पिछले दिनों सरकार ने दो नियम बदले, जिनका सीधा असर करोड़ों मोबाइल यूजर्स पर पड़ेगा। पहला फैसला फोन के टेम्पर्ड ग्लास को लेकर है और दूसरा मंथली रिचार्ज से जुड़ा।
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क्या नए बदलाव हुए, क्यों करने पड़े, इससे आपका फायदा या घाटा और पीछे का पूरा खेल समझिए आज के एक्सप्लेनर में…

21 सितंबर को इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय ने स्मार्ट फोन के स्क्रीन प्रोटेक्टर', यानी टेम्पर्ड ग्लास को BIS स्टैंडर्ड मार्क के दायरे में शामिल कर लिया है। ‘कंपल्सरी रजिस्ट्रेशन ऑर्डर’ की लिस्ट में स्मार्टफोन, लैपटॉप, चार्जर, LED टीवी, माइक्रोवेव ओवन, प्रिंटर और सेट-टॉप बॉक्स जैसे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट पहले से हैं। इसी लिस्ट में 66वें आइटम के बतौर टेम्पर्ड ग्लास को जोड़ा गया है।
नोटिफिकेशन के मुताबिक…
- अब स्क्रीन प्रोटेक्टर' बनाने, विदेशों से इम्पोर्ट करने और बेचने के लिए उन पर भारतीय मानक IS 19348:2025 की जरूरत होगी। इसके लिए कंपनियों को भारत के ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स, यानी BIS के तहत रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।
- टेम्पर्ड ग्लास के लिए IS 19348:2025 और BIS स्टैंडर्ड मार्क तभी मिलेगा, जब उसकी क्वालिटी, साइज, मजबूती और कोटिंग जैसी चीजें भारतीय मानकों के मुताबिक होंगी।
- इसकी तैयारी के लिए कंपनियों को 31 मार्च 2027 तक का समय मिला है। 1 अप्रैल 2027 से सिर्फ BIS स्टैंडर्ड मार्क वाले टेम्पर्ड ग्लास ही बिकेंगे।

