US Spent on Iran War: अमेरिका ईरान के चलते ईरान में महंगाई चर्म पर पहुंच गई है. वहीं अमेरिका में भी हालात तेजी से खराब हो रहे हैं. एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका अभी तक 38 अरब डॉलर खर्च कर चुका है.
US Spent on Iran War: अमेरिका ईरान के चलते ईरान में महंगाई चर्म पर पहुंच गई है. वहीं अमेरिका में भी हालात तेजी से खराब हो रहे हैं. एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका अभी तक 38 अरब डॉलर खर्च कर चुका है.
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US Spent on Iran War: अमेरिका ईरान के बीच पिछले 6 महीनों से युद्ध चल रहा है. होर्मुज में खतरे के साथ ही दोनों देशों की आर्थिकी भी काफी नुकसान पहुंचा है. ईरान में महंगाई चर्म पर पहुंच गई है. वहीं अमेरिका में भी हालात तेजी से खराब हो रहे हैं. एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका अभी तक 38 अरब डॉलर खर्च कर चुका है.
ईरान के खिलाफ छह महीने से चल रहे अमेरिकी युद्ध पर अब तक करीब 38 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं. कांग्रेस के बजट कार्यालय (CBO) के अनुसार, इस खर्च में हर महीने करीब 3 अरब डॉलर की और बढ़ोतरी हो सकती है. यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब ट्रंप प्रशासन युद्ध खत्म करने और अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के रास्ते तलाश रहा है.
CBO के मुताबिक, 1 अगस्त तक हुए कुल खर्च के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है कि युद्ध के कारण 2027 के शुरुआती तीन महीनों में महंगाई दर में 0.5 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है.
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गोला-बारूद के भंडार पर दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती लागत के कारण अमेरिका के हथियारों और गोला-बारूद के भंडार पर दबाव बढ़ रहा है. ऊर्जा की कीमतें भी बढ़ी हैं. इससे चिंता बढ़ गई है कि अगर किसी और संघर्ष की स्थिति बनती है तो अमेरिका उससे निपटने में कितना सक्षम होगा. साथ ही, इससे पहले से दबाव में चल रहे सरकारी बजट पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.
यह लागत रक्षा सचिव पीट हेगसेथ द्वारा 21 जुलाई को सीनेट की सुनवाई में बताई गई 37.5 बिलियन डॉलर की राशि के लगभग बराबर थी.
कहां खर्चा सबसे ज्यादा हुआ?
बजट कार्यालय के मुताबिक, इस खर्च का बड़ा हिस्सा गोला-बारूद तेजी से खत्म होने की वजह से बढ़ा है. अनुमान है कि अमेरिका को अपने हथियारों के भंडार को दोबारा भरने में करीब 5 साल लग सकते हैं. रॉयटर्स ने अगस्त में बताया था कि युद्ध के दौरान अमेरिका अपनी लंबी दूरी की सटीक निशाना लगाने वाली लगभग सभी मिसाइलों का इस्तेमाल कर चुका है.
क्या बोला व्हाइट हाउस?
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने ईरान पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हमलों को 'निर्णायक कार्रवाई' बताया. उन्होंने कहा कि इन हमलों का मकसद ईरान को अमेरिकी सैनिकों या अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने से रोकना है. उन्होंने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति के सभी रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त हथियार और जरूरी सैन्य भंडार मौजूद हैं.
पेंटागन ने खारिज की रिपोर्ट
पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने अमेरिकी गोला-बारूद की कमी से जुड़ी रिपोर्ट को खारिज किया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति के आदेश के मुताबिक, तय समय और जगह पर कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त हथियार और जरूरी संसाधन मौजूद हैं. अमेरिका में युद्ध पर हुए खर्च की यह जांच पेंसिल्वेनिया से डेमोक्रेट सांसद और प्रतिनिधि सभा की बजट समिति के शीर्ष सदस्य ब्रेंडन बॉयल के अनुरोध पर की गई थी.
बॉयल ने कहा कि ईरान में डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध की वजह से कई अमेरिकी सैनिकों की जान गई है और कई अन्य घायल हुए हैं. उन्होंने कहा कि मानव जीवन के नुकसान के अलावा, रिपोर्ट से पता चलता है कि इस युद्ध का अमेरिकी करदाताओं पर भी भारी आर्थिक बोझ पड़ा है. उनके मुताबिक, इस युद्ध पर खर्च की गई रकम लगातार बढ़ रही है.
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