श्रीगंगानगर में 45 क्लस्टरों में होगी प्राकृतिक खेती, 5,625 किसानों को मिलेगा अनुदान

Published on 28 सित॰ 2026

28 सितंबर 2026, श्रीगंगानगर: श्रीगंगानगर में 45 क्लस्टरों में होगी प्राकृतिक खेती, 5,625 किसानों को मिलेगा अनुदान – मध्यप्रदेश के श्रीगंगानगर जिले में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन का क्रियान्वयन किया जा रहा है। वर्ष 2026-27 में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत श्रीगंगानगर जिले में कुल 45 क्लस्टरों अन्तर्गत प्राकृतिक खेती क्रियान्वयन हेतु कुषकों को अनुदान देय होगा। क्लस्टर/समूह का क्षेत्रफल 50 हैक्टेयर होगा जिसमें 125 कृषकों की भागीदारी होगीं, प्रत्येक कृषक को 0.4 हैक्टेयर (1 एकड़ क्षेत्रफल) प्राकृतिक खेती हेतु सहायता देय होगी।

इसके तहत कृषि विज्ञान केंद्र पदमपुर में श्रीगंगानगर जिले से चयनित कृषि सखियों व सी.आर.पी. का पांच दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अंतिम दिन कृषि सखियों एवं सीआरपी को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती मिशन श्रीगंगानगर के जिला नोडल अधिकारी एवं कृषि अनुसंधान अधिकारी श्री जगजीत सिंह द्वारा प्राकृतिक खेती विषय के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती में पशुधन (अधिमानतः गाय की स्थानीय नस्ल), कृषि आदानों जैसे बीजामृत, जीवामृत, घन-जीवामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, दशपर्णी अर्क आदि बहुफसल प्रणाली, मानसून, पूर्व शुष्क बुवाई बायोमास आधारित मल्चिंग, पारंपरिक बीजों का उपयोग खेत के बफर-जोन पर पेड़ों का एकीकरण आदि जानकारी दी गई है।

उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती मृदा, माइक्रोबायोम, पौधोंए जानवरों, जलवायु और कृषि आवश्यकताओं की प्राकृतिक अंतर-निर्भरता को मान्यता देती है। जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती की तुलना करते हुए महत्वपूर्ण जानकारी दी एवं बताया कि छोटी जोत के किसानों के लिए यह योजना लाभकारी है। कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ सीमा चावला ने बताया कि प्राकृतिक खेती स्थानीय ज्ञान और स्थान विशिष्ट प्रौद्योगिकियों पर आधारित स्थानीय कृषि पारिस्थिति की सिद्धांतों का पालन करती हैं। अन्य घटकों के साथ-साथ बहु-प्रजाति हरी खाद, खेत-उत्पादित खाद, कम्पोस्ट आदि जैसे कृषि-संबंधी नवाचारों का उपयोग भी उभर रहे हैं। जिले में रासायनिक खेती से होने वाले प्रदूषण से जमीन दूषित हो चुकी हैं जिनको उनके पुराने रूप में लाना जरूरी है।

डॉ. नवल कम्बोज, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र, पदमपुर ने बताया कि प्राकृतिक खेती पद्धतियां मिट्टी की संरचना पोषण और मिट्टी के जैविक कार्बन में सुधार करती हैं। नमी बनाए रखने और जल धारण क्षमता को बढ़ाती हैं। डॉ. दुष्यंत, कृषि अनुसंधान अधिकारी, एटीसी श्रीकरणपुर द्वारा बताया कि प्राकृतिक खेती एक रसायन मुक्त खेती है। इसमें पशुधन एकीकृत प्राकृतिक खेती के तौर-तरीके और भारतीय पारंपरिक ज्ञान में निहित विविध फसल प्रणालियां शामिल हैं। इसका उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना और अधिक जलवायु लचीलापन के साथ किसान के लिए इनपुट लागत को कम करना है।

श्री राजवीर चौधरी, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र ने बताया कि प्राकृतिक खेती फसल विविधीकरण को बढ़ावा देती हैं और प्राकृतिक आवासों को प्रोत्साहित करती हैं जो कृषि जैव विविधता को बढ़ाती हैं। इस मौके पर श्रीगंगानगर जिले के पंचायत समिति से चयनित सखियों एवं सीआरपी द्वारा भाग लिया गया I

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