टेम्पर्ड ग्लास के पैकेज पर इस तरह का स्टैंडर्ड मार्क दिखेगा।
ये बदलाव क्यों हुआ?
सरकार ने इस बदलाव की वजह नहीं बताई। मीडिया रिपोर्ट्स और उद्योग संगठन कुछ तर्क जरूर दे रहे हैं…
- घटिया टेम्पर्ड ग्लास टूटने पर नुकीले टुकड़ों में बिखर सकता है, जिससे उंगलियां कट सकती हैं।
- कई सस्ते, बिना ब्रांड के प्रोटेक्टर झटका नहीं सोख पाते, इससे फोन का डिस्प्ले टूट जाता है।
- 9H, मिलिट्री ग्रेड, प्रीमियम टेम्पर्ड जैसे दावे होते हैं। क्वालिटी तय करने का कोई पैरामीटर नहीं है।
इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) के मुताबिक, ‘भारत में हर साल 5 करोड़ टेम्पर्ड ग्लास की खपत है, जिनमें से 90% से ज्यादा विदेशों से इम्पोर्ट होते हैं। कांच के ग्लास को 'टेम्पर्ड ग्लास' कह कर बेचा जाता है। जबकि इनकी सही से टेम्परिंग नहीं की जाती।’
दरअसल, टेम्परिंग एक ऐसी खास थर्मल और केमिकल प्रोसेस है, जिससे साधारण कांच भी मजबूत और टिकाऊ बन जाता है।
नए नियम से क्या फायदा होगा?
BIS वाले टेम्पर्ड ग्लास मजबूती के सरकारी मानकों को पूरा करेंगे। इससे उनके मोबाइल का डिस्प्ले सुरक्षित रहेगा। साथ ही टेम्पर्ड ग्लास की ड्यूरेबिलिटी भी बढ़ेगी।
रेगुलेशन के मुताबिक, टेम्पर्ड ग्लास ऐसे हों, जो फोन गिरने पर झटके का असर फोन पर न आने दें और टूटने पर ग्लास से किसी को चोट न लगे। ग्लास में ब्लू-लाइट फिल्टर और ग्लेयरिंग, यानी आंख पर पड़ने वाली चमक भी नहीं होनी चाहिए।
अमेरिका की कंसल्टिंग फर्म GMA लैब्स के मुताबिक, नए रेगुलेशन से 12 से 16 हजार करोड़ रुपए की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ सकती है। करीब 2000 करोड़ का GST कलेक्शन होगा और लगभग 60 हजार लोगों को रोजगार मिल सकता है।
कोई नुकसान भी है?
2 चिंताएं हैं…
1. टेम्पर्ड ग्लास की कीमतें बढ़ सकती हैं
- फिलहाल फोन एसेसरीज जैसे- मोबाइल चार्जर बैंक, वायर्ड इयर फोन, फोन के कवर या टेम्पर्ड ग्लास वगैरह के व्यापार का एक बड़ा 'ग्रे मार्केट' है। यानी, भारी तादाद में एसेसरीज बिना किसी हालमार्क के बनाई या विदेशों से इम्पोर्ट की जाती हैं। इसीलिए ये हर तरह की क्वालिटी और प्राइस रेंज में उपलब्ध हैं।
- ये पहली बार है कि फोन से जुड़ी किसी एसेसरी को BIS स्टैंडर्ड मार्क के दायरे में लाया गया है। जानकारों का कहना है कि BIS रजिस्ट्रेशन के खर्च और मानकों के मुताबिक, टेम्पर्ड ग्लास बनाने से इनकी लागत ज्यादा आएगी और इसका बोझ आम स्मार्ट फोन यूजर्स पर पड़ेगा।
- BIS के तहत किसी प्रोडक्ट का रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए सालाना 1 हजार रुपए रजिस्ट्रेशन फीस, 25 हजार रुपए प्रोसेसिंग फीस लगती है। इसके बाद लैब में प्रोडक्ट का टेस्ट होता है। हर एक्स्ट्रा टेस्ट के लिए भी 10 हजार रुपए लगते हैं।
2. एक कंपनी की मोनोपॉली का खतरा
- भारत में फिलहाल ऑप्टिमस इन्फ्राकॉम लिमिटेड नाम की कंपनी ही जेनुइन टेम्पर्ड ग्लास बनाती है। ऑप्टिमस, ब्रिटेन की कंपनी CMF, NOTHING के साथ पार्टनरशिप में है। ऑप्टिमस का दावा है कि ये भारत की पहली जेनुइन, यानी असली टेम्पर्ड ग्लास बनाने वाली कंपनी है।
- 13 अगस्त 2025 को ऑप्टिमस ने RhinoTech ब्रांडनेम वाला टेम्पर्ड ग्लास लॉन्च किया था। इसमें अमेरिकी कंपनी Corning का बना ग्लास इस्तेमाल किया गया है। पैकेजिंग पर 'Engineered by Corning' लिखा हुआ है।
- Rhinotech की वेबसाइट पर अभी सिर्फ ऐपल के आईफोन के टेम्पर्ड ग्लास बिक्री के लिए मौजूद हैं, जिनकी कीमत 1999 से 2499 रुपए तक है।
- कंपनी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अशोक गुप्ता के मुताबिक, प्लांट की सालाना क्षमता 2.5 करोड़ टेम्पर्ड ग्लास बनाने की है। दूसरे फेज में हर साल 2 करोड़ यूनिट्स का प्रोडक्शन बढ़ाया जाएगा। ऐसे में भारत के टेम्पर्ड मार्केट में इसी कंपनी की मोनोपॉली बनने की आशंका है।

30 अगस्त 2025 को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स-IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नोएडा में 870 करोड़ रुपए की लागत से तैयार ऑप्टिमस के टेम्पर्ड ग्लास प्लांट का उद्घाटन किया।

