Prasanna Kumar Chaudhary MLA Fund Report: चार वर्षों में 56 विकास कार्य प्रस्तावित, सभी को मिली स्वीकृति

Published on 14 जुल॰ 2026

Prasanna Kumar Chaudhary MLA Fund Report में शामली विधानसभा क्षेत्र की चार वित्तीय वर्षों की तस्वीर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है। उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास विभाग की विधायकवार कार्य रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2023-24 में शामली विधायक प्रसन्न कुमार चौधरी के नाम से 56 विकास कार्यों की संस्तुति दर्ज की गई और सभी 56 प्रस्तावों को स्वीकृति मिली। इसके बाद 2024-25, 2025-26 और 2026-27 की उपलब्ध आधिकारिक रिपोर्टों में क्रम संख्या 10 पर उनके नाम के सामने किसी नए अनुशंसित, स्वीकृत, लंबित या निरस्त कार्य की संख्या दर्ज नहीं दिखाई गई।

इस आधार पर चारों रिपोर्टों में प्रसन्न कुमार चौधरी के नाम से कुल 56 विकास कार्य दर्ज हैं और सभी को स्वीकृति मिली। तकनीकी रूप से उनकी स्वीकृति दर 100 प्रतिशत बनती है। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि विधायक निधि से चार वर्षों में केवल इतने ही रुपये खर्च हुए या सभी 56 काम पूर्ण हो चुके हैं। उपलब्ध PDF रिपोर्टें रुपये में आवंटन और वास्तविक खर्च के बजाय अनुशंसित, लंबित, स्वीकृत और निरस्त कार्यों की संख्या दिखाती हैं।

प्रसन्न कुमार चौधरी शामली विधानसभा क्षेत्र संख्या 10 से राष्ट्रीय लोक दल के विधायक के रूप में दर्ज हैं। UttarPradesh.org पर उपलब्ध उनके राजनीतिक परिचय के अनुसार वह मार्च 2022 में पहली बार उत्तर प्रदेश की अठारहवीं विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी और तत्कालीन विधायक तेजेंद्र सिंह निर्वाल को 7,107 मतों के अंतर से हराया था।

प्रसन्न कुमार चौधरी विधायक निधि का चार वर्षों का विवरण

वित्तीय वर्षअनुशंसित कार्यकुल लंबित कार्यकुल स्वीकृत कार्यनिरस्त कार्यस्वीकृति प्रतिशत
2023-24560560100%
2024-250 या रिपोर्ट में प्रविष्टि नहीं000लागू नहीं
2025-260 या रिपोर्ट में प्रविष्टि नहीं000लागू नहीं
2026-270 या रिपोर्ट में प्रविष्टि नहीं000लागू नहीं
कुल560560100%

यहां “0 या रिपोर्ट में प्रविष्टि नहीं” का अर्थ है कि संबंधित आधिकारिक विधायकवार PDF की क्रम संख्या 10 वाली पंक्ति में कोई संख्यात्मक विवरण दर्ज नहीं है। इसे किसी अन्य वित्तीय रिपोर्ट के बिना सीधे “विधायक निधि खर्च नहीं हुई” नहीं कहा जा सकता।

Prasanna Kumar Chaudhary MLA Fund Report: 2023-24 में सभी 56 काम स्वीकृत

वित्तीय वर्ष 2023-24 की विधायकवार रिपोर्ट में क्रम संख्या 10 पर प्रसन्न कुमार चौधरी का नाम, शामली विधानसभा क्षेत्र और नोडल जनपद शामली दर्ज है। उनके नाम के सामने 56 अनुशंसित और 56 स्वीकृत कार्य दिखाए गए हैं।

रिपोर्ट के प्रारूप के अनुसार ये सभी कार्य स्वीकृत श्रेणी में दर्ज हैं। कोई प्रस्ताव स्वीकृति के लिए लंबित नहीं था और कोई कार्य निरस्त भी नहीं हुआ। इस तरह वर्ष 2023-24 में उनके अनुशंसित कार्यों की स्वीकृति दर शत-प्रतिशत रही।

2023-24 के प्रमुख आंकड़े

विवरणकार्यों की संख्या
कुल अनुशंसित कार्य56
स्वीकृति के लिए लंबित0
कुल स्वीकृत कार्य56
निरस्त कार्य0
स्वीकृति दर100 प्रतिशत

