रखाइन11 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

म्यांमार और बांग्लादेश से हर साल हजारों रोहिंग्या बेहतर जीवन की तलाश में दूसरे देशों का सफर करते हैं। (फाइल फोटो)
म्यांमार में हिंसा से बचकर भाग रहे 500 से ज्यादा लोगों के समुद्र में लापता होने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र की दो एजेंसियों के मुताबिक, म्यांमार के तट के पास खराब मौसम में दो नावें गायब हो गईं। इनमें सवार ज्यादातर लोग रोहिंग्या समुदाय के थे।
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने संयुक्त बयान में बताया कि दोनों नावें जून के आखिर में म्यांमार के पश्चिमी रखाइन राज्य से रवाना हुई थीं।
पहली नाव में करीब 250 लोग सवार थे। रवाना होने के कुछ ही समय बाद उससे संपर्क टूट गया। दूसरी नाव में करीब 280 यात्री सवार थे और माना जा रहा है कि वह 8 जुलाई को म्यांमार के अयेयारवाडी तट के पास डूब गई।
रोहिंग्या लोगों के पास किसी देश की नागरिकता नहीं
रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन राज्य का एक मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय है। दशकों से यह समुदाय सरकारी उत्पीड़न, हिंसा और भेदभाव का सामना कर रहा है।
म्यांमार की बौद्ध बहुसंख्यक सरकार और वहां के स्थानीय लोग रोहिंग्याओं को म्यांमार का मूल निवासी नहीं मानते। उनका दावा है कि ये लोग ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बांग्लादेश (तत्कालीन बंगाल) से आए अवैध अप्रवासी हैं। उन्हें आधिकारिक तौर पर 'बंगाली' कहकर पुकारा जाता है।

इंडोनेशिया के बांदा आचे में एक सरकारी इमारत के बेसमेंट में बने अस्थायी शरण शिविर में रोहिंग्या शरणार्थी बच्चे।
रोहिंग्या समुदाय का कहना है कि वे रखाइन क्षेत्र में आठवीं सदी या उससे भी पहले से रह रहे हैं और वे वहीं के मूल निवासी हैं। साल 1982 में रोहिंग्याओं को नागरिकता देने से इनकार कर दिया गया। इसके कारण वे बिना किसी देश के नागरिक बन गए। उन्हें बुनियादी अधिकार जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा और शादी करने तक की आजादी नहीं है।
करीब 12 लाख रोहिंग्या फिलहाल बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। ये लोग म्यांमार की सेना की हिंसा से बचकर वहां पहुंचे थे। हाल के वर्षों में अमेरिका और अन्य देशों की विदेशी सहायता में कटौती के कारण इन शिविरों में खाद्य राशन भी कम कर दिया गया है।
रोहिंग्या शरणार्थियों के पास सुरक्षित तरीके से म्यांमार लौटने का कोई रास्ता नहीं है। 2017 में म्यांमार की सेना पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा करने के आरोप लगे थे, जिसे कई देशों ने नरसंहार (जेनोसाइड) माना है।
जो रोहिंग्या अब भी म्यांमार में रह रहे हैं, उन्हें कड़ी पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें से कई लोग नजरबंदी शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

मलेशिया पहुंचने के लिए उठा रहे जानलेवा जोखिम
आमतौर पर रोहिंग्या इस मौसम में समुद्र के रास्ते यात्रा करने से बचते हैं, क्योंकि मानसून के दौरान समुद्र बेहद खतरनाक हो जाता है।
हालांकि म्यांमार में हिंसा और बांग्लादेश के भीड़भाड़ वाले शरणार्थी शिविरों में खराब हालात के कारण रोहिंग्या समुदाय के लोग वर्षों से जर्जर लकड़ी की नावों में बैठकर मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों तक पहुंचने की कोशिश करते रहे हैं।
खराब परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में रोहिंग्या लोग जर्जर नावों के जरिए मलेशिया पहुंचने की कोशिश करते हैं। इस दौरान हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें नवजात बच्चे, बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कई बार स्थानीय समुद्री एजेंसियां संकट में फंसी नावों की मदद भी नहीं करतीं।

