'5 लाख सपाटे मारकर 350 KM कांवड़ यात्रा का संकल्प': आगे DJ पीछे ट्रैक्टर चल रहा; 2 महीने में हरिद्वार से रेवाड़ी का सफर - Jhajjar News

Published on 26 जुल॰ 2026

हरियाणा में युवाओं को नशे से दूर करने के लिए एक अखाड़ा संचालक 5 लाख सपाटे मारकर हरिद्वार से कांवड़ ला रहा है। शनिवार रात अखाड़ा संचालक विक्रम धनखड़ (50) की कावड़ यात्रा झज्जर पहुंची। विक्रम इस पूरी यात्रा को सपाटों से ही पूरा कर रहे हैं।

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विक्रम के आगे- आगे DJ तो पीछे ट्रैक्टर चल रहा है। विक्रम का कहना है कि अपने गांव बड़ौली (रेवाड़ी) तक वह सपाटे लगाते हुए ही जाएंगे। हरिद्वार से झज्जर पहुंचते तक करीब 3 लाख सपाटे लगा चुके हैं। विक्रम के साथ एक अन्य युवक भी चल रहा है, जो पूरे सपाटे काउंट करता है।

विक्रम ने बताया कि इस यात्रा में उन्हें करीब 2 महीने का समय लग जाएगा। 11 जून को हरिद्वार से ये यात्रा शुरू हुई थी, अब 11 अगस्त तक गांव पहुंचने की उम्मीद है। गांव जाकर ही शिवालय में गंगाजल अर्पित करेंगे।

सपाटा लगाकर रेवाड़ी की ओर बढ़ते विक्रम धनखड़।

सपाटा लगाकर रेवाड़ी की ओर बढ़ते विक्रम धनखड़।

हरिद्वार से रेवाड़ी, 2 माह के सफर में 5 लाख सपाटे

विक्रम धनखड़ रेवाड़ी के बड़ौली गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि जून के फर्स्ट वीक में ही वे हरिद्वार के लिए निकल गए थे। वहां कांवड़ सजाने के बाद 11 जून को इस यात्रा की शुरुआत की। इसके लिए पहले से ही प्रैक्टिस भी की गई थी।

विक्रम हाथों में ग्लव्ज पहनकर सपाटे लगाते हैं। एक सपाटा लगाने के बाद करीब एक मीटर पैदल चलते हैं। इसके बाद फिर दूसरा सपाटा शुरू करते हैं। शनिवार देर रात उनकी कांवड़ यात्रा झज्जर पहुंची। उन्होंने कहा कि झज्जर तक 3 लाख से भी अधिक सपाटे लगा चुके हैं।

विक्रम ने बताया कि अभी उनकी यात्रा में करीब 15 दिन का समय बचा हैं। पिछले डेढ़ महीने में तीन लाख से अधिक सपाटे लगा चुके हैं। अब इसी टाइम पीरियड में उन्हें 2 लाख सपाटे पूरे करने हैं। अभी करीब 100 किलोमीटर का सफर बचा हुआ है।

विक्रम के पीछे एक ट्रैक्टर भी चल रहा है।

विक्रम के पीछे एक ट्रैक्टर भी चल रहा है।

सपाटा मारकर धार्मिक यात्राएं की

विक्रम धनखड़ ने बताया कि इससे पहले भी सपाटा मारकर धार्मिक यात्राएं पूरी कर चुके हैं। 2025 में सावन के दौरान सपाटा कांवड़ लेकर गांव पहुंचे थे। इसके बाद 1 नवंबर 2025 को गांव बड़ौली से खाटू श्याम जी के लिए सपाटा लगाते हुए ही रवाना हुए।

विक्रम के अनुसार, वहां से सालासर होते हुए दोबारा हरिद्वार तक करीब एक हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी की। समाज से नशा खत्म करने के लिए ही वे कांवड़ लाते हैं।

गांव में अखाड़ा, बच्चों को ट्रेनिंग

विक्रम गांव में ही एक अखाड़ा भी चलाते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले आठ वर्षों से बच्चों और युवाओं को नियमित रूप से कुश्ती का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उसकी ट्रनिंग लिए कई खिलाड़ी विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर बेहतर प्रदर्शन भी कर चुके हैं।

विक्रम का कहना है कि खेल न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनाते हैं, बल्कि अनुशासन और आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं। इसी सोच के साथ वह युवाओं को नशे से दूर रहने और खेलों से जुड़कर स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करते रहते हैं।