Published: Sunday, October 11, 2026, 8:33 [IST]
दिल्ली में शनिवार 10 अक्टूबर को बड़े पैमाने पर हुई हिरासतों के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। पार्टी ने रविवार (11 अक्तूबर) सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पर समर्थकों को फिर से जुटने का निर्देश दिया है। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है।
CJP की मांग है कि विवादित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को वापस लिया जाए। पार्टी का कहना है कि वोटर लिस्ट में बदलाव की इस प्रक्रिया को लेकर उसकी आपत्तियां अभी खत्म नहीं हुई हैं।
शनिवार को दिल्ली के कई इलाकों में पुलिस ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की थी। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए चेकपॉइंट बनाए गए। कई जगह बैरिकेडिंग की गई और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। आयोजकों के मुताबिक, इसके बावजूद रविवार को जंतर-मंतर पर दोबारा जुटने का आह्वान वापस नहीं लिया गया है। अब सवाल है कि हजारों लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद CJP ने फिर प्रदर्शन क्यों बुलाया है और रविवार को दिल्ली में क्या देखने को मिल सकता है?
हिरासतों के बाद भी प्रदर्शन क्यों?
CJP का आंदोलन वोटर लिस्ट की SIR प्रक्रिया के विरोध से जुड़ा है। पार्टी इस प्रक्रिया को वापस लेने की मांग कर रही है। 10 अक्टूबर की कार्रवाई के बाद भी 11 अक्टूबर सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पर जुटने का आह्वान बताता है कि आयोजक फिलहाल अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
आंदोलन से जुड़े लोगों ने संकेत दिया है कि पुलिस की रोक के बावजूद प्रदर्शन का आह्वान जारी रहेगा। समर्थकों को केंद्रीय प्रदर्शन क्षेत्र की ओर पहुंचने के लिए कहा गया है। जहां पुलिस बैरिकेडिंग के कारण आगे बढ़ना संभव नहीं होगा, वहां छोटे समूहों में जुटने की रणनीति अपनाने की बात कही गई है।
इस रणनीति से पुलिस के लिए भीड़ को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि 11 अक्तूबर को कितने लोग पहुंचेंगे और प्रदर्शन किस रूप में होगा, इसका अनुमान अभी निश्चित तौर पर नहीं लगाया जा सकता।

10 अक्टूबर को दिल्ली में क्या हुआ था?
10 अक्टूबर को दिल्ली-NCR में बड़े स्तर पर सुरक्षा इंतजाम किए गए। प्रशासनिक और संवेदनशील इलाकों के आसपास बिना अनुमति भीड़ जुटने से रोकने के लिए पुलिस ने कई जगह कार्रवाई की। चेकपॉइंट, ट्रांजिट हब और प्रदर्शनकारियों के जुटने वाले स्थानों से 5,000 से ज्यादा लोगों को एहतियातन हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है। इनमें राजनीतिक कार्यकर्ता, नागरिक संगठनों से जुड़े लोग और छात्र संगठनों के प्रतिनिधि शामिल बताए गए।
हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या ज्यादा होने के कारण कुछ स्थानीय खेल परिसरों का इस्तेमाल अस्थायी होल्डिंग सेंटर के तौर पर किया गया। 10 अक्टूबर देर शाम तक पुलिस अधिकारियों के हवाले से करीब 3,000 प्रदर्शनकारियों को प्रक्रिया पूरी करने के बाद रिहा किए जाने की जानकारी दी गई।
हालांकि, CJP के अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका समेत कुछ प्रमुख आयोजकों के हिरासत में रहने का दावा किया गया। इन तीनों को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई है। कुछ डिजिटल पत्रकारों के भी हिरासत में होने की जानकारी दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में भी पहुंचा मामला
इस सुरक्षा कार्रवाई का असर केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा। कुछ मेट्रो स्टेशनों के गेट अस्थायी तौर पर बंद किए जाने, ट्रैफिक डायवर्जन और सार्वजनिक आवाजाही पर पाबंदियों के बाद कानूनी स्तर पर भी सवाल उठे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की रविवार यानी 11 अक्टूबर को विशेष पीठ मामले की तत्काल सुनवाई के लिए निर्धारित है। इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहन का नाम दिया गया है। याचिका में ट्रांजिट सेवाओं को रोकने और लोगों की आवाजाही पर लगी पाबंदियों को चुनौती दिए जाने की बात कही गई है।
इसके अलावा आंदोलन के प्रमुख नेताओं की हिरासत की कानूनी स्थिति और उनके ठिकाने की जानकारी मांगने के लिए हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं दायर किए जाने का दावा है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) की ओर से एहतियाती हिरासतों के पैमाने पर टिप्पणियों के बाद इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान जाने की बात कही गई है। इन न्यायिक और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
आज जंतर-मंतर पर क्या हो सकता है?
रविवार को जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के आसपास पुलिस की निगरानी और बैरिकेडिंग जारी रहने की संभावना जताई गई है। दिल्ली पुलिस का रुख यह बताता है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार बरकरार है, लेकिन संवेदनशील इलाकों में बिना जरूरी अनुमति बड़े जमावड़े की इजाजत नहीं होगी।
दूसरी तरफ, CJP समर्थकों को प्रदर्शन क्षेत्र तक पहुंचने और रास्ता बंद होने पर वैकल्पिक जगहों पर छोटे समूह बनाने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है। मेट्रो सेवाओं के धीरे-धीरे सामान्य होने और कुछ प्रमुख सड़कों के खुलने के बीच पुलिस के सामने सार्वजनिक सुरक्षा और प्रदर्शनकारियों की आवाजाही के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि क्या CJP समर्थक सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में पहुंचेंगे, और क्या पुलिस उन्हें वहां जुटने देगी? इसका जवाब रविवार की जमीनी स्थिति और प्रशासन के आधिकारिक फैसलों से ही मिलेगा।