच्चे की अदला-बदली या तस्करी की आशंका सच साबित होने के बाद हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति रमेश चंद मालवीय की खंडपीठ ने इस मामले में पुलिस की कार्यशैली और लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई. अदालत ने नालंदा के डीएम को संबंधित क्लीनिक का लाइसेंस तुरंत रद्द करने और एसपी को खुद इस मामले की जांच करने का सख्त आदेश दिया है. कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है और पूछा है कि आखिर महिला के असली बेटे का क्या हुआ?
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मामले की जांच में अस्पताल प्रशासन की भारी धांधली और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ भी उजागर हुई है. जांच के दौरान अस्पताल के रजिस्टर, उपचार चार्ट और एम्बुलेंस लॉगबुक में बड़े पैमाने पर बदलाव पाए गए. अस्पताल के रजिस्टर में जहां पहले ‘मेल’ (लड़का) लिखा हुआ था, वहां अलग स्याही से ‘एफ’ (F) जोड़कर उसे ‘फीमेल’ (लड़की) बना दिया गया था. सुनवाई के दौरान डॉक्टर ने खुद यह स्वीकार किया कि दाखिले के समय उन्होंने अपने हाथ से ‘F’ शब्द जोड़ा था. इसके अलावा, हाई कोर्ट ने यह भी पाया कि अस्पताल के एनआईसीयू (NICU) वार्ड में न तो कोई सीसीटीवी कैमरा लगा था और न ही वहां सुरक्षा के लिए कोई गार्ड मौजूद था.
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परिजनों ने बताया कि 25 मार्च 2023 को राजगीर के डुमरी गांव निवासी अविनाश कुमार की पत्नी ने गिरियक के सरकारी अस्पताल में एक बेटे को जन्म दिया था. बेहतर इलाज के लिए नवजात को बिहार शरीफ के भैंसासुर मोड़ स्थित ‘नवजीवन शिशु अस्पताल’ में भर्ती कराया गया. अविनाश का आरोप है कि इलाज पूरा होने के बाद क्लीनिक प्रबंधन ने उन्हें बेटे के बजाय एक बेटी सौंप दी. परिजनों द्वारा विरोध जताने पर नगर थाना में प्राथमिक दर्ज (कांड संख्या 453/23) कराई गई थी. फिलहाल इस संवेदनशील मामले की आगे की सुनवाई हाईकोर्ट में जारी है.

शिवम
घूमने का शौक, The-VOB , Daily hunt न्यूज़ में 3 साल से ज्यादा के काम का अनुभव.
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