भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे में शामिल होंगे 5 नए देश? फ्रांस ने दिल्ली में किया खुलासा

Published on 6 अक्टू॰ 2026

India Middle East Europe Economic Corridor: भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारेक को लेकर हलचल तेज हुई है. अब इस योजना में 5 नए देश शामिल होना चाहते हैं. इसका खुलासा खुद फ्रांस ने किया है. साल के अंत में मंत्रिस्तीय बैठक होने की उम्मीद जताई जा रही है. इससे पहले नए देशों की शामिल होने की इच्छा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 

बता दें कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के लिए गेरार्ड मेस्ट्रेलेट को विशेष दूत बनाया है. मेस्ट्रेलेट 5 से 7 अक्टूबर तक भारत दौरे पर हैं. विशेष दूत गेरार्ड मेस्ट्रेलेट ने मंगलवार को बताया कि मिस्र, लेबनान, ओमान, ग्रीस और साइप्रस ने इस परियोजना में शामिल होने में रुचि दिखाई है. उन्होंने कहा कि आईएमईसी में नए देशों को शामिल करने पर चर्चा के लिए इस साल के अंत में मंत्रिस्तरीय बैठक होने की उम्मीद है.

कैसे होगा फैसला?

दिल्ली दौरे के दौरान मेस्ट्रेलेट आईएमईसी परियोजना को आगे बढ़ाने और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में फ्रांस-भारत सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा कर रहे हैं. मेस्ट्रेलेट ने कहा कि आईएमईसी के मौजूदा आठ सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष ही इस बात का फैसला करेंगे कि कॉरिडोर में नए देशों को शामिल किया जाए या नहीं. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस साल होने वाली मंत्रिस्तरीय बैठक में आईएमईसी के दायरे को बढ़ाने पर फैसला लिया जा सकता है.

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ग्रीस और साइप्रस पूर्ण सदस्य बनने के इच्छुक

मेस्ट्रेलेट ने बताया कि मिस्र, लेबनान और ओमान आईएमईसी के साथ काम करने या इसमें शामिल होने में रुचि रखते हैं. वहीं, ग्रीस और साइप्रस भी इस परियोजना के पूर्ण सदस्य बनने के इच्छुक हैं. मेस्ट्रेलेट के मुताबिक, ये दोनों यूरोपीय देश आईएमईसी में शामिल होने को लेकर खास तौर पर रुचि दिखा रहे हैं.

जॉर्डन और इजरायल पर क्या है स्थिति?

मेस्ट्रेलेट ने जॉर्डन और इजरायल को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि दोनों देश मूल आठ हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल नहीं हैं, लेकिन शुरुआती समझौते में उनका जिक्र किया गया था. उनके मुताबिक, उस समय जॉर्डन और इजरायल के प्रतिनिधि मौजूद नहीं थे, इसलिए उन्होंने समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए थे.

सितंबर 2023 में बना था गलियारा

भारत, अमेरिका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ ने सितंबर 2023 में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) की घोषणा की थी. इसका मकसद जहाज, रेल और दूसरी कनेक्टिविटी सुविधाओं के जरिए भारत को अरब प्रायद्वीप के रास्ते यूरोप से जोड़ना है.

मंत्रिस्तरीय बैठक होना बाकी 

मेस्ट्रेलेट ने बताया कि आईएमईसी बनने के बाद अब तक सदस्य देशों के बीच संचालन समिति स्तर पर बैठकें हुई हैं, लेकिन अभी तक मंत्रिस्तरीय बैठक नहीं हुई है. उन्हें उम्मीद है कि इस साल के अंत तक ऐसी बैठक आयोजित की जाएगी. उन्होंने कहा कि आईएमईसी के भौगोलिक दायरे और सदस्य देशों की संख्या बढ़ाने का फैसला मौजूदा सदस्य देशों के मंत्रियों की बैठक में ही लिया जा सकता है.

मेस्ट्रेलेट ने यह भी कहा कि आईएमईसी को उन देशों और बंदरगाहों के साथ भी सहयोग करना होगा, जो इसके मूल समूह का हिस्सा नहीं हैं. ये देश आगे चलकर पूर्ण सदस्य बनें या सहयोगी सदस्य के तौर पर जुड़ें, उनके साथ मिलकर काम करने के विकल्प तलाशने होंगे. मेस्ट्रेलेट के मुताबिक, जो देश इस परियोजना के साथ सकारात्मक तरीके से काम करना चाहते हैं, उनके साथ सहयोग का सबसे बेहतर रास्ता खोजा जाएगा.

आईएमईसी को बढ़ाने के लिए हो रहे ये काम

आईएमईसी को आगे बढ़ाने के लिए सदस्य देश बंदरगाहों, रेल नेटवर्क, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़े ढांचे पर भी काम कर रहे हैं. इसका उद्देश्य भारत को मध्य पूर्व और यूरोप से जोड़ने वाला एक मजबूत और बहुआयामी कनेक्टिविटी नेटवर्क तैयार करना है.

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