29 जनवरी 2025 को इंडोनेशिया के ल्यूगे बीच पर नाव में बैठे नए पहुंचे रोहिंग्या शरणार्थी। स्थानीय प्रशासन ने उन्हें किनारे उतरने की अनुमति नहीं दी और नाव में ही रहने का आदेश दिया था।
दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में एक
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2025 में अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में करीब 900 रोहिंग्या शरणार्थी मारे गए या लापता हो गए थे। यह दुनिया में शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए सबसे खतरनाक समुद्री मार्ग माना जाता है।
IOM और UNHCR ने कहा कि यह संभावित हादसा दिखाता है कि रोहिंग्या संकट का अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे लोगों की मदद बढ़ाने की अपील की।
एजेंसियों ने कहा कि दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में से एक पर और लोगों की जान जाने से रोकने के लिए खोज एवं बचाव अभियान मजबूत करना, शरण देने की व्यवस्था बेहतर करना और मानव तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।
UNHCR के अनुसार, 2025 में 6,500 से ज्यादा रोहिंग्या समुद्र के रास्ते भागने की कोशिश कर रहे थे। इनमें से करीब 900 लोग मारे गए या लापता हो गए। यह रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए अब तक का सबसे घातक साल था और दुनिया के किसी भी प्रमुख शरणार्थी समुद्री मार्ग पर सबसे अधिक मृत्यु दर दर्ज की गई।

21 दिसंबर 2025 को ली गई इस तस्वीर में बांग्लादेश के उखिया स्थित कुतुपालोंग शरणार्थी शिविर का एरियल सीन दिखाई दे रहा है। म्यांमार से पलायन कर चुके लाखों रोहिंग्या शरणार्थी इसी शिविर में रहते हैं।
भारत में कितने रोहिंग्या हैं?
- UNHCR (संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक भारत में करीब 22,700 रोहिंग्या शरणार्थी और शरण मांगने वाले मौजूद थे।
- भारत सरकार का आधिकारिक आंकड़ा इससे अलग है। केंद्र सरकार लंबे समय से कहती रही है कि देश में करीब 40 हजार रोहिंग्या रह रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या अवैध रूप से रह रही है।
- 2017 में मोदी सरकार ने राज्यसभा में बताया था कि भारत में करीब 40 हजार रोहिंग्या हैं और इनमें से लगभग 16,500–18,000 लोग ही UNHCR में पंजीकृत हैं।
- सरकार के अनुसार, रोहिंग्या मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हैदराबाद (तेलंगाना) और मणिपुर में रहते हैं।
- भारत सरकार ने कई बार स्पष्ट किया है कि देश में रोहिंग्या या बांग्लादेशी नागरिकों के लिए कोई आधिकारिक शरणार्थी शिविर नहीं है।
- केंद्र सरकार समय-समय पर राज्य सरकारों के साथ मिलकर अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं की पहचान और उन्हें वापस भेजने (डिपोर्टेशन) की कार्रवाई करती रही है।
- ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) का भी अनुमान है कि भारत में करीब 40 हजार रोहिंग्या विभिन्न राज्यों में बस्तियों और अस्थायी शिविरों में रहते हैं।
- जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या आबादी को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं। आम तौर पर 5 हजार से 10 हजार के बीच रोहिंग्या वहां रहने की बात विभिन्न रिपोर्टों में कही गई है।
नोट: रोहिंग्याओं की संख्या को लेकर भारत सरकार और UNHCR के आंकड़े अलग-अलग हैं। UNHCR केवल अपने यहां पंजीकृत शरणार्थियों और शरण मांगने वालों की संख्या बताता है, जबकि भारत सरकार का अनुमान देश में मौजूद कुल रोहिंग्या आबादी पर आधारित है।
.
खबरें और भी हैं...
LIVE
होर्मुज में भारतीय नाविकों की तैनाती पर रोक: सरकार ने आदेश जारी किए; हमलों में 14 भारतीयों की मौत के बाद फैसला
0:52- कॉपी लिंक
शेयर
वर्ल्ड अपडेट्स: न्यूजीलैंड में 5.9 तीव्रता का भूकंप: सुनामी की चेतावनी बाद में वापस ली गई

- कॉपी लिंक
शेयर
जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री के बाद अब रक्षामंत्री को भी हटाया: ड्रोन हमलों से रूस को पछाड़ा था, फैसले के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे

- कॉपी लिंक
शेयर
कनाडा में जंगल की आग के बीच फंसी ट्रेन: ट्रक से भिड़ंत, कर्मचारियों ने पैदल भागकर जान बचाई; घटना का वीडियो वायरल
- कॉपी लिंक
शेयर