Rajasthan News: जयपुर के ऐतिहासिक माणकचौक थाना क्षेत्र में पुराने मकान की तुड़ाई के दौरान दबा हुआ खजाना मिलने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. त्रिपोलिया बाजार स्थित विद्याधर का रास्ता के भवन संख्या 630 में निर्माण कार्य के दौरान बड़ी मात्रा में पुरानी चांदी, सोने के कलश और प्राचीन सिक्के मिलने की बात सामने आई है. आरोप है कि ठेकेदार और मजदूरों ने मकान मालिक को इसकी जानकारी देने के बजाय खजाने को आपस में बांट लिया और उसका कुछ हिस्सा बाजार में बेच दिया. मामले की शिकायत करीब 10 महीने बाद पुलिस तक पहुंची. जांच के बाद पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से 66 किलो 400 ग्राम वजन की चांदी की दो बड़ी सिल्लियां बरामद की हैं.
पुराने भवन को तोड़कर बनाया जाना था नया ढांचा
मामला जयपुर के ऐतिहासिक त्रिपोलिया बाजार से जुड़ा है. यहां विद्याधर का रास्ता स्थित भवन संख्या 630 सेठी परिवार का पुराना मकान बताया जा रहा है. परिवार ने पुराने भवन को तोड़कर उसकी जगह नया निर्माण कराने का फैसला लिया था. भवन की तुड़ाई और निर्माण का काम महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू नाम के ठेकेदार को सौंपा गया था.
काम शुरू होने से पहले मकान मालिक ने ठेकेदार और काम करने वाले लोगों के सामने स्पष्ट शर्त रखी थी कि भवन तोड़ने के दौरान यदि कोई कीमती सामान, पुरानी वस्तु या ऐतिहासिक धरोहर मिलती है तो उसे तुरंत परिवार को सौंपा जाएगा. इसके बावजूद आरोप है कि खजाना मिलने के बाद ठेकेदार और उसके साथियों ने इसकी जानकारी मकान मालिक को नहीं दी.
जमीन और दीवारों के बीच मिला पुराना खजाना
पुलिस जांच में सामने आया कि भवन की तुड़ाई के दौरान जब मजदूर जमीन और पुराने ढांचे के हिस्सों तक पहुंचे तो उन्हें दबा हुआ कीमती सामान मिला. इसमें बड़ी मात्रा में पुरानी चांदी और प्राचीन वस्तुएं शामिल थीं.
आरोप है कि मौके पर मौजूद लोगों ने खजाना मिलने की जानकारी छिपा ली. बताया जा रहा है कि इसमें 10 से 15 भारी चांदी की सिल्लियां, सोने के कलश और करीब 8 से 10 हजार प्राचीन चांदी के सिक्के होने की बात सामने आई. आरोपियों ने कथित तौर पर इस सामान को आपस में बांटना शुरू कर दिया.
10 महीने तक दबा रहा मामला
खजाना मिलने के बाद करीब 10 महीने तक इसकी जानकारी मकान मालिक को नहीं हुई. बाद में जब परिवार को इस बारे में पता चला तो उन्होंने पुलिस से शिकायत की. 15 जुलाई 2026 को माणकचौक थाने में मामला दर्ज कराया गया.
पुलिस के लिए इस मामले की जांच आसान नहीं थी. शिकायत मिलने तक पुराना भवन पूरी तरह तोड़ा जा चुका था और वहां नया निर्माण भी हो गया था. मौके पर ऐसा कोई पुराना साक्ष्य नहीं बचा था, जिससे यह पता लगाया जा सके कि खजाना कहां और कैसे मिला था. इसके अलावा घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस को नहीं मिले.
मोबाइल रिकॉर्ड और लेनदेन से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
साक्ष्य की कमी के बावजूद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. माणकचौक थाना पुलिस और जिला विशेष टीम ने तकनीकी जांच का सहारा लिया. संदिग्ध लोगों के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), आर्थिक गतिविधियों और बैंकिंग लेनदेन की जांच की गई.
जांच के दौरान पुलिस को कुछ लोगों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं. इसके बाद उनसे पूछताछ की गई. पुलिस के मुताबिक पूछताछ में खजाने से जुड़ी जानकारी सामने आई. इसके बाद पुलिस ने महेश मल्होत्रा, जगदीश राजिया, ओमप्रकाश खींची, अनुज अरोड़ा और रजनी मल्होत्रा को गिरफ्तार कर लिया.
66 किलो 400 ग्राम चांदी की दो सिल्लियां बरामद
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 66 किलो 400 ग्राम वजन की चांदी की दो बड़ी बेलनाकार सिल्लियां बरामद की हैं. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि खजाने में शामिल बाकी कीमती सामान कहां गया.
जांच में आरोपियों ने करीब 1500 पुराने चांदी के सिक्के मिलने की बात भी स्वीकार की है. पुलिस के अनुसार इन सिक्कों को आरोपियों ने आपस में बांट लिया और बाद में अलग-अलग जगहों पर बेच दिया.
पुराने सिक्के किन व्यापारियों को बेचे, जांच जारी
अब पुलिस की जांच का अगला फोकस उन लोगों पर है, जिन्होंने आरोपियों से पुराने सिक्के और अन्य सामान खरीदा. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सिक्के किन व्यापारियों को बेचे गए और उनसे कितनी रकम मिली.
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने से खजाने से जुड़े कई और अहम तथ्य सामने आ सकते हैं. साथ ही पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर बेची गई प्राचीन सामग्री का पता लगाकर उसे भी बरामद किया जा सकेगा.
फिलहाल जयपुर के इस पुराने भवन से मिले कथित खजाने ने मामले को और दिलचस्प बना दिया है. पुलिस अब बरामद चांदी के साथ-साथ प्राचीन सिक्कों और सोने के कलश समेत बाकी सामान की तलाश में जुटी है.
यह भी पढ़ें: पुश्तैनी हवेली में करोड़ों का खजाना मिलने का दावा, परिवार का इतिहास भी चर्चा में