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी TRAI ने 22 सितंबर को नया रेगुलेशन जारी किया है। इसके तहत सिर्फ वॉइस कॉल और SMS Only वाले टैरिफ वाउचर से जुड़े 3 नियम लागू करने को कहा है…
- जिस तरह 30 दिन या उससे कम दिनों के ‘वॉइस, SMS और डेटा’ वाले रिचार्ज प्लान होते हैं, उसी तरह कंपनियां दामों में 'उचित कटौती' करके सिर्फ ‘वॉइस कॉल और SMS’ वाले प्लान भी लाएंगी।
- रिचार्ज की वैलिडिटी पूरे एक महीने होगी, न कि 28 दिन।
- कम से कम एक वॉइस-SMS वाउचर एक महीने से ज्यादा, यानी लंबी वैलिडिटी का भी होना चाहिए।
ये बदलाव क्यों हुए?
TRAI के मुताबिक, कंपनियों के पास बिना डेटा वाले सिर्फ वॉइस-SMS रिचार्ज प्लान बेहद कम हैं। जो हैं भी, वो लंबी वैलिडिटी वाले हैं। इससे कम आय वाले यूजर्स, या जो बिना डेटा वाले, कम टाइम पीरियड के प्लान लेना चाहते हैं, उनके पास ज्यादा ऑप्शन नहीं बचे थे। नए नियमों का मकसद मोबाइल यूजर्स को 'कॉलिंग और SMS ओनली' और 'कम पीरियड' के विकल्प देना है।
किसे फायदा होगा?
- केवल कॉलिंग करने वाले यूजर्स: जो स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करते या जिन्हें इंटरनेट/डेटा की कोई जरूरत नहीं होती।
- कम आय वाले यूजर्स: जो एक बार में ज्यादा पैसे खर्च करके 84 दिन या पूरे साल का रिचार्ज नहीं करा सकते।
- दो सिम रखने वाले यूजर्स: जो अपने दूसरे नंबर को केवल इनकमिंग या कॉलिंग के लिए एक्टिव रखना चाहते हैं।
इसमें भी एक बात ध्यान रखने वाली है कि वॉइस-SMS-only प्लान में TRAI ने 'उचित कटौती' की बात कही है, लेकिन 'उचित' का मतलब क्या है, ये TRAI ने साफ नहीं किया है।

किसे फायदा नहीं होगा?
बीजेपी नेता राघव चड्ढा ने 27 सितंबर को कहा है, 'मुझे खुशी है कि भारत सरकार ने आपकी सभी मांगों को स्वीकार कर लिया है। अब 28 दिन के बजाय, 30 दिन का रिचार्ज प्लान भी दिया जाएगा, यानी अब आपको साल में 13 बार नहीं, सिर्फ 12 बार मंथली रिचार्ज कराना होगा।'
राघव चड्ढा का ये दावा पूरी तरह सही नहीं है, कि सरकार ने सभी की 30 दिनों के प्लान की मांग स्वीकार कर ली है…
- दरअसल, ज्यादातर यूजर्स अनलिमिटेड डेटा और 28 दिन, 56 दिन या 84 दिन की वैलिडिटी वाले वाउचर लेते हैं। यानी हर महीने 2 दिन कम का प्लान मिलता है।
- अगर महीने का रिचार्ज करवाया जाए, तो इन अनलिमिटेड डेटा पैक के लिए साल में 13 बार रिचार्ज करवाना होगा। इन लोगों को नए रेगुलेशन से कोई राहत नहीं है।
- देश के दोनों प्रमुख मोबाइल ऑपरेटर- एयरटेल और जियो पर 30 दिन के भी अनलिमिटेड डेटा और कॉलिंग प्लान हैं, लेकिन ये उतने ही डेटा और कॉलिंग वाले 28 दिन के वाउचर से महंगे हैं।
- मिसाल के लिए एयरटेल के अनलिमिटेड 5G + 2GB प्रति दिन वाले 28 दिन के पैक की कीमत 349 रुपए है, जबकि इसी डेटा बंडल के 30 दिन के वाउचर की कीमत 379 रुपए है। यानी 30 रुपए ज्यादा।
- अगर इन वॉइस+SMS+डेटा वाले वाउचर के लिए बिना रेट बढ़ाए, 30 दिन की वैलिडिटी का नियम आए, तो साल में एक महीने का रिचार्च या करीब 360 रुपए की बचत होती।
- हालांकि वाउचर की कीमत तय करने का अधिकार कंपनियों के पास होता है। इसलिए उन्हें 30 दिन वाले अनलिमिटेड प्लान की कीमत बढ़ाने से नहीं रोका जा सकता।

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