पंचकूला में हैवी मशीनरी से इस प्रकार तैयार हुई हरियाणा के सरकारी ऑफिस की पहली स्ट्रक्चर बिल्डिंग।
हरियाणा में सरकारी भवनों के निर्माण में अब स्टील स्ट्रक्चर तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो गया है। पंचकूला के सेक्टर-1 स्थित हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) का नया ऑफिस भवन इसी तकनीक से तैयार किया गया है। करीब 1 लाख वर्गफीट क्षेत्र में बनी इस
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बिल्डिंग की खास बात यह है कि इसमें पारंपरिक RCC यानी सीमेंट-कंक्रीट स्ट्रक्चर की बजाय रेडिमेड स्टील स्ट्रक्चर लगाया गया है। आर्किटेक्ट के अनुसार सामान्य कंक्रीट बिल्डिंग तैयार करने में करीब 3 साल तक लग सकते हैं, जबकि स्टील स्ट्रक्चर में यह काम करीब डेढ़ साल में पूरा हो गया।

पंचकूला में निर्माण के दौरान लगी मशीनरी।
साइट पर केवल बेस तैयार
स्टील बिल्डिंग की सबसे बड़ी खासियत निर्माण की गति है। इसके लिए स्टील के स्ट्रक्चर और प्लेट पहले से तैयार होकर साइट पर आते हैं। जब तक बिल्डिंग का बेस तैयार किया जाता है, तब तक ऊपर के हिस्से के लिए स्ट्रक्चर तैयार रहता है। इसके बाद साइट पर इसे तेजी से असेंबल किया जाता है।
इस बिल्डिंग में 10 MM से 25 MM तक की स्टील प्लेटों का इस्तेमाल किया गया है। हाई-टेंसाइल मैटीरियल होने के कारण इसकी क्षमता अधिक बताई गई है। निर्माण में सामग्री की बर्बादी भी कम होती है।

निर्माण के दौरान कुछ ऐसे तैयार किया गया स्ट्रक्चर।
अब जानिए बिल्डिंग में सुविधाएं और मॉडल…
- विशाल कॉरपेट एरिया: HRERA की इस बिल्डिंग में करीब 1 लाख वर्गफीट एरिया है। इसमें 2 बेसमेंट और 6 मंजिल पर हॉल के अलावा 3 आधुनिक बैंक्वेट हॉल और 4 हाई-टेक कॉन्फ्रेंस रूम बनाए गए हैं। भवन को आधुनिक कार्यालय की जरूरतों के अनुसार तैयार किया गया है।
- ग्रीन और सस्टेनेबल डिजाइन: सर्दियों में पर्याप्त धूप और गर्मियों में शीतलता बनाए रखने के लिए विशेष डिजाइन अपनाया। सोलर पैनल, लिफ्ट और हाईटेक डिजाइन पॉइंट भी शामिल हैं।
- इंजीनियर्ड मॉडल पर निर्माण: एचएसआईआईडीसी द्वारा ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मॉडल पर निर्माण किया गया, जिससे बजट और गुणवत्ता नियंत्रित रही। फ्लाईऐश ईंटों की जगह हल्के एएसी ब्लॉक और फ्लाईऐश ब्लॉक का प्रयोग किया गया।

स्टली बिल्डिंग निर्माण के दौरान तैयार किया गया स्ट्रक्चर।
स्टील बिल्डिंग के 5 बड़े फायदे…
- भूकंपरोधी और सुरक्षित: स्टील स्ट्रक्चर हल्का और मजबूत होने के कारण भूकंप के दौरान पारंपरिक भारी स्ट्रक्चर की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। स्टील स्ट्रक्चर के साथ पर्यावरण के लिहाज से भी इसे बेहतर विकल्प बताया जा रहा है।
- निर्माण की रफ्तार कई गुना तेज: स्ट्रक्चर पहले से तैयार होकर साइट पर आता है, इसलिए साइट पर असेंबली तेजी से होती है और समय की काफी बचत होती है।
- सीमेंट-ईंट का इस्तेमाल बेहद कम: पारंपरिक RCC निर्माण की तुलना में स्टील स्ट्रक्चर में ईंट-सीमेंट का काम काफी कम हो जाता है, जिससे मजदूरी और निर्माण प्रक्रिया दोनों सरल होती हैं।
- हल्का लेकिन मजबूत स्ट्रक्चर: स्टील का स्ट्रक्चर वजन में अपेक्षाकृत हल्का होने के बावजूद मजबूत और टिकाऊ होता है। बड़े स्पैन और ऊंची इमारतों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
- समय के साथ लागत में बचत: तेज निर्माण, कम साइट वर्क और कम मैनपावर की जरूरत के कारण प्रोजेक्ट की कुल लागत और निर्माण अवधि को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

इसी मॉडल पर तैयार होंगे सरकारी भवन
स्टील स्ट्रक्चर तकनीक अब केवल HRERA भवन तक सीमित नहीं है। ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 9 मंजिला स्टील हॉस्टल तैयार किया जा रहा है। हरियाणा के गन्नौर में करीब 2 हजार 400 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट में भी स्टील स्ट्रक्चर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका निर्माण नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी कर रही है।
सरकारी के साथ गैर सरकारी कंपनियां भी इस मॉडल को अपना चुकी हैं। पानीपत में 11 मंजिला होटल इसी मॉडल पर तैयार हो रहा है। वहीं 5 कंपनियां अपने एक्सपोर्ट हाउस इसी मॉडल से तैयार करवा चुकी हैं। पंजाब के पटियाला में बड़ा प्राइवेट अस्पताल और कसौली में फाइव स्टार होटल इसी तर्ज पर बन रहा है।
37 साल पहले की थी आर्किटेक्चर की पढ़ाई
आर्किटेक्ट प्रवीन चौपड़ा एसोसिएट्स, चंडीगढ़ सेक्टर-11 निवासी हैं। उन्होंने करीब 37 साल पहले आर्किटेक्चर की डिग्री हासिल की थी। जिन्होंने HRERA भवन की स्टील बिल्डिंग के लिए डिजाइन किया है। पंचकूला में तैयार HRERA भवन का निर्माण कुरुक्षेत्र की एजेंसी द्वारा किया गया है।