बिहार सरकार भले ही सरकारी स्कूलों में बेहतर बुनियादी सुविधाओं का दावा करती हो, लेकिन खगड़िया में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
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खगड़िया सदर प्रखंड के मथुरापुर मध्य विद्यालय में 525 छात्र-छात्राओं के लिए पर्याप्त कमरे नहीं हैं। कमरों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
स्कूल के पुराने भवन के कई कमरे वर्षों से जर्जर हैं और अब पढ़ाई के लिए अनुपयोगी हो चुके हैं। इसके चलते पहली से छठी कक्षा तक के बच्चों को बरामदे और चदरा के शेड में बैठकर पढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है।

7-8 साल से बनी है समस्या, विभाग को कई बार लिखा पत्र
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ओम बत्ती कुमारी ने बताया कि स्कूल में 525 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ दो-तीन कमरे ही उपयोग के लायक हैं। बाकी कमरे बेहद जर्जर हालत में हैं। उन्होंने बताया कि यह समस्या पिछले करीब सात-आठ वर्षों से बनी हुई है। कमरों के निर्माण और मरम्मत के लिए विभाग को कई बार पत्र लिखा गया और अधिकारियों से भी बात की गई, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
बारिश में टपकती है छत, शेड में भीग जाता है पढ़ाई का सामान
जर्जर भवन की छत और दीवारें क्षतिग्रस्त हैं। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने लगता है। ऐसे में बच्चों को बरामदे और चदरा शेड में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। शेड में बारिश का पानी दीवार से टकराकर अंदर तक पहुंच जाता है, जिससे ब्लैकबोर्ड और अन्य पढ़ाई की सामग्री भीग जाती है।
गर्मी में चदरा शेड के अंदर बच्चों को उमस और तेज गर्मी झेलनी पड़ती है, जबकि ठंड और बारिश में खुले या असुरक्षित स्थानों पर पढ़ाई करना परेशानी का कारण बनता है।

छात्र बोला- 'रूम की कमी है, इसीलिए...'
विद्यालय के एक छात्र ने बताया कि स्कूल में कमरों की कमी है और जो कमरे हैं, उनमें से कई टूटे-फूटे हैं। छात्र के अनुसार, चदरा वाले कमरे में पढ़ने पर बहुत गर्मी लगती है और स्कूल में बिजली की भी व्यवस्था नहीं है।
कमरों की कमी के कारण पूछे जाने पर छात्र ने साफ कहा, “रूम की कमी है, इसीलिए।” जर्जर कमरे की स्थिति बताते हुए उसने कहा कि छत टूटी हुई है और बारिश में पानी भी चूता है।

चार कमरों की मंजूरी, लेकिन जमीन बनी अड़चन
प्रधानाध्यापिका ने बताया कि विभागीय स्तर पर चार नए कमरों के निर्माण की बात सामने आई है, लेकिन जमीन से जुड़ी समस्या के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है। अधिकारियों ने स्कूल की जमीन का खाता-खसरा उपलब्ध कराने को कहा है, लेकिन विद्यालय के पास इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।

रेलवे की जमीन पर संचालित है स्कूल, NOC का इंतजार
जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेंद्र गौड़ ने बताया कि मथुरापुर का यह विद्यालय रेलवे की जमीन पर संचालित हो रहा है। इसी वजह से नए कमरों के निर्माण में परेशानी आ रही है। उन्होंने कहा कि रेलवे से एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) मिलने के बाद कमरों का निर्माण कराया जा सकेगा। इस दिशा में विभाग की ओर से प्रयास किया जा रहा है।