जयपुर4 घंटे पहले
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बीर के लैंडिंग साइट से हिमाचल प्रदेश के बेहद दुर्गम गांव बड़ा भंगाल तक 52.5 किलोमीटर की दूरी पूरा करने में करीब 3 से 4 दिन का समय लगता है, लेकिन जयपुर के सन्नत सचदेव ने यह दूरी महज 12 घंटे 12 सेकंड में पूरी करके रिकॉर्ड बनाया है।
सन्नत सचदेव ने 18 सितंबर को यह यात्रा पूरी की। सन्नत आर्किटेक्ट और ट्रेल रनर हैं। उन्होंने आर्किटेक्चर की पढ़ाई और पेशे के साथ उन्होंने ट्रेल रनिंग शुरू की और बाद में इसे खेल के साथ-साथ कोचिंग के तौर पर भी अपनाया।
सफर का 95 प्रतिशत हिस्सा ट्रेल पर
उन्होंने बताया कि इस सफर का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा ट्रेल पर था। सफर के दौरान वे मंधेर, थाथी जोट, राजगुंधा, प्लाचक, झोड़ी और पनिहारटू होते हुए करीब 4,700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित थामसर पास पहुंचे।
बाड़ा भंगाल पहुंचने के लिए आमतौर पर राजगुंधा से जुड़े मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन सन्नत ने अपना सफर बीर के लैंडिंग साइट से शुरू किया। इससे रूट की लंबाई और चुनौती दोनों बढ़ गईं। उन्होंने करीब 4,300 मीटर की कुल ऊंचाई हासिल करते हुए 52.5 किलोमीटर का यह सफर पूरा किया।

सफर का 95 प्रतिशत हिस्सा ट्रेल पर, फिर भी हिम्मत नहीं हारे सन्नत।
12 घंटे के अंदर पहुंचने का था लक्ष्य
सन्नत ने बताया कि छह साल से उनके मन में बीर से बड़ा भंगाल तक एक दिन में दौड़कर पहुंचने का विचार था। कई लोगों को यह संभव नहीं लगता था और यही बात उन्हें इसे आजमाने के लिए प्रेरित करती रही। उन्होंने इसे 12 घंटे में पूरा करने का लक्ष्य रखा, हालांकि कठिन परिस्थितियों के कारण उनका समय लक्ष्य से थोड़ा आगे निकल गया और उन्होंने बड़ा भंगाल पहुंचकर यह सफर 12 घंटे 12 सेकंड में पूरा किया।
सन्नत के मुताबिक सड़क पर 52 किलोमीटर की दूरी और पहाड़ों में 52 किलोमीटर की दूरी में बहुत अंतर है। इस रूट पर कई ऐसे हिस्से आए, जहां दौड़ना संभव नहीं था। ताजा बर्फ, लैंडस्लाइड, नदी पार करने और बेहद तकनीकी भूभाग के कारण कई जगह उन्हें पैदल ही आगे बढ़ना पड़ा।

जयपुर के सन्नत सचदेव ने 52 किलोमीटर के पहाड़ी सफर को महज 12 घंटे 12 सेकंंड में पूरा किया।
बीर के दोस्तों और स्थानीय लोगों ने की मदद
सन्नत ने बताया कि इस अभियान के दौरान स्थानीय लोगों और बीर से उनके दोस्तों ने भी उनकी मदद की।
सन्नत का मानना है कि भारत में ट्रेल रनिंग अभी भी अपेक्षाकृत नया खेल है। आमतौर पर लोग इसे ट्रेकिंग या कच्चे रास्ते पर दौड़ने से जोड़ते हैं, जबकि यह एक अलग तरह का एंड्योरेंस स्पोर्ट है। इसमें शारीरिक फिटनेस के साथ पहाड़ी कौशल, नेविगेशन, धैर्य, परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने की क्षमता और प्राकृतिक भूभाग की समझ भी जरूरी होती है।

भारत में ट्रेल रनिंग अभी भी अपेक्षाकृत नया खेल है। यह ट्रैकिंग और कच्चे रास्ते पर दौड़ने से अलग है।
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