हरियाणा सरकार का बड़ा एक्शन : बैंक घोटाले के बाद सरकारी विभागों के 5 साल के खातों की जांच शुरू, वित्त विभाग ने मांगी रिपोर्ट - Haribhoomi

Published on 5 अग॰ 2026

खातों में वित्तीय गड़बड़ियों और विवादों के बाद उठाया बड़ा कदम। राज्य के वित्त विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को अपने आहरण एवं संवितरण अधिकारियों के बैंक खातों की रिपोर्ट 1 सप्ताह के भीतर सौंपने के निर्देश दिए हैं।

Haryana Govt Action

हरियाणा सरकार ने बैंक घोटाले के बाद सरकारी विभागों के खातों की जांच शुरू की।

  • Published: 05 Aug 2026, 06:28 PM IST
  • Last Updated: 05 Aug 2026, 06:28 PM IST

हरियाणा के सरकारी विभागों में बैंक खातों के लेन-देन को लेकर सामने आए विवाद और वित्तीय अनियमितताओं के बाद राज्य सरकार पूरी तरह सख्त हो गई है। प्रदेश के वित्त विभाग ने सभी विभागों के आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) के बैंक खातों की गहन जांच शुरू कर दी है। इसके तहत पिछले पांच वित्तीय वर्षों (2021-22 से 2025-26) का पूरा लेखा-जोखा मांगा गया है। सभी विभागाध्यक्षों को निर्धारित प्रारूप में यह जानकारी जल्द से जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।

तीन श्रेणियों में बंटेंगे बैंक खाते, क्लोजिंग बैलेंस का देना होगा हिसाब 
वित्त विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, सरकार प्रत्येक वित्त वर्ष में 31 मार्च की स्थिति के अनुसार संचालित कुल DDO खातों की जानकारी जुटा रही है। इसमें विभागों को बताना होगा कि वर्ष के दौरान कुल कितना बजट खर्च हुआ और अंतिम तारीख को खातों में कितनी राशि शेष रह गई। इस जांच को पारदर्शी बनाने के लिए खातों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। 
• प्रथम श्रेणी: ऐसे DDO खाते जिनमें 50 प्रतिशत से कम राशि खर्च की गई।
• द्वितीय श्रेणी: 50 प्रतिशत से अधिक लेकिन 99 प्रतिशत तक बजट इस्तेमाल करने वाले खाते।
• तृतीय श्रेणी: शत-प्रतिशत (100%) बजट खर्च करने वाले DDO बैंक खाते।

बजट इस्तेमाल न करने वाले अधिकारियों पर भी रहेगी नजर 
जिन DDO खातों में स्वीकृत राशि में से एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया है, उनका अलग से विस्तृत विवरण मांगा गया है। ऐसे खातों के संबंध में वित्त विभाग ने संबंधित DDO के विभाग का नाम, अधिकारी का पदनाम व नाम, बैंक का नाम, खाता संख्या और 31 मार्च को मौजूद कुल क्लोजिंग बैलेंस की पूरी जानकारी देने को कहा है। सरकार का मकसद यह पता लगाना है कि बजट उपलब्ध होने के बावजूद विकास कार्यों पर पैसा खर्च क्यों नहीं हुआ। 

एक हफ्ते के भीतर मांगी गई हार्ड और सॉफ्ट कॉपी
यह पूरी प्रक्रिया केवल वर्तमान वित्तीय वर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले पांच वर्षों (2021-22 से लेकर 2025-26) का एक तुलनात्मक डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। सभी विभागाध्यक्षों को अपने अधिकृत अधिकारियों के माध्यम से यह जानकारी हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी दोनों प्रारूपों में वित्त विभाग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए मात्र एक सप्ताह का समय तय किया गया है ताकि पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।