यह स्थिति प्रशासनिक स्तर पर मजबूत दिखाई देती है। विधायक द्वारा भेजे गए सभी प्रस्ताव योजना के मानकों के अनुरूप पाए गए और उन्हें स्वीकृति मिली। सामान्यतः विधायक निधि के प्रस्ताव भूमि, तकनीकी आगणन, कार्य की पात्रता और उपलब्ध बजट जैसी जांचों से गुजरते हैं। ऐसे में सभी प्रस्तावों की स्वीकृति यह संकेत देती है कि संबंधित वर्ष में भेजी गई संस्तुतियां प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर स्वीकार्य थीं।

हालांकि, इस रिपोर्ट से यह नहीं पता चलता कि 56 कार्य किस गांव, वार्ड या क्षेत्र में प्रस्तावित हुए थे। इसमें कार्यों के नाम, उनकी स्वीकृत लागत, निर्माण एजेंसी, भुगतान और पूर्णता की स्थिति भी उपलब्ध नहीं है।

2024-25 में प्रसन्न कुमार चौधरी के नाम के सामने कोई नया आंकड़ा नहीं

वित्तीय वर्ष 2024-25 की विधायकवार रिपोर्ट में भी क्रम संख्या 10 पर प्रसन्न कुमार चौधरी और शामली विधानसभा का नाम मौजूद है। लेकिन उनके नाम के सामने अनुशंसित, लंबित, स्वीकृत या निरस्त कार्यों की कोई संख्या दर्ज नहीं दिखाई देती।

इसी रिपोर्ट में शामली जिले की कैराना विधानसभा सीट के विधायक नाहिद हसन की पंक्ति भी रिक्त दिखाई देती है, जबकि थाना भवन विधायक अशरफ अली खान के नाम के सामने संख्यात्मक विवरण मौजूद है। इससे पता चलता है कि रिक्त पंक्ति रिपोर्ट में वास्तव में डेटा न दर्ज होने की स्थिति को दिखाती है।

यहां दो संभावनाएं हो सकती हैं—

पहली, वित्तीय वर्ष 2024-25 में रिपोर्ट तैयार होने तक संबंधित विधायक के नाम से कोई नया कार्य पोर्टल पर दर्ज नहीं था।

दूसरी, कार्य या वित्तीय प्रस्ताव किसी अन्य चरण में रहे हों लेकिन इस विशेष “विधायकवार कार्य का विवरण” रिपोर्ट में उनका डेटा प्रदर्शित नहीं हुआ हो।

बिना कार्यवार या विधायकवार वित्तीय रिपोर्ट देखे यह कहना उचित नहीं होगा कि विधायक निधि जारी नहीं हुई, कोई पैसा खर्च नहीं हुआ या क्षेत्र में कोई विकास कार्य नहीं कराया गया।

2025-26 की रिपोर्ट में भी पंक्ति रिक्त

वित्तीय वर्ष 2025-26 की आधिकारिक PDF में क्रम संख्या 10 पर प्रसन्न कुमार चौधरी, शामली विधानसभा और नोडल जनपद शामली दर्ज हैं। उनके नाम के सामने किसी श्रेणी में संख्या नहीं दी गई।

इस वर्ष शामली जिले की तीन विधानसभा सीटों में केवल थाना भवन विधायक अशरफ अली खान के नाम के सामने संख्यात्मक विवरण दिखाई देता है। कैराना और शामली की पंक्तियां रिक्त हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट में प्रसन्न कुमार चौधरी के सामने डेटा न होने का अर्थ यह हो सकता है कि पोर्टल पर संबंधित अवधि तक नई संस्तुतियां दर्ज नहीं थीं। लेकिन यह निष्कर्ष तभी अंतिम माना जा सकता है जब MLA LADS UP पोर्टल की कार्यवार और वित्तीय रिपोर्ट से मिलान किया जाए।

आधिकारिक विधायक निधि पोर्टल पर अलग-अलग रिपोर्ट उपलब्ध होती हैं। इनमें विधायकवार कार्य, जनपदवार कार्य, विधायकवार बजट आवंटन और व्यय की जानकारी अलग मॉड्यूल में दर्ज की जाती है। पाठक उत्तर प्रदेश विधायक निधि के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध रिपोर्टों के माध्यम से ताजा स्थिति जांच सकते हैं।

2026-27 में भी कोई संख्यात्मक प्रविष्टि नहीं

वित्तीय वर्ष 2026-27 की रिपोर्ट में भी क्रम संख्या 10 पर प्रसन्न कुमार चौधरी और शामली विधानसभा का नाम मौजूद है, लेकिन उनके सामने किसी नए कार्य की संख्या दर्ज नहीं है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 अभी जारी है। चारों PDF रिपोर्टें 13 जुलाई 2026 को निर्यात की गई थीं। इसका अर्थ है कि 2026-27 के आंकड़े पूरे वित्तीय वर्ष के अंतिम आंकड़े नहीं हैं।

