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Priyanka Chopra Parenting Tips
आज के समय में बच्चे दुनिया के किसी भी देश में बड़े हों, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़ाव उन्हें एक अलग पहचान देता है। हाल ही में प्रियंका चोपड़ा का अपनी बेटी को देवी मंत्र सुनाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहा। विदेश में रहने के बावजूद वह अपनी बेटी को भारतीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं से परिचित कराने की कोशिश करती नजर आईं।
यह सिर्फ किसी एक परिवार की बात नहीं है, बल्कि हर उस माता-पिता के लिए एक खूबसूरत सीख है जो चाहते हैं कि उनके बच्चे मॉडर्न सोच के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान भी समझें। बच्चों को संस्कृति से जोड़ना सिर्फ पूजा-पाठ सिखाना नहीं है, बल्कि उन्हें अपनी भाषा, त्योहारों, परिवार के मूल्यों और परंपराओं से परिचित कराना भी है। आइए जानते हैं कि आज के दौर में यह क्यों जरूरी है और रोजमर्रा की जिंदगी में इसे आसान तरीके से कैसे अपनाया जा सकता है।
1. बच्चों को अपनी पहचान समझने में मदद मिलती है
जब बच्चे अपनी भाषा, त्योहार और परंपराओं के बारे में जानते हैं, तो उन्हें यह समझ आता है कि वे किस संस्कृति से जुड़े हैं। इससे उनमें अपनी पहचान को लेकर आत्मविश्वास बढ़ता है।
2. घर में अपनी मातृभाषा जरूर बोलें
अगर संभव हो, तो घर में रोज कुछ समय अपनी मातृभाषा में बात करें। इससे बच्चे नई भाषा सीखने के साथ-साथ अपनी भाषा से भी जुड़े रहते हैं। यह उनके परिवार से भावनात्मक रिश्ता भी मजबूत करता है।
3. त्योहारों को सिर्फ छुट्टी नहीं, अनुभव बनाएं
रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, दिवाली या नवरात्र जैसे त्योहारों पर बच्चों को छोटी-छोटी जिम्मेदारियां दें। उनसे पूजा की थाली सजवाएं, मिठाई बनाने में मदद लें या त्योहार की कहानी सुनाएं। इससे त्योहार उनके लिए यादगार बन जाते हैं।
4. कहानियों के जरिए संस्कार देना आसान है
बच्चों को रामायण, महाभारत या पंचतंत्र की कहानियां उनकी उम्र के अनुसार आसान भाषा में सुनाएं। कहानियों के जरिए दया, ईमानदारी, सम्मान और जिम्मेदारी जैसे जीवन के मूल्य आसानी से समझाए जा सकते हैं।
5. परंपरा और आधुनिकता में संतुलन रखें
बच्चों पर अपनी संस्कृति थोपने की बजाय उन्हें उसके पीछे की वजह समझाएं। जब वे किसी परंपरा का अर्थ समझेंगे, तो उसे अपनाना उनके लिए आसान और स्वाभाविक होगा।
6. परिवार के साथ बिताया समय सबसे बड़ी सीख है
दादा-दादी, नाना-नानी या परिवार के बड़े लोगों के साथ समय बिताने से बच्चों को परिवार की कहानियां, रीति-रिवाज और जीवन के अनुभव जानने का मौका मिलता है। यह सीख किसी किताब से नहीं मिलती।
आज बच्चे ग्लोबल दुनिया में बड़े हो रहे हैं, जहां उन्हें अलग-अलग संस्कृतियों से सीखने का मौका मिलता है। ऐसे में अपनी संस्कृति से जुड़ाव उन्हें संतुलित सोच देता है। वे नई चीजें भी अपनाते हैं और अपनी पहचान भी नहीं भूलते। यही संतुलन उन्हें भविष्य में एक अच्छा इंसान बनने में मदद करता है।
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अवनी बागरोलाauthor
अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और आधुनिक जीवनशैली से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें युवा और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 2,500 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।
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