
राज्यपाल की कुर्सी का नियमImage Credit source: getty image
राज्यपाल का पद संविधान में बेहद अहम माना गया है, लेकिन उनके कार्यकाल को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. संविधान के मुताबिक राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल 5 साल होता है. इसके बाद क्या वे अपने आप पद से हट जाते हैं, जवाब है, नहीं. यही इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू है. संविधान के अनुच्छेद 156 में एक तरफ राज्यपाल के लिए 5 साल की अवधि बताई गई है, वहीं दूसरी तरफ यह भी कहा गया है कि राज्यपाल राष्ट्रपति की इच्छा तक पद पर रहेंगे.
यही वजह है कि देश में कुछ राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल 5 साल की सामान्य अवधि पार करने के बाद भी अपने पद पर बने हुए हैं. जैसे कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल जुलाई 2019 से इस पद पर हैं और अगस्त 2026 तक उनका कार्यकाल 7 साल से ज्यादा हो चुका है. वहीं अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल डीके जोशी 2017 से इस पद पर हैं. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी अगस्त 2025 में 5 साल पूरे कर लिए. इसी तरह दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन-दीव के प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल का कार्यकाल भी लंबे समय से जारी है.
5 साल पूरे होने के बाद क्या होता है?
- राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल 5 साल का होता है.
- 5 साल पूरे होने से राज्यपाल अपने आप पद से नहीं हटते.
- उत्तराधिकारी के पद संभालने तक राज्यपाल काम करते रह सकते हैं.
- राष्ट्रपति के पास राज्यपाल को पहले भी हटाने की संवैधानिक शक्ति है.
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस शक्ति का इस्तेमाल मनमाने तरीके से नहीं किया जा सकता.

5 साल से ज्यादा समय से पद पर कौन? (Getty Image)
अनुच्छेद 156 में क्या लिखा है?
संविधान का अनुच्छेद 156 राज्यपाल के कार्यकाल से जुड़ा है. इसकी पहली महत्वपूर्ण बात है कि राज्यपाल राष्ट्रपति राष्ट्रपति की इच्छा तक पद पर रहते हैं. दूसरी ओर, अनुच्छेद 156(3) में कहा गया है कि राज्यपाल अपने पद पर आने की तारीख से 5 साल की अवधि तक पद धारण करेंगे. साथ ही प्रावधान यह भी करता है कि 5 साल की अवधि समाप्त होने के बावजूद राज्यपाल तब तक पद पर रह सकते हैं, जब तक उनका उत्तराधिकारी पद नहीं संभाल लेता. इसी व्यवस्था के कारण किसी राज्य में नए राज्यपाल की नियुक्ति में समय लगने पर मौजूदा राज्यपाल काम करते रह सकते हैं.
फिर राष्ट्रपति कभी भी हटा सकते हैं?
संविधान में राष्ट्रपति की इच्छा तक पद पर रहने वाली व्यवस्था का मतलब है कि राज्यपाल को 5 साल पूरे होने से पहले भी हटाया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने बी पी सिंघल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में अनुच्छेद 156 की इसी व्यवस्था की व्याख्या की थी. कोर्ट ने माना कि राज्यपाल को हटाने की शक्ति राष्ट्रपति के पास है, लेकिन इसका इस्तेमाल मनमाने, दुर्भावनापूर्ण या पूरी तरह अनुचित तरीके से नहीं किया जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि केवल केंद्र में सरकार बदल जाना या केंद्र सरकार का किसी राज्यपाल से राजनीतिक तौर पर असहमत होना अपने आप में उसे हटाने का आधार नहीं हो सकता. हालांकि, राज्यपाल को हटाने के फैसले की न्यायिक समीक्षा का दायरा काफी सीमित है.
5 साल से ज्यादा रहने वाले कुछ प्रमुख नाम-
आचार्य देवव्रत- गुजरात आचार्य देवव्रत ने 22 जुलाई 2019 को गुजरात के राज्यपाल का पद संभाला. अगस्त 2026 तक वे करीब 7 साल पूरे कर चुके हैं.
थावरचंद गहलोत- कर्नाटक थावरचंद गहलोत ने 11 जुलाई 2021 को कर्नाटक के राज्यपाल का पद संभाला. वे 5 साल से ज्यादा समय से इस पद पर हैं.
मंगूभाई पटेल- मध्य प्रदेश मंगूभाई पटेल ने 8 जुलाई 2021 को मध्य प्रदेश के राज्यपाल का पद संभाला. अगस्त 2026 तक उनका कार्यकाल 5 साल से ज्यादा हो चुका है.
आनंदीबेन पटेल- उत्तर प्रदेश आनंदीबेन पटेल ने 29 जुलाई 2019 को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल बनीं. जुलाई 2026 में उन्होंने 7 साल पूरे कर लिए.
देवेंद्र जोशी- अंडमान-निकोबार देवेंद्र जोशी ने 8 अक्टूबर 2017 को अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल का पद संभाला. अगस्त 2026 तक वे करीब 9 साल से इस पद पर हैं.
मनोज सिन्हा- जम्मू-कश्मीर मनोज सिन्हा ने 7 अगस्त 2020 को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल का पद संभाला. अगस्त 2026 में उनका कार्यकाल 6 साल पूरा हो गया.
प्रफुल्ल खेड़ा- लक्षद्वीप और दादरा-नगर हवेली प्रफुल्ल खेड़ा दिसंबर 2020 से लक्षद्वीप के प्रशासक हैं. वे दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव के प्रशासक की जिम्मेदारी भी संभालते हैं. उनका कार्यकाल 5 साल से ज्यादा हो चुका है.

राज्यपाल के कार्यकाल का क्या नियम है (Getty Image)
राज्यपाल (Governor)
राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है. संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार हर राज्य में एक राज्यपाल होता है और उसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं. राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होती है, लेकिन सामान्य तौर पर वो मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार काम करते हैं. राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करते हैं, विधानसभा का सत्र बुला सकते हैं, विधेयकों पर मंजूरी दे सकते हैं और कुछ परिस्थितियों में अध्यादेश भी जारी कर सकते हैं. उनका सामान्य कार्यकाल 5 साल होता है, लेकिन वो राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत यानी जब तक राष्ट्रपति चाहें, पद पर रह सकते हैं.
उपराज्यपाल (Lieutenant Governor)
उपराज्यपाल केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में काम करते हैं. राज्यपाल के विपरीत, वो किसी राज्य के नहीं बल्कि केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन से जुड़े होते हैं. हालांकि, सभी केंद्र शासित प्रदेशों में LG का पद नहीं होता और उनकी शक्तियां संबंधित संविधानिक प्रावधानों और कानूनों के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए राज्यपाल और LG को एक जैसा पद नहीं माना जाता, राज्य में राज्यपाल और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में LG होता है.

अंकिता
शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.
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