जुलाई 2026 के बाद नए प्रस्ताव दर्ज, स्वीकृत या निरस्त हो सकते हैं। इसलिए इस वर्ष की रिक्त पंक्ति को अंतिम वार्षिक प्रदर्शन नहीं माना जाना चाहिए।

चार वर्षों की रिपोर्ट का सार

उपलब्ध चारों PDF के आधार पर—

  • 2023-24 में 56 कार्य अनुशंसित हुए।
  • सभी 56 कार्य स्वीकृत हुए।
  • कोई प्रस्ताव लंबित नहीं रहा।
  • कोई कार्य निरस्त नहीं हुआ।
  • 2024-25 में कोई संख्यात्मक प्रविष्टि नहीं है।
  • 2025-26 में कोई संख्यात्मक प्रविष्टि नहीं है।
  • 2026-27 की जुलाई तक की रिपोर्ट में भी कोई संख्यात्मक प्रविष्टि नहीं है।

इस तरह चारों रिपोर्टों में कुल 56 अनुशंसित और 56 स्वीकृत कार्य ही सत्यापित रूप से दर्ज हैं।

क्या 56 स्वीकृत कामों को पूर्ण कार्य माना जा सकता है?

नहीं। स्वीकृत कार्य और पूर्ण कार्य दो अलग स्थितियां हैं।

जब कोई विधायक विकास कार्य की संस्तुति करता है तो जिला प्रशासन प्रस्ताव का परीक्षण करता है। भूमि, लागत, सार्वजनिक उपयोगिता और योजना की पात्रता जांचने के बाद काम को प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दी जाती है।

इसके बाद कई चरण बाकी रहते हैं—

इसलिए 56 स्वीकृत कार्यों का अर्थ यह नहीं है कि सभी काम पूर्ण हो चुके हैं। इसके लिए कार्य प्रगति और पूर्णता से जुड़ी अलग रिपोर्ट की जरूरत होगी।

विधायक निधि का खर्च कितना हुआ?

चारों आधिकारिक PDF में रुपये के रूप में धनराशि नहीं दी गई है। इसमें यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि—

  • वर्ष में कितनी निधि आवंटित हुई
  • पिछले वर्ष से कितना पैसा बचा था
  • 56 कामों की कुल स्वीकृत लागत कितनी थी
  • कितनी धनराशि जारी हुई
  • वास्तविक भुगतान कितना हुआ
  • कितनी राशि शेष रही
  • प्रति कार्य औसत लागत कितनी थी

इसलिए केवल इस रिपोर्ट के आधार पर प्रसन्न कुमार चौधरी की विधायक निधि के वास्तविक खर्च की राशि नहीं बताई जा सकती।

वर्षवार राज्यस्तरीय रिपोर्टों के लिए पाठक निम्न लिंक देख सकते हैं—

  • UP MLA Fund Report 2023-24
  • UP MLA Fund Report 2024-25
  • UP MLA Fund Report 2025-26
  • UP MLA Fund Report 2026-27

विधायक निधि से जुड़ी सभी विशेष रिपोर्टें उत्तर प्रदेश विधायक निधि रिपोर्ट सेक्शन पर भी देखी जा सकती हैं।

प्रसन्न कुमार चौधरी का राजनीतिक परिचय

UttarPradesh.org पर उपलब्ध विधायक प्रोफाइल के अनुसार प्रसन्न कुमार चौधरी का जन्म 5 जुलाई 1970 को शामली जिले के कासमपुर गांव में हुआ। उन्होंने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की और राजनीति में आने से पहले कृषि, उद्योग तथा सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे।

उनका राजनीतिक सफर स्थानीय निकाय की राजनीति से शुरू हुआ। जिला पंचायत सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान उन्होंने अपनी संगठनात्मक क्षमता और स्थानीय पकड़ का प्रदर्शन किया।

प्रोफाइल के अनुसार उनकी पत्नी ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में प्रसन्न कुमार चौधरी की रणनीतिक भूमिका को उनकी राजनीतिक पहचान मजबूत करने वाला चरण माना गया।

