घरेलू कनेक्शन पर कमर्शियल धंधा: 35 हजार कमर्शियल संपत्तियां, नल कनेक्शन सिर्फ 1500 - Gwalior News

Published on 25 सित॰ 2026

ग्वालियर1 घंटे पहलेलेखक: अनिल पटेरिया

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शहर में होटल-रेस्टोरेंट, अस्पताल की संख्या बढ़ी, लेकिन राजस्व नहीं बढ़ा शहर में होटल, रेस्टोरेंट और अस्पताल की संख्या बढ़ रही है, लेकिन इनमें से बड़ी संख्या में व्यावसायिक प्रतिष्ठान अब भी घरेलू कनेक्शन से पानी का उपयोग कर रहे हैं। नगर निगम का पीएचई अमला न तो ऐसे अवैध कमर्शियल उपयोग को रोक पा रहा है और न ही कमर्शियल जल कनेक्शनों की संख्या बढ़ा पा रहा है।

इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि निगम के रिकॉर्ड में शहर में 35 हजार कमर्शियल संपत्तियां दर्ज हैं, जबकि कमर्शियल जल कनेक्शन सिर्फ 1500 हैं। निगम के 66 वार्डों में 3.45 लाख संपत्तियां हैं। इनमें करीब 35 हजार संपत्तियां कमर्शियल श्रेणी की हैं। इसके बाद भी रिकॉर्ड में सिर्फ 1500 उपभोक्ताओं ने कमर्शियल कनेक्शन ले रखा है। वहीं 75 उपभोक्ता बल्क कनेक्शन वाले हैं। शहर में कुल जल उपभोक्ताओं की संख्या 1 लाख 72 हजार 536 है।

किस उपभोक्ता से कितनी राशि का बिल घरेलू उपभोक्ता 150 प्रतिमाह कमर्शियल उपभोक्ता 645 प्रतिमाह इंडस्ट्रियल उपभोक्ता 973 प्रति माह बल्क उपभोक्ता 16.50 प्रति एक हजार लीटर

कमर्शियल कनेक्शन धारियों के यहां लगेगा स्मार्ट मीटर वार्डों में कमर्शियल उपयोग वाले उपभोक्ताओं की पड़ताल के लिए सर्वे कराया जाएगा। साथ ही ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान कर निजी कंपनी से स्मार्ट मीटर लगाए जाएं। जिससे पानी के उपयोग के हिसाब से बिल तैयार किया जा सकेगा।

ऐसे समझें... निगम को कितना हो रहा है नुकसान निगम में दर्ज कमर्शियल संपत्तियां 35 कमर्शियल संपत्तियों से निगम को हर महीने करीब 22.57 लाख रुपए मिल सकते हैं, लेकिन 1500 कमर्शियल जल उपभोक्ताओं से सिर्फ 9.67 लाख रुपए ही मिल रहे हैं। यानी नगर निगम को सालाना संभावित आय 2.71 करोड़ रुपए के मुकाबले मौजूदा आय 1.16 करोड़ रुपए है। इस तरह निगम को करीब 1.55 करोड़ रुपए सालाना कम मिल रहे हैं। अवैध घरेलू कनेक्शनों की जांच हो तो निगम को साल में 3.86 करोड़ रुपए के राजस्व मिल सकता है।

घरेलू कनेक्शन से कमर्शियल उपयोग करने वालों पर कसेगा शिकंजा, सर्वे होगा शहर के अंदर कई उपभोक्ता ऐसे हैं। जो घरेलू कनेक्शन पर कमर्शियल उपयोग कर रहे हैं। इसका सर्वे करने कर सूची बनाने के निर्देश सहायक यात्रियों को दिए है। ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान कर कनेक्शन को कमर्शियल किया जाएगा। इससे निगम की आय भी बढ़ेगी। -एसएल बाथम, अधीक्षण यंत्री नगर निगम

कमर्शियल उपयोग छिपाने वालों से पेनाल्टी वसूली जाए निगम वाटर सप्लाई के लिए संसाधनों पर रोजाना लाखों रुपए खर्च करता है। तब कहीं घरों तक पानी पहुंच पाता है। यदि कमर्शियल उपभोक्ता पानी लेकर घरेलू बिल दे रहे हैं तो यह बहुत ही गलत बात है। इसमें कहीं न कहीं विभाग की लापरवाही भी है। इस पर सख्ती जरूरी है। तब घरेलू उपभोक्ताओं की कमर्शियल में दर्ज किया जा सकेगा। आकलन इस बात का भी होना चाहिए कि वे कब से कमर्शियल उपयोग कर रहे हैं। उस दिन से पैसा और पेनाल्टी वसूल की जाए। जिससे निगम की आय बढ़ सके और क्षेत्र में सभी लोगों को पर्याप्त पानी मिल सके।- केके सारस्वत, सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री पीएचई

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