NEET-UG 2026 का पेपर लीक और UGC-NET 2026 में प्रश्नपत्रों की गंभीर गड़बड़ियों ने फिर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं. 3 मई को देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG 2026) का पेपर लीक हो गया था. नतीजतन, 12 मई 2026 को परीक्षा रद्द करनी पड़ी और सीबीआई जांच के बाद 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई.
मुसीबत यहीं खत्म नहीं हुई. 16 अगस्त को जारी आदेश में NTA ने कहा है कि UGC-NET के 3 विषयों के एग्जाम दोबारा कराए जाएंगे. UGC-NET 2026 में भले ही पेपर लीक न हुआ हो, लेकिन इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के प्रश्नपत्रों में इतनी भारी गलतियां पाई गईं कि NTA को दोबारा एग्जाम कराने का आदेश देना पड़ा. NTA की गलतियों की वजह से लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर है और हर तरफ से एक ही सवाल उठ रहा है. क्या NTA को भंग कर देना चाहिए? आखिर यह संस्था ढंग से एग्जाम क्यों नहीं करवा पा रही है? आइए, तथ्यों और संसदीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस पूरे मामले की पड़ताल करते हैं…

NTA का ट्रैक रिकॉर्ड: कितने पेपर हुए लीक या रद्द?
NTA की स्थापना 15 मई 2018 को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य प्रवेश के लिए उम्मीदवारों की क्षमता का आकलन करने के लिए कुशल, पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय मानक परीक्षण आयोजित करना था. लेकिन इसका हालिया ट्रैक रिकॉर्ड इसके उद्देश्यों के बिल्कुल विपरीत है.
2026 की घटनाएं कोई अपवाद नहीं हैं, बल्कि यह 2024 से चली आ रही एक क्रोनिक बीमारी का हिस्सा हैं. शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की 371वीं रिपोर्ट के मुताबिक
- 2024 में NTA द्वारा आयोजित 14 प्रतियोगी परीक्षाओं में से कम से कम पांच में बड़ी समस्याएं सामने आई थीं.
- नतीजतन, दो परीक्षाओं (UGC-NET और CSIR-NET) को स्थगित करना पड़ा था.
- NEET-UG 2024 में पेपर लीक के मामले देखे गए थे.
- CUET (UG/PG) परीक्षा के परिणाम घोषित होने में देरी हुई थी.
जनवरी 2025 में आयोजित JEE Main 2025 की अंतिम उत्तर कुंजी में त्रुटियों के कारण इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के कम से कम 12 प्रश्नों को वापस लेना पड़ा था.
यह संस्था ढंग से एग्जाम क्यों नहीं करवा पा रही है?
NTA की लगातार विफलताओं के पीछे कई इसके स्ट्रक्चर और एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े कारण हैं, जिनका खुलासा संसदीय समिति की रिपोर्ट में हुआ है.
1. ब्लैकलिस्टेड वेंडर्स पर निर्भरता
पेपर सेटिंग, प्रशासन और सुधार में शामिल कई फर्मों को एक संगठन या राज्य सरकार द्वारा ब्लैकलिस्ट किया गया है. हालांकि, यह उन्हें अन्य राज्यों या संगठनों से अनुबंध हासिल करने से नहीं रोक रहा है. जब तक NTA ऐसे दागी वेंडर्स को पूरी तरह से बाहर नहीं करता, पारदर्शिता संभव नहीं है.
2. पैसों की कमी नहीं, क्षमता की कमी
NTA के पास धन की कोई कमी नहीं है. पिछले छह वर्षों में, NTA ने अनुमानित ₹3,512.98 करोड़ एकत्र किए, जबकि परीक्षाओं के संचालन पर ₹3,064.77 करोड़ खर्च किए. इससे 448 करोड़ रुपये का सरप्लस पैदा हुआ है. समिति ने सिफारिश की थी कि इस कॉर्पस का उपयोग एजेंसी की खुद परीक्षण आयोजित करने की क्षमताओं को बनाने या अपने विक्रेताओं के लिए नियामक और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए. इसके बावजूद, NTA आउटसोर्सिंग पर अत्यधिक निर्भर है.
3. परीक्षा के तरीकों में खामियां
परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित करने के मामले में, पेन और पेपर परीक्षा पेपर लीक के अधिक अवसर प्रदान करती है, जबकि कंप्यूटर-आधारित परीक्षण (CBT) को इस तरह से हैक किया जा सकता है जिसका पता लगाना मुश्किल है.
सुधार के दावे और जमीनी हकीकत
2024 के विवादों के बाद, शिक्षा मंत्रालय ने 22 जून 2024 को इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति (HLCE) का गठन किया था. समिति ने 21 अक्टूबर 2024 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें पेन और पेपर टेस्ट (PPT) तथा कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) दोनों में सेंधमारी रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की सिफारिश की गई थी.
इसके बाद NTA की संरचना को मजबूत करने के लिए 16 नए पद बनाए गए. यह भी निर्णय लिया गया कि सभी परीक्षा केंद्र राज्य सरकार या सरकार के स्वामित्व वाले भवन होंगे, जिसे 94 प्रतिशत तक हासिल कर लिया गया है. लेकिन 2026 में NEET-UG का लीक होना और UGC-NET में भारी गलतियां यह साबित करती हैं कि ये सुधार या तो कागजी साबित हुए हैं या माफिया तंत्र NTA के सिस्टम से ज्यादा मजबूत है.
क्या NTA को भंग करना ही एकमात्र उपाय है?
किसी भी संस्था को रातों-रात भंग कर देना एक आसान जवाब लग सकता है, लेकिन इससे वैक्यूम पैदा होगा. लाखों छात्रों की परीक्षा कराने के लिए एक नई संस्था बनाने में वर्षों लगेंगे. असली जरूरत NTA को भंग करने की नहीं, बल्कि उसकी जवाबदेही तय करने की है.
संसदीय समिति ने स्पष्ट रूप से समर्थन किया है कि पेन-एंड-पेपर परीक्षाओं पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि सीबीएसई (CBSE) और यूपीएससी (UPSC) परीक्षाओं के कई मॉडल हैं जो कई वर्षों से लीक-प्रूफ रहे हैं. समिति ने सिफारिश की कि NTA इन मॉडलों का बारीकी से अध्ययन करे और उन्हें लागू करे. इसके अलावा, कंप्यूटर आधारित परीक्षणों के मामले में, परीक्षाएं केवल सरकारी या सरकार द्वारा नियंत्रित केंद्रों में आयोजित की जानी चाहिए और कभी भी निजी केंद्रों में नहीं.
जब तक NTA अपने 448 करोड़ के सरप्लस का इस्तेमाल अपना खुद का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में नहीं करता और ब्लैकलिस्टेड वेंडर्स पर देशव्यापी प्रतिबंध नहीं लगाता, तब तक 2026 जैसी घटनाएं हर साल दोहराई जाती रहेंगी. छात्रों को न्याय तब मिलेगा जब परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था शक के घेरे से पूरी तरह बाहर होगी.
यह भी पढ़ें: जजों का इस्तीफा मांगा जा रहा…वकील के बयान पर CJI- हम नाजुक दौर में

शुभेंदु प्रताप भूमंडल
पत्रकारिता में बीते 5 साल से सक्रिय हैं. नेशनल और इंटरनेशनल न्यूज राइटिंग का अनुभव. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से साइंस में ग्रेजुएशन, फिर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता और वीडियो प्रोडक्शन की पढ़ाई. दैनिक भास्कर डिजिटल से करियर की शुरुआत. बतौर न्यूज ब्रीफ एडिटर भास्कर डिजिटल में 800 से ज्यादा बाइलाइन स्टोरी. वीडियो स्क्रिप्टिंग का भी अनुभव. अगस्त 2025 से टीवी9 डिजिटल के साथ नई पारी का आगाज.
Read More