उनका पूरा परिचय यहां पढ़ा जा सकता है—

प्रसन्न कुमार चौधरी का विधायक प्रोफाइल, जीवन परिचय और राजनीतिक सफर

भाजपा से रालोद तक का राजनीतिक सफर

प्रसन्न कुमार चौधरी की राजनीतिक यात्रा अलग-अलग राजनीतिक चरणों से गुजरी। UttarPradesh.org की प्रोफाइल रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने एक समय भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था। विधानसभा चुनाव से पहले बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच उन्होंने भाजपा छोड़कर राष्ट्रीय लोक दल का साथ लिया।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2020-21 के किसान आंदोलन के बाद जाट और किसान राजनीति के समीकरण तेजी से बदले। शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत और मेरठ जैसे जिलों में राष्ट्रीय लोक दल ने अपना प्रभाव मजबूत करने की कोशिश की।

प्रसन्न कुमार चौधरी को रालोद ने शामली विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। उस समय रालोद और समाजवादी पार्टी गठबंधन में चुनाव लड़ रहे थे। गठबंधन के सामाजिक समीकरण, किसान आंदोलन का असर और स्थानीय राजनीतिक पकड़ उनके पक्ष में महत्वपूर्ण साबित हुई।

शामली विधानसभा चुनाव 2022 का परिणाम

वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रसन्न कुमार चौधरी ने राष्ट्रीय लोक दल के टिकट पर शामली सीट से चुनाव लड़ा। उनके सामने भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन विधायक तेजेंद्र सिंह निर्वाल प्रमुख प्रतिद्वंद्वी थे।

UttarPradesh.org की राजनीतिक प्रोफाइल के अनुसार प्रसन्न कुमार चौधरी ने यह चुनाव 7,107 मतों के अंतर से जीता। इसके साथ वह पहली बार उत्तर प्रदेश की अठारहवीं विधानसभा के सदस्य बने।

शामली जिले के 2022 विधानसभा विजेता

विधानसभा सीटविजेतापार्टी
कैरानानाहिद हसनसमाजवादी पार्टी
शामलीप्रसन्न कुमार चौधरीराष्ट्रीय लोक दल
थाना भवनअशरफ अली खानराष्ट्रीय लोक दल

शामली जिले की तीनों सीटों पर 2022 में सपा-रालोद गठबंधन के उम्मीदवार विजयी हुए थे। प्रसन्न कुमार चौधरी की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि उन्होंने भाजपा के मौजूदा विधायक को हराया था।

पहली बार विधायक बनने के बाद विकास की चुनौती

पहली बार विधानसभा पहुंचने वाले विधायक के सामने दोहरी चुनौती होती है। उन्हें विधानसभा में क्षेत्र की आवाज उठाने के साथ-साथ विधायक निधि के माध्यम से स्थानीय विकास प्रस्तावों को भी प्रशासनिक प्रक्रिया में आगे बढ़ाना होता है।

वित्तीय वर्ष 2023-24 में 56 प्रस्तावों की संस्तुति और सभी की स्वीकृति इस लिहाज से सकारात्मक संकेत है। लेकिन इसके बाद तीन वर्षों की रिपोर्ट में कोई नया संख्यात्मक विवरण न मिलना सवाल पैदा करता है।

यह सवाल विधायक निधि के वास्तविक उपयोग से जुड़ा है—

  • क्या नए प्रस्ताव पोर्टल पर दर्ज नहीं किए गए?
  • क्या कोई प्रशासनिक या तकनीकी कारण था?
  • क्या निधि पुराने स्वीकृत कामों में प्रतिबद्ध थी?
  • क्या डेटा रिपोर्ट में अपडेट नहीं हुआ?
  • क्या कार्य दूसरी रिपोर्ट में दर्ज हैं?
  • क्या विधायकवार वित्तीय रिपोर्ट में राशि उपलब्ध है?

इन सवालों का जवाब कार्यवार विवरण और वित्तीय रिपोर्ट के मिलान से ही मिल सकता है।

शामली क्षेत्र की विकास प्राथमिकताएं

शामली विधानसभा क्षेत्र में शहरी और ग्रामीण दोनों प्रकार की आबादी शामिल है। यहां विधायक निधि के माध्यम से कई तरह के छोटे और मध्यम जनोपयोगी काम कराए जा सकते हैं।

सड़क और संपर्क मार्ग

ग्रामीण रास्तों, गलियों, सीसी रोड और इंटरलॉकिंग का निर्माण स्थानीय स्तर की सबसे सामान्य मांगों में शामिल होता है। बरसात के दौरान जलभराव और खराब संपर्क मार्ग ग्रामीण आबादी के लिए बड़ी समस्या बनते हैं।

नाली और जल निकासी

शामली शहर तथा आसपास के गांवों में जल निकासी व्यवस्था महत्वपूर्ण है। विधायक निधि से छोटी नालियां, क्रॉस ड्रेन और पुलिया निर्माण जैसे काम प्रस्तावित किए जा सकते हैं।

विद्यालय और शिक्षा

सरकारी विद्यालयों में अतिरिक्त कक्ष, चहारदीवारी, शौचालय, पेयजल और फर्नीचर जैसी सुविधाएं विधायक निधि के माध्यम से उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य और पेयजल

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में छोटे निर्माण, मरीजों के लिए शेड, सार्वजनिक हैंडपंप और सबमर्सिबल पंप जैसे कार्य भी स्थानीय जरूरतों में शामिल हो सकते हैं।

सामुदायिक भवन

गांवों में सामुदायिक भवन, बारातघर, यात्री शेड और सार्वजनिक बैठने के स्थानों के लिए भी विधायक निधि से संस्तुति की जा सकती है।

100 प्रतिशत स्वीकृति दर की वास्तविक व्याख्या

चार वर्षों के कुल दर्ज आंकड़ों में प्रसन्न कुमार चौधरी की स्वीकृति दर 100 प्रतिशत है, क्योंकि केवल 2023-24 के 56 प्रस्ताव दर्ज हैं और सभी स्वीकृत हुए।

लेकिन इस प्रतिशत को व्यापक प्रदर्शन रैंकिंग की तरह नहीं पढ़ना चाहिए। यदि किसी विधायक ने 200 प्रस्ताव दिए और 180 स्वीकृत हुए तो उसकी स्वीकृति दर 90 प्रतिशत होगी, लेकिन स्वीकृत कार्यों की संख्या 180 होगी। वहीं 56 में 56 स्वीकृति का प्रतिशत ज्यादा है, लेकिन कुल काम कम हैं।

इसलिए विधायक निधि के मूल्यांकन में चार संकेतक एक साथ देखने चाहिए—

  • कुल प्रस्तावित कार्य
  • कुल स्वीकृत कार्य
  • कुल खर्च
  • पूर्ण कार्यों की संख्या

इन चारों के बिना केवल स्वीकृति प्रतिशत अधूरी तस्वीर पेश करता है।

जनता को कौन-सी जानकारी मिलनी चाहिए?

विधायक निधि की पारदर्शिता के लिए प्रत्येक स्वीकृत कार्य के साथ निम्न जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए—

यदि ये सभी विवरण सार्वजनिक पोर्टल पर आसानी से मिलें तो नागरिक यह जांच सकते हैं कि उनके क्षेत्र में विधायक निधि का पैसा कहां और कैसे उपयोग हुआ।

प्रसन्न कुमार चौधरी की रिपोर्ट से क्या तस्वीर सामने आती है?

चारों आधिकारिक PDF के आधार पर प्रसन्न कुमार चौधरी के विधायक निधि कार्यों की तस्वीर सीमित लेकिन स्पष्ट है।

वर्ष 2023-24 में उन्होंने 56 कार्यों की संस्तुति की और सभी प्रस्ताव स्वीकृत हुए। यह प्रस्ताव तैयार करने और उन्हें प्रशासनिक स्वीकृति तक पहुंचाने के मामले में बेहतर स्थिति दिखाता है।

लेकिन 2024-25, 2025-26 और जुलाई 2026 तक की 2026-27 रिपोर्ट में कोई नया संख्यात्मक विवरण दर्ज नहीं है। इसलिए चार वर्षों का कुल आंकड़ा 56 अनुशंसित और 56 स्वीकृत कार्यों तक सीमित है।

यह स्थिति किसी अंतिम राजनीतिक निष्कर्ष का आधार नहीं बन सकती। वास्तविक आकलन के लिए विधायकवार बजट आवंटन, वित्तीय व्यय, कार्यों की शुरुआत और पूर्णता की अलग रिपोर्ट देखना जरूरी है।

फिर भी उपलब्ध डेटा यह जरूर बताता है कि प्रसन्न कुमार चौधरी के नाम से दर्ज सभी प्रस्ताव स्वीकृत हुए और कोई प्रस्ताव निरस्त या लंबित नहीं रहा। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इन 56 कार्यों में से कितने जमीन पर पूरे हुए, उनकी कुल लागत कितनी थी और उनसे शामली विधानसभा क्षेत्र की कितनी आबादी को लाभ मिला।

  • समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।

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