रायपुर5 घंटे पहले
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रायपुर के महादेव घाट स्थित विसर्जन तालाब स्थल पर खारुन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण लोगों की सुरक्षा के चलते प्रशासन ने गणेश मूर्ति विसर्जन पर फिलहाल रोक लगा दी है। अफसरों ने स्थिति सामान्य होते तक सहयोग करने की अपील की है।
दरअसल, गुरुवार-शुक्रवार को दिनभर हुई बारिश के बीच भी श्रद्धालु उत्साह और आस्था के साथ महादेवघाट स्थित विसर्जन कुंड पहुंचे। नगर निगम रायपुर की ओर से बनाए गए विसर्जन कुंड में रात तक भगवान गणेश की 2900 छोटी और 480 बड़ी मूर्तियों का भक्त विसर्जन कर चुके हैं।
देखिए तस्वीरें…

नदी में जलस्तर लगातार बढ़ने से पुलिस प्रशासन ने लोगों को अलर्ट किया।

विसर्जन कुंड में शहर से गणेश प्रतिमा पहुंच रही हैं।

शनिवार को गणेश प्रतिमा विसर्जित करने ले जाता हुआ परिवार।
‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से गूंजा घाट
महादेवघाट के पास जोन क्रमांक 8 क्षेत्र में बनाए गए विसर्जन कुंड में सुबह से ही प्रतिमाएं लेकर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। बारिश के बावजूद भक्तों के उत्साह में कमी नहीं आई।
श्रद्धालुओं ने पहले प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना की। इसके बाद विधि-विधान से गणपति बप्पा को विदाई दी। विसर्जन के दौरान ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारे भी गूंजते रहे।

बरसते पानी में गणेश प्रतिमा का विसर्जन करने पहुंचे श्रद्धालु।

बड़ी प्रतिमाओं को क्रेन के माध्यम से कुंड में विसर्जित किया गया।
बारिश के बीच भी जारी रहा विसर्जन
नगर निगम ने प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए महादेवघाट के पास विशेष कुंड तैयार किया है। यहां श्रद्धालुओं को सीधे नदी में प्रतिमा विसर्जित करने के बजाय निर्धारित कुंड में विसर्जन की सुविधा दी जा रही है। छोटी और बड़ी प्रतिमाओं के अनुसार निगम की टीम व्यवस्था संभाल रही है। बारिश के बीच भी विसर्जन की प्रक्रिया लगातार चलती रही।

गणेश विसर्जन में जोन अधिकारी मॉनिटरिंग करते दिखे।
निगम अधिकारी मौके पर कर रहे निगरानी
महापौर मीनल चौबे और निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर विसर्जन कुंड की व्यवस्थाओं की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। जोन क्रमांक- 8 की जोन कमिश्नर राजेश्वरी पटेल और कार्यपालन अभियंता अतुल चोपड़ा सहित निगम के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर मौजूद हैं।
टीम श्रद्धालुओं की आवाजाही और प्रतिमा विसर्जन की व्यवस्था पर नजर रख रही है। श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहने के साथ विसर्जन की प्रक्रिया भी लगातार चलती